भोपाल:एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई, अवैध कफ सिरप फैक्ट्री का भंडाफोड़; 10 आरोपी गिरफ्तार

भोपाल। गांधीनगर में एसटीएफ की कार्रवाई में करीब 75 हजार बोतल नशीला कफ सिरप बरामद किया गया है। पूछताछ में मुबारकपुर क्षेत्र में भी स्टॉक छिपाए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में तीन नाबालिगों समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो आरोपी अभी फरार हैं। एसटीएफ का मानना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
मुबारकपुर में छिपाकर रखा गया था स्टॉक
गिरफ्तार आरोपियों से देर रात तक चली पूछताछ में पता चला कि नशीले कफ सिरप की बड़ा खेप मुबारकपुर क्षेत्र में भी अलग-अलग स्थानों पर छिपाकर रखी गई थी। इस जानकारी के बाद एसटीएफ की टीम ने तत्काल वहां सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। अधिकारियों ने कई संभावित ठिकानों को चिन्हित किया है, जहां दबिश दी जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि मुख्य बरामदगी के अलावा भी बड़ी मात्रा में अवैध स्टॉक मौजूद हो सकता है। इसी वजह से पूरे नेटवर्क की गहन पड़ताल की जा रही है।
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डेढ़ करोड़ का माल और 10 आरोपी गिरफ्तार
एसटीएफ ने गांधीनगर स्थित डोबरा पटेल सिटी कॉलोनी के एक मकान पर छापा मारकर करीब 75 हजार बोतल नशीला कफ सिरप जब्त किया था। बरामद माल की अनुमानित कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपए बताई जा रही है। कार्रवाई के दौरान तीन नाबालिगों समेत कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में सामने आया कि सभी आरोपी एक संगठित गिरोह की तरह काम कर रहे थे। प्रत्येक व्यक्ति को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिससे कारोबार बिना किसी संदेह के चलता रहे।
अलग-अलग टीमों में बंटा था पूरा नेटवर्क
जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह ने अपने कामकाज को कई हिस्सों में बांट रखा था। मुख्य आरोपी अकील खान और उसके सहयोगी भोपाल और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में माल की सप्लाई का काम संभालते थे। इसके लिए लोडिंग वाहनों का उपयोग किया जाता था। वहीं अन्य सदस्य स्टॉक को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, उसे छिपाने और जरूरत पड़ने पर स्थान बदलने का काम करते थे। इस सुनियोजित व्यवस्था ने लंबे समय तक नेटवर्क को सक्रिय बनाए रखा।
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नाबालिगों से कराया जा रहा था काम
पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया कि गिरोह में नाबालिगों से काम कराया जा रहा था। तीन बाल अपचारियों को पैकेजिंग, माल व्यवस्थित करने और अन्य सहायक कार्यों में लगाया गया था। जांच अधिकारियों के अनुसार बच्चों से रेपर बदलने और पैकिंग तैयार कराने जैसे काम कराए जाते थे। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि नाबालिगों को इस अवैध गतिविधि में शामिल करने के पीछे मुख्य भूमिका किसकी थी।
रेपर बदलकर बाजार में खपाई जा रही थी सिरप
प्रारंभिक जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि आरोपी कफ सिरप के असली रेपर हटाकर उस पर दूसरे रेपर चढ़ा देते थे। इसके बाद माल को बाजार में सप्लाई किया जाता था, जिससे उसकी पहचान छिपाई जा सके। अधिकारियों को आशंका है कि इसी तरीके से भोपाल और आसपास के जिलों में बड़ी मात्रा में नशीले सिरप की सप्लाई की जा रही थी। बरामद सिरप के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। वहीं फरार दो आरोपियों की तलाश में गठित विशेष टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।












