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हर चुनाव के बाद संस्थाओं पर सवाल क्यों? राहुल गांधी अपने आरोपों का आधार स्पष्ट करें: महापौर विक्रम अहके

SIR और चुनाव आयोग को लेकर राहुल गांधी के आरोपों पर छिंदवाड़ा महापौर विक्रम अहके ने सवाल उठाए। उन्होंने आरोपों के आधार और फॉर्म-6 को लेकर कांग्रेस से जवाब मांगा।
हर चुनाव के बाद संस्थाओं पर सवाल क्यों? राहुल गांधी अपने आरोपों का आधार स्पष्ट करें: महापौर विक्रम अहके

छिंदवाड़ा। चुनाव आयोग, SIR और मतदाता सूची को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर छिंदवाड़ा के महापौर विक्रम अहके ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी संवैधानिक संस्था के निर्णय से असहमति जताने का अधिकार सभी को है, लेकिन बिना तथ्यों की पुष्टि किए गंभीर आरोप लगाना और लोगों के मन में संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भ्रम या अविश्वास पैदा करना उचित नहीं है। महापौर ने कहा कि 26 सितंबर को चुनाव आयोग की बैठक में तीनों चुनाव आयुक्तों की ओर से स्पष्ट किया गया कि देशभर में चल रही SIR किसी एक व्यक्ति का फैसला नहीं है। उनके मुताबिक, यह निर्णय मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिया गया है।

SIR को लेकर राहुल गांधी से पूछा सवाल

विक्रम अहके ने कहा कि जब चुनाव आयोग अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है, तो राहुल गांधी और कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि वे चुनाव आयोग और SIR को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को किस आधार पर आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी संवैधानिक संस्था के फैसले पर सवाल उठाने से पहले तथ्यों की पूरी जांच की जानी चाहिए। उनके मुताबिक, राजनीतिक दलों से भी यही अपेक्षा रहती है कि वे गंभीर आरोप लगाने से पहले उनके आधार को स्पष्ट करें।

मीडिया रिपोर्ट के आधार पर आरोप लगाने पर सवाल

महापौर विक्रम अहके ने राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग और SIR को लेकर उठाए गए सवालों का जिक्र करते हुए कहा कि जिस मीडिया रिपोर्ट के आधार पर आरोप लगाए गए, चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बाद उस रिपोर्ट में किए गए दावों की तथ्यात्मकता पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने कहा कि केवल किसी मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाकर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर गंभीर आरोप लगाना और फिर उसे बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में पेश करना कितना उचित है, इसका जवाब राहुल गांधी और कांग्रेस को देना चाहिए।

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फॉर्म-6 के डिक्लेरेशन पर भी मांगा जवाब

विक्रम अहके ने SIR प्रक्रिया के तहत फॉर्म-6 से जुड़े डिक्लेरेशन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट के सामने फॉर्म-6 से जुड़े डिक्लेरेशन का मुद्दा सामने आया और न्यायिक प्रक्रिया में इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हुई। महापौर ने सवाल किया कि ऐसी स्थिति में फॉर्म-6 में मनमाने बदलाव किए जाने जैसे आरोप किस तथ्य के आधार पर लगाए जा रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस से इस पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

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राहुल गांधी और कांग्रेस से पूछे पांच सवाल

महापौर विक्रम अहके ने राहुल गांधी और कांग्रेस से कई सवाल किए। उन्होंने पूछा कि जब चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए जाने की बात स्पष्ट की है, तो राहुल गांधी अपने आरोपों का आधार क्या मानते हैं। उन्होंने यह भी सवाल किया कि फॉर्म-6 से जुड़े डिक्लेरेशन पर न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध निर्णयों के बावजूद लगाए जा रहे आरोपों का तथ्यात्मक आधार क्या है। इसके अलावा उन्होंने पूछा कि क्या किसी मीडिया रिपोर्ट के आधार पर संवैधानिक संस्था पर गंभीर आरोप लगाना उचित है और क्या कांग्रेस चुनाव आयोग सहित देश की संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली और निर्णयों पर विश्वास करती है। अंत में विक्रम अहके ने सवाल किया कि यदि चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट कर दी है, तो क्या राहुल गांधी देश के सामने अपने पूर्व आरोपों के आधार और उन पर पुनर्विचार की स्थिति स्पष्ट करेंगे।

Shyam Sahu
By Shyam Sahu

छिंदवाड़ा के वरिष्ठ पत्रकार हैं। 25 वर्षों का अनुभव अपने क्षेत्र में शासन प्रशासन की खबरें पाठकों त...Read More

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