ईरान पर ट्रंप की सख्त शर्तें!व्हाइट हाउस में मंथन के बाद भी फैसला नहीं, ट्रंप-ईरान डील पर बना सस्पेंस

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर बातचीत तेज हो गई है लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की, मगर कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य और यूरेनियम भंडार जैसे विषय समझौते की राह में बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
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व्हाइट हाउस में मंथन के बाद भी फैसला नहीं, ट्रंप-ईरान डील पर बना सस्पेंस
फाइल फोटो

वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान, दोनों देशों के बीच कई दौर की वार्ताओं के बावजूद अब तक किसी ठोस समझौते की घोषणा नहीं हुई है। व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लंबी बैठक कर प्रस्तावित समझौते के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। बैठक के बाद भी कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका। इस बीच दोनों देशों की ओर से संकेत मिले हैं कि बातचीत जारी रहेगी लेकिन कुछ अहम मुद्दों पर सहमति बनना अभी बाकी है।

व्हाइट हाउस में हुई अहम बैठक, फैसला टला

व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में राष्ट्रपति ट्रंप ने करीब दो घंटे तक अधिकारियों के साथ विचार विमर्श किया। इस बैठक में ईरान के साथ संभावित समझौते के मसौदे की समीक्षा की गई। अधिकारियों के अनुसार कई बिंदुओं पर चर्चा हुई लेकिन किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सका। बैठक समाप्त होने के बाद भी व्हाइट हाउस की ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि किसी भी समझौते को तभी मंजूरी दी जाएगी जब वह अमेरिका के राष्ट्रीय हितों के अनुरूप होगा और राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा तय की गई शर्तों को पूरा करेगा।

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परमाणु कार्यक्रम बना सबसे बड़ा मुद्दा

अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। राष्ट्रपति ट्रंप लगातार यह दोहराते रहे हैं कि ईरान को किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उनका मानना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता के लिए यह बेहद जरूरी है। इसी कारण अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर स्पष्ट और मजबूत प्रतिबद्धता दिखाए। वहीं ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन कर रहा है।

युद्धविराम बढ़ाने पर भी चर्चा

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार दोनों देशों के बीच युद्धविराम को आगे बढ़ाने को लेकर भी बातचीत हुई है। एक प्रारंभिक ढांचे पर सहमति बनी थी, जिसके तहत युद्धविराम की अवधि 60 दिनों तक बढ़ाई जा सकती है। इसके साथ ही परमाणु कार्यक्रम को लेकर नए सिरे से वार्ता शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा गया। इस योजना को लागू करने के लिए दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी आवश्यक है। फिलहाल यही प्रक्रिया समझौते को अंतिम रूप मिलने से रोक रही है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी मतभेद

बातचीत का एक अहम विषय होर्मुज जलडमरूमध्य भी है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं कि इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह सामान्य हो और किसी प्रकार की रुकावट न रहे। अमेरिका का यह भी कहना है कि समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्र में मौजूद बारूदी सुरंगों को हटाया जाना चाहिए। दूसरी ओर ईरान इन मुद्दों पर अपने हितों और सुरक्षा चिंताओं को भी सामने रख रहा है, जिससे बातचीत आसान नहीं हो पा रही है।

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यूरेनियम भंडार पर उठे नए सवाल

राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को लेकर भी सहमति बनने की संभावना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका कुछ शर्तों के साथ आगे बढ़ने को तैयार है। ईरानी अधिकारियों और सरकारी मीडिया ने इन दावों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बातचीत अभी जारी है और ट्रंप द्वारा बताई गई कई बातें वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खातीं। इससे साफ है कि दोनों पक्ष अभी भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अलग अलग सोच रखते हैं।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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