IAS नेहा मराव्या के खिलाफ अधिकारी-कर्मचारी सड़क पर उतरे, अभद्र व्यवहार और अनावश्यक दबाव का लगाया आरोप

जनजातीय क्षेत्रीय विकास परियोजना (TADP) की संचालक और IAS अधिकारी नेहा मराव्या की कार्यप्रणाली को लेकर अधिकारियों और कर्मचारियों का विरोध खुलकर सामने आया है। शुक्रवार को अधिकारी-कर्मचारी उनके कार्यालय के बाहर एकत्र हुए और नारेबाजी कर विरोध जताया। कर्मचारियों ने पेन डाउन रखकर कामकाज भी बंद रखा। आंदोलन कर रहे अधिकारियों-कर्मचारियों ने नेहा मराव्या पर अभद्र व्यवहार करने, बार-बार नोटिस देने, निलंबन की धमकी देने और अनावश्यक दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों ने पूरे मामले पर चर्चा के लिए मुख्य सचिव से मिलने का समय भी मांगा है।
आहार अनुदान की राशि को लेकर भी उठे सवाल
आंदोलन में शामिल एक अपर संचालक ने आहार अनुदान योजना का मुद्दा उठाया। उनके मुताबिक बैगा, सहरिया और भारिया समुदाय की करीब 2.40 लाख महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपए की सहायता दी जाती है। अधिकारियों का दावा है कि अगस्त की करीब 30 करोड़ रुपए की राशि अब तक हितग्राहियों के खातों में नहीं पहुंची है। अधिकारियों का आरोप है कि जिस प्रक्रिया से उनका सीधा संबंध नहीं है, उसके लिए भी उन्हें जिम्मेदार ठहराकर नोटिस दिए गए और इंक्रीमेंट रोकने जैसी कार्रवाई की गई।
तीन घंटे में जानकारी देने का दबाव
अधिकारियों का कहना है कि शासन स्तर से जारी प्रशासकीय स्वीकृतियों पर भी सवाल उठाए जाते हैं। प्रदेश में करीब 450 काम चल रहे हैं, जिनसे जुड़ी माप पुस्तिका और दूसरी जानकारी कम समय में उपलब्ध कराने का दबाव बनाया जाता है। अधिकारियों के मुताबिक माप पुस्तिका संबंधित एजेंसी के पास होती है, फिर भी कई बार सिर्फ तीन घंटे के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाते हैं। उनका कहना है कि इस तरह के दबाव से नियमित कार्यालयीन कामकाज प्रभावित हो रहा है।
40-50 साल पुराने रिकॉर्ड मांगने का आरोप
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कई योजनाओं से जुड़े दशकों पुराने रिकॉर्ड भी तत्काल मांगे जा रहे हैं। यदि कोई योजना वर्ष 1974 में शुरू हुई है तो उसके शुरुआती वर्षों के दस्तावेज भी तुरंत उपलब्ध कराने को कहा जाता है। अधिकारियों का कहना है कि इतने पुराने दस्तावेज तलाशने और जुटाने में स्वाभाविक रूप से समय लगता है। इसके बावजूद समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं होने पर नोटशीट में प्रतिकूल टिप्पणी और फटकार का सामना करना पड़ता है।
लोकसभा के सवाल पर महिला अधिकारी को फटकारने का आरोप
एक महिला अपर संचालक ने आरोप लगाया कि लोकसभा के एक सवाल से संबंधित जानकारी उनके पास तत्काल उपलब्ध नहीं थी। इसके बाद उन्हें बुलाकर जवाब नहीं देने पर फटकार लगाई गई। अधिकारी के मुताबिक उन्होंने दिल्ली से संबंधित जानकारी मंगवाकर उपलब्ध कराने की बात कही थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें डांट का सामना करना पड़ा। अधिकारियों का कहना है कि विभाग में पहले से पर्याप्त स्टाफ नहीं है और दूसरी ओर कई वर्षों पुराने रिकॉर्ड कम समय में जुटाने का दबाव बनाया जा रहा है।
बैठक में महिला अधिकारियों को बाहर जाने के लिए कहने का आरोप
अपर आयुक्त संजय वार्ष्णेय ने गुरुवार को हुई एक बैठक का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक वर्ष 2017 से संचालित एक योजना को लेकर बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे। आरोप है कि इसी दौरान दो महिला अपर संचालक स्तर की अधिकारियों को कथित तौर पर डांटकर कमरे से बाहर जाने के लिए कहा गया।
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अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को लिखा पत्र
नेहा मराव्या की कार्यप्रणाली को लेकर मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव को पत्र भेजा है। आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेल ने जनजातीय क्षेत्रों में चल रही योजनाओं, वित्तीय प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित शिकायतों की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। आयोग ने PM-JANMAN, SPMU और DPMU सहित विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन, उपलब्ध राशि और उसके इस्तेमाल से जुड़ी पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए हैं।
PVTG क्षेत्रों में खाद्यान्न वितरण पर भी सवाल
आयोग ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह यानी PVTG के पात्र परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने की व्यवस्था का भी उल्लेख किया है। आयोग के मुताबिक योजना के क्रियान्वयन और राशि के उपयोग को लेकर स्पष्टीकरण की जरूरत है। आयोग का कहना है कि जनजातीय योजनाओं का संचालन तय नियमों और प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार होना चाहिए, ताकि योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंच सके।
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राजपत्रित अधिकारी संघ ने भी मुख्य सचिव से की शिकायत
आदिम जाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग राजपत्रित अधिकारी संघ ने भी मुख्य सचिव को पत्र भेजकर संचालक की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताई है। संघ ने अधिकारियों-कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनाने और प्रशासनिक प्रक्रिया के मुताबिक काम करने में आ रही कठिनाइयों का आरोप लगाया है। संघ ने करीब 50 साल पुराने रिकॉर्ड एक कार्य दिवस में उपलब्ध कराने के निर्देश को अव्यावहारिक बताया है। इसके अलावा संघ ने कार्यालय समय के बाद कर्मचारियों को रोकने संबंधी निर्देश वापस लेने, आहार अनुदान योजना में जिम्मेदारियां स्पष्ट करने और स्थानांतरण संबंधी फैसलों पर पुनर्विचार करने की मांग की है। फिलहाल अधिकारी-कर्मचारियों के विरोध, अनुसूचित जनजाति आयोग की शिकायत और राजपत्रित अधिकारी संघ के पत्र के बाद मामला प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, लगाए गए आरोपों पर IAS नेहा मराव्या का पक्ष सामने आना बाकी है।












