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8 अरब साल पुरानी Hydrogen का पता चला, भारतीय वैज्ञानिकों की बड़ी खोज से खुलेगा Dark Energy का राज

Raman Research Institute Bengaluru के वैज्ञानिकों ने CHIME Telescope से 8 अरब साल पुराने हाइड्रोजन सिग्नल का पता लगाया। यह खोज डार्क एनर्जी को समझने में मदद करेगी। पूरी रिसर्च डिटेल।
8 अरब साल पुरानी Hydrogen का पता चला, भारतीय वैज्ञानिकों की बड़ी खोज से खुलेगा Dark Energy का राज
CHIME टेलीस्कोप से हुई खोज

बेंगलुरू। ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्य को सुलझाने की दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। वैज्ञानिकों ने 8 अरब साल पुराने हाइड्रोजन के संकेतों का पता लगाया है, जिससे डार्क एनर्जी को समझने में मदद मिल सकती है। यह खोज बेंगलुरु के रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI) के वैज्ञानिकों ने की है। 28 सितंबर को 'The Astrophysical Journal' में छपी स्टडी के मुताबिक, ये एक इंटरनेशनल प्रोजेक्ट था। इसमें कनाडा, अमेरिका और भारत के वैज्ञानिक शामिल थे। टीम ने CHIME यानी Canadian Hydrogen Intensity Mapping Experiment रेडियो टेलीस्कोप का इस्तेमाल किया। यह टेलीस्कोप खासतौर पर शुरुआती ब्रह्मांड में हाइड्रोजन के वितरण को स्टडी करने के लिए 2017 में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में बनाया गया था।वैज्ञानिकों ने पहली बार अकेले CHIME टेलीस्कोप से ब्रह्मांड के शुरुआती दिनों की हाइड्रोजन की चमक का 'स्टैंडअलोन' डिटेक्शन किया है। इससे पहले इसके लिए दूसरे टेलीस्कोप की मदद लेनी पड़ती थी।

खोज क्यों है इतनी खास

रिसर्च के अनुसार, वैज्ञानिकों को हाइड्रोजन के वो संकेत मिले हैं जब ब्रह्मांड सिर्फ 5 अरब साल पुराना था। यानी आज से लगभग 8 अरब साल पहले का सिग्नल। हाइड्रोजन ब्रह्मांड में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला तत्व है। इसके पुराने सिग्नल से हमें पता चलेगा कि -ब्रह्मांड की शुरुआत में गैलेक्सी कैसे बनीं, ब्रह्मांड इतनी तेजी से क्यों फैल रहा हैडार्क एनर्जी असल में क्या है और कैसे काम करती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह डेटा भविष्य में डार्क एनर्जी की सबसे सटीक मैपिंग करने में मील का पत्थर साबित होगा।

दूसरे टेलिस्कोप पर निर्भर नहीं

ये रिसर्च 'ऑटो-कोरिलेशन' तकनीक से अपने दम पर पुरानी हाइड्रोजन गैस खोजने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। असल में दक्षिण अफ्रीका के MeerKAT या चीन के FAST जैसे बड़े रेडियो टेलीस्कोप आमतौर पर 'क्रॉस-कोरिलेशन'  मेथड इस्तेमाल करते हैं। वो पहले से मौजूद गैलेक्सी के नक्शे की मदद लेते हैं, ताकि उन्हें पता रहे कि हाइड्रोजन का सिग्नल कहां मिलेगा। लेकिन इस बार भारतीय और कनाडाई वैज्ञानिकों ने कुछ अलग किया। उन्होंने 94 रातों तक लगातार ऑब्जर्वेशन किया और सिर्फ CHIME के अपने डेटा से ही हाइड्रोजन का पता लगा लिया। बिना किसी बाहरी गैलेक्सी सर्वे के।इससे साबित हो गया कि CHIME को बड़ी ब्रह्मांडीय संरचनाओं को खोजने के लिए किसी दूसरे टेलीस्कोप पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है।

डार्क एनर्जी का राज कैसे खुलेगा

CHIME ने 7 से 9 अरब साल पुरानी हाइड्रोजन गैस को डिटेक्ट किया है। ये टाइम पीरियड इसलिए अहम है, क्योंकि इसी दौरान ब्रह्मांड के तेजी से फैलने की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ी थी। इस डेटा से डार्क एनर्जी को समझने का नया रास्ता खुलेगा। टोरंटो यूनिवर्सिटी के पोस्टडॉक्टोरल फेलो और इस खोज का आइडिया देने वाले अर्नब चक्रवर्ती ने एक प्रेस रिलीज में बताया कि हाइड्रोजन कैसे पूरे ब्रह्मांड को समझने में मदद करता है। इस स्टडी के सह-लेखक चक्रवर्ती ने कहा,  हाइड्रोजन ब्रह्मांड का सबसे कॉमन एलिमेंट है और इसी से तारे बनते हैं। इसका हल्का रेडियो सिग्नल एक कॉस्मिक ट्रेसर की तरह काम करता है, जो बताता है कि स्पेस में मैटर कैसे फैला हुआ है।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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