रात 1 बजे जूनियर्स के हॉस्टल में पहुंचे सीनियर! दरवाजे खटखटाए, MGM में फिर रैगिंग का मामला

इंदौर। एमजीएम मेडिकल कॉलेज में रैगिंग को लेकर एक बार फिर शिकायत सामने आने से प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। फर्स्ट ईयर के विद्यार्थियों ने आरोप लगाया है कि रात करीब 1 से 3 बजे के बीच सीनियर छात्र हॉस्टल पहुंचे और सो रहे जूनियर्स के कमरों के दरवाजे खटखटाकर उन्हें बाहर आने के लिए कहा। डर के कारण कई विद्यार्थियों ने दरवाजे नहीं खोले और अपने कमरों के अंदर ही बैठे रहे।मामला इतना गंभीर था कि इसकी शिकायत नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC), नई दिल्ली तक पहुंची। वहां से शिकायत मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को भेजी गई, जिसके बाद एंटी रैगिंग कमेटी ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
शिकायत मिलते ही एक्शन में एंटी रैगिंग कमेटी
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि शिकायत को एंटी रैगिंग कमेटी को सौंप दिया गया है। कमेटी ने मामले पर विचार करने के बाद शिकायत करने वाले विद्यार्थियों के बयान दर्ज करने का फैसला लिया है।इसके साथ ही संबंधित हॉस्टल में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जाएगी। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि शिकायत वाली रात हॉस्टल में कौन-कौन मौजूद था और क्या सीनियर छात्रों ने वास्तव में जूनियर विद्यार्थियों के कमरों में जाकर उन्हें बाहर बुलाया था।यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है तो जिम्मेदार विद्यार्थियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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रात के सन्नाटे में दरवाजे खटखटाने से सहमे जूनियर
फर्स्ट ईयर के विद्यार्थियों के मुताबिक वे रात में अपने कमरों में सो रहे थे। इसी दौरान सीनियर छात्रों के हॉस्टल में आने और कमरों के दरवाजे खटखटाने की बात कही गई है। छात्रों को कमरे से बाहर निकलकर नीचे आने के लिए कहा गया।जूनियर विद्यार्थियों ने डर के कारण दरवाजे नहीं खोले और कमरे के भीतर ही बैठे रहे। छात्रों की शिकायत में रात के समय हॉस्टल में इस तरह बुलाए जाने को लेकर सुरक्षा और रैगिंग दोनों को लेकर चिंता जताई गई है।
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पहले भी रैगिंग से परेशान होकर हॉस्टल छोड़ चुके हैं छात्र
इस मामले के साथ कॉलेज में रैगिंग की पुरानी शिकायतों की चर्चा भी फिर सामने आई है। बताया गया है कि पूर्व में रैगिंग से परेशान होकर करीब 50 विद्यार्थियों ने हॉस्टल छोड़ दिया था। इन विद्यार्थियों ने कथित तौर पर निजी कमरे किराए पर लेकर रहना शुरू किया था।हॉस्टल को मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग की घटनाओं के लिहाज से संवेदनशील स्थान माना जाता है। इसी वजह से रैगिंग की शिकायतों के बाद हॉस्टल में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के दावे किए जाते रहे हैं।
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बार-बार शिकायतों से कॉलेज की साख पर सवाल
MGM मेडिकल कॉलेज में पहले भी रैगिंग से जुड़ी शिकायतें सामने आती रही हैं। हर बार प्रबंधन की ओर से रैगिंग रोकने के लिए सख्त इंतजाम होने की बात कही जाती रही है। ऐसे में नई शिकायत ने इन व्यवस्थाओं की निगरानी और प्रभावशीलता पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।सरकार और मेडिकल शिक्षा से जुड़े नियामक संस्थान मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग रोकने को लेकर लगातार सख्ती पर जोर देते रहे हैं। रैगिंग के कारण विद्यार्थियों पर गंभीर मानसिक और शैक्षणिक दबाव पड़ने की घटनाएं देश के अलग-अलग हिस्सों में सामने आती रही हैं।अब MGM मेडिकल कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी की जांच से यह स्पष्ट होगा कि फर्स्ट ईयर के छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि शिकायत सही पाई जाती है तो जिम्मेदार विद्यार्थियों पर क्या कार्रवाई होती है।




















