PU Special :स्कूल की परेड में शामिल होने वाले बच्चे अब कलेक्टर के तौर पर करेंगे ध्वजारोहण, बैतूल-डिंडौरी कलेक्टरों के लिए खास होगा 15 अगस्त

पुष्पेन्द्र सिंह, भोपाल। कभी स्कूल की परेड में शामिल होकर तिरंगे को सलाम करने वाले अफसर अब उसी तिरंगे को पहली बार कलेक्टर के रूप में फहराएंगे। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में पहली बार कलेक्टर बने डॉ. सौरभ संजय सोनवणे और डिंडौरी जिले की कलेक्टर अंजू सिंह भदौरिया के लिए इस वर्ष का स्वतंत्रता दिवस खास है। 15 अगस्त को दोनों पहली बार जिला कलेक्टर के रूप में ध्वजारोहण करेंगे और परेड की सलामी लेंगे। बचपन की स्वतंत्रता दिवस की स्मृतियों से लेकर प्रशासनिक सेवा की यात्रा तक, यह मौका दोनों के लिए गर्व के साथ बड़ी जिम्मेदारी का भी एहसास करा रहा है। प्रस्तुत है पीपुल्स समाचार से बातचीत के प्रमुख अंश:-
बैतूल कलेक्टर से पीपुल्स समाचार की बातचीत
सवाल: पहली बार ध्वजारोहण को लेकर क्या महसूस कर रहे हैं?
जवाब: यह मेरे लिए भावुक और गौरवपूर्ण क्षण है। कलेक्टर के रूप में ध्वजारोहण और परेड की सलामी लेना केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान का अवसर है। तिरंगे के पीछे करोड़ों देशवासियों की आशाएं जुड़ी हैं। इसलिए इसे जिले की विकास और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता मजबूत करने का अवसर मानता हूं।
सवाल: कब लगा था कि एक दिन परेड की सलामी लेंगे?
जवाब: बचपन में 15 अगस्त और 26 जनवरी की स्कूल परेड में अलग उत्साह होता था। तब कल्पना नहीं थी कि एक दिन जिला स्तर के समारोह में ध्वजारोहण करूंगा। वर्ष 2007 में एनसीसी की ओर से महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हुए गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुआ था। आज वह स्मृति फिर ताजा हो रही है।
सवाल: क्या कभी ध्वजारोहण किया?
जवाब: स्कूल और संस्थागत कार्यक्रमों में अवसर मिले, लेकिन कलेक्टर के रूप में पहली बार ध्वजारोहण करना अलग अनुभव है, क्योंकि इसमें पूरे जिले के प्रतिनिधित्व की जिम्मेदारी जुड़ी है।
सवाल: क्या कभी संकल्प लिया था?
जवाब: ध्वजारोहण लक्ष्य नहीं था। लक्ष्य ऐसी जिम्मेदारी तक पहुंचना था, जहां अपने काम से समाज और देश के लिए सार्थक योगदान दे सकूं। आज यह उस यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है।
सवाल: प्रेरणा किससे मिली?
जवाब: मेरे माता-पिता, परिवार और शिक्षकों से। उन्होंने ईमानदारी, अनुशासन और दायित्व निभाने का संस्कार दिया। मेरे लिए तिरंगे का सच्चा सम्मान यही है कि प्रशासन संवेदनशील, पारदर्शी और उत्तरदायी बने और योजनाओं का लाभ हर नागरिक तक पहुंचे।
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डिंडौरी कलेक्टर बोलीं, आदिवासी जिले में तिरंगा फहराना सौभाग्य
डिंडौरी जिले की कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के लिए यह स्वतंत्रता दिवस विशेष है। वह पहली बार कलेक्टर के रूप में ध्वजारोहण करेंगी। उनका कहना है कि एक शासकीय सेवक के रूप में जनसेवा का भाव हमेशा मन में रहता है। आदिवासी जिले में राष्ट्रध्वज फहराने का अवसर मिलना उनके लिए सम्मान और सौभाग्य की बात है। यह जिम्मेदारी उन्हें और अधिक निष्ठा, समर्पण और लगन के साथ जिले के विकास के लिए काम करने की प्रेरणा देती है।
संकल्प: इस अवसर पर मिली जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाते हुए जिले के प्रत्येक नागरिक के कल्याण और विकास के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दूंगी। अशोकनगर, बालाघाट, बड़वानी और आगर मालवा के कलेक्टर भी पहली बार अपने जिले में घ्वजारोहण करेंगे।













