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हिमाचल में कुदरत का कहर : भारी तबाही के बीच लाहौल स्पीति में आया भूकंप, प्रदेश में बादल फटने से अब तक 7 की मौत

शिमला। भारी बारिश, बादल फटने और लैंडस्लाइड जैसी प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश में अब भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। प्रदेश के लाहौल-स्पीति में धरती डोली है। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.2 मापी गई है। हालांकि जानमाल के नुकसान की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

हिमाचल में शिमला, मंडी और कूल्लू, तीन जगहों पर बादल फटने से सात लोगों की मौत हो गई है। हादसे में अब तक 50 लोग लापता हैं। बादल फटने के बाद लैंडस्लाइड की वजह से कई सड़कें भी बंद हैं।

लाहौल स्पीति में आता रहता है भूकंप

नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (एनसीएस) के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में शुक्रवार (2 अगस्त) सुबह करीब 9:45 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.2 की रही। इसकी गहराई 5 किलोमीटर मापी गई है। तीव्रता कम होने की वजह से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। लाहौल स्पीति जिला जोन 5 में आता है, जो भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है।

हिमाचल में 7 लोगों की मौत

हिमाचल प्रदेश में बुधवार (31 जुलाई) रात बादल फटने की वजह से भारी तबाही मची। मलबे और चट्टानों के साथ आए तेज सैलाब में घर, दुकान, पुल और सडकें सब बह गए। इसमें 7 लोगों के शव मिले हैं और कई लोग लापता हैं, जिनकी तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। सात शव में से तीन-तीन शिमला और मंडी में, जबकि एक कुल्लू से बरामद किया गया है। राज्य आपात अभियान केंद्र के मुताबित, कुल्लू के निरमंड, सैंज और मलाना इलाकों, मंडी के पधर और शिमला जिले के रामपुर में बादल फटा है।

आखिर क्यों आते हैं भूकंप ?

भूकंप आने के पीछे की वजह पृथ्वी के भीतर मौजूद प्लेटों का आपस में टकराना है। हमारी पृथ्वी के अंदर सात प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती हैं। जब ये आपस में टकराती हैं, तब फॉल्ट लाइन जोन बन जाता है। जिसकी वजह से सतह के कोने मुड़ जाते हैं और वहां दबाव बनने लगता है। ऐसी स्थिति में प्लेट के टूटने के बाद ऊर्जा पैदा होती है, जो बाहर निकलने के लिए रास्ता ढूंढती है। जिसकी वजह से धरती हिलने लगती है।

कैसे मापते हैं भूकंप की तीव्रता

रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता मापी जाती है। भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र (एपीसेंटर) से मापा जाता है। भूकंप को लेकर चार अलग-अलग जोन में बांटा गया है। मैक्रो सेस्मिक जोनिंग मैपिंग के अनुसार इसमें जोन-5 से जोन-2 तक शामिल है। जोन 5 को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना गया है और इसी तरह जोन दो सबसे कम संवेदनशील माना जाता है।

किस तीव्रता का भूकंप कितना खतरनाक है

• 0 से 1.9 तीव्रता का भूकंप काफी कमजोर होता है। सीज्मोग्राफ से ही इसका पता चलता है।
• वहीं 2 से 2.9 तीव्रता का भूकंप रिक्टर स्केल पर हल्का कंपन करता है।
• 3 से 3.9 तीव्रता का भूकंप आने पर ऐसा लगता है जैसे कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजर गया हो।
• 4 से 4.9 तीव्रता का भूकंप आने पर खिड़कियां टूट सकती हैं। साथ ही दीवारों पर टंगे फ्रेम गिर सकते हैं।
• 5 से 5.9 तीव्रता का भूकंप आने पर घर का फर्नीचर हिल सकता है।
• 6 से 6.9 तीव्रता का भूकंप आने पर इमारतों की नींव दरक सकती है।
• 7 से 7.9 तीव्रता का भूकंप खतरनाक होता है। इससे बिल्डिंग गिर जाती हैं और जमीन में पाइप फट जाती है।
• 8 से 8.9 तीव्रता का भूकंप काफी खतरनाक होता है। जापान, चीन समेत कई देशों में 8.8 से 8.9 तीव्रता वाले भूकंप ने खूब तबाही मचाई थी।
• 9 और उससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप आने पर पूरी तबाही होती है। इमारतें गिर जाती है। पेड़ पौधे, समुद्रों के नजदीक सुनामी आ जाती है।

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