नहीं रहे MP के पूर्व विधायक रामप्रताप सिंह! 80 साल की उम्र में थमी सांस; नर्मदा जल का सपना रह गया अधूरा?

सतना। मध्य प्रदेश के वरिष्ठ राजनेता और नागौद विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रहे रामप्रताप सिंह का 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और दिल्ली के राजीव गांधी कैंसर रिसर्च सेंटर में उनका इलाज चल रहा था। तबीयत ज्यादा बिगड़ने के बाद उन्हें 27 सितंबर को एयरलिफ्ट कर दिल्ली ले जाया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। रामप्रताप सिंह के निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। कई नेताओं, उनके समर्थकों और परिचितों ने निधन पर दुख जताया।
तीन बार विधायक रहे, कई महत्वपूर्ण पद संभाले
रामप्रताप सिंह का राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा। वे नागौद विधानसभा क्षेत्र से 1985 और 1990 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए। इसके बाद 1998 में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। बताया जाता है कि उस समय उन्होंने क्षेत्र के लोगों की राय जानने के लिए अंतर्देशीय कार्ड के जरिए उनसे समर्थन मांगा था। लोगों की ओर से बड़ी संख्या में संदेश और समर्थन मिलने के बाद वे निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे।
उन्होंने 'झोपड़ी' चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ते हुए भाजपा प्रत्याशी रामदेव सिंह और कांग्रेस उम्मीदवार राजाराम त्रिपाठी को हराकर जीत दर्ज की थी। राजनीतिक जीवन में वे दो बार जनपद अध्यक्ष रहने के साथ जिला सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष और अपेक्स बैंक के संचालक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे।
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नर्मदा जल के लिए चलाया लंबा आंदोलन
रामप्रताप सिंह की पहचान सतना में नर्मदा नदी का पानी लाने की मांग को लेकर किए गए संघर्ष से भी रही। उन्होंने सतना में नर्मदा जल पहुंचाने के लिए लंबे समय तक आंदोलन किया। उन्होंने 'नर्मदा लाओ संघर्ष समिति' का गठन किया और इस मांग को लेकर कई बार सरकार के सामने अपनी बात रखी। विधायक रहने के दौरान और उसके बाद भी वे इस मुद्दे को लेकर सक्रिय रहे। हालांकि सतना में नर्मदा जल लाने का उनका सपना पूरा नहीं हो सका।
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आज सतना में होगा अंतिम संस्कार
परिजनों के अनुसार रामप्रताप सिंह की पार्थिव देह आज सतना पहुंचने की संभावना है। इसके बाद उनके गृहग्राम पतौरा में अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन से क्षेत्र में समर्थकों और शुभचिंतकों के बीच शोक का माहौल है।


















