इंदौर हाईकोर्ट ने कहा-अगर सुलह की गुंजाइश नहीं तो 6 महीने का इंतजार जरूरी नहीं 15 दिन में फैसला करें
इंदौर हाई कोर्ट ने कहा कि आपसी सहमति से तलाक में छह महीने की प्रतीक्षा अवधि हर मामले में अनिवार्य नहीं है। लंबे समय से अलग रह रहे दंपती में सुलह की संभावना न होने पर परिस्थितियों के आधार पर अवधि माफ की जा सकती है। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट को आवेदन पर सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के फैसलों के अनुरूप नए सिरे से निर्णय लेने के निर्देश दिए।
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