भोपाल। मप्र विधानसभा में गुरुवार को इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों का मुद्दा छाया रहा। प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस विषय पर पूछा कि क्या जलजनित बीमारी के प्रकोप की जानकारी थी? दूषित जल से कितनी मौतें हुई हैं? साथ ही उन्होंने जांच, रिपोर्ट और विषय के बारे में जानना चाहा। सिंघार के सवाल का उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने लिखित उत्तर में बताया कि क्षेत्र में दूषित पानी की बीमारी के कारण अब तक 20 लोगों की जान जा चुकी है, 459 लोग अस्पताल में भर्ती किया गया और चार का इलजा चल रहा है। शुक्ल ने बताया कि 29 दिसंबर 2025 को पहली बार इस बीमारी की सूचना मिली थी। सरकार ने आधिकारिक तौर पर माना कि अब तक कॉलरा (हैजा) और ई कोलाई संक्रमण के कारण 20 लोगों की मौत हुई है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मौतों का आंकड़ा ज्यादा होने और मुआवजा कम मिलने की बात कही, तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह विषय राजनीति से ऊपर है और इसमें पक्ष-विपक्ष नहीं होना चाहिए। उन्होंने ऐलान किया कि सरकार अब मृतकों के परिजनों को 4 लाख के बजाय 5 लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में दोषी पाए जाने वाले आईएएस अधिकारी तक को सस्पेंड कर सख्त कार्रवाई की गई है।
सदन में विपक्ष ने भागीरथपुरा की घटना के लिए नगर निगम और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पूछा कि क्या इस लापरवाही के लिए विभागीय मंत्री और महापौर जिम्मेदार नहीं हैं? उन्होंने नैतिक आधार पर मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की। हालांकि, सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि घटना की जानकारी मिलते ही तत्काल प्रभाव से उचित कदम उठाए गए और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपनी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन किया है।
सवाल के जवाब में मंत्री शुक्ल ने बताया कि मामले की वैज्ञानिक जांच के लिए कोलकाता और इंदौर की लैब में मरीजों के स्टूल और पानी के सैंपल भेजे गए थे। जांच रिपोर्ट में हैजा और ई.कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। उन्होंने बताया कि फिलहाल यह मामला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में जनहित याचिका के रूप में विचाराधीन है।
विपक्ष के हंगामे के बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि भागीरथपुरा मामले पर चर्चा का आश्वासन दिया जा चुका है और कार्यवाही प्रभावित होने के बावजूद इस पर मौका दिया जाएगा। अध्यक्ष के इस आश्वासन के बाद कांग्रेसियों का गुस्सा कुछ कम हुआ। इससे पहले सदन की कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस विधायक महेश परमार, कैलाश कुशवाह, नारायण सिंह पट्टा, फूल सिंह बरैया, विक्रांत भूरिया, सिद्धार्थ कुशवाह, अभिजीत शाह, दिनेश जैन बॉस गर्भगृह में धरने पर बैठ गए थे।