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इंदौर-देवास रोड पर बीते शुक्रवार लगे भीषण जाम और उसमें हुई तीन लोगों की मौत को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने गंभीर रुख अपनाया है। सोमवार को जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), इंदौर पुलिस कमिश्नर, कलेक्टर, ठेकेदार और टोल कंपनी को नोटिस जारी किया है और सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है।
शुक्रवार को इंदौर-देवास हाईवे पर करीब 40 घंटे तक 8 किलोमीटर लंबा जाम लगा रहा। इस दौरान तीन लोगों की जान चली गई। मृतकों में इंदौर निवासी किसान कमल पांचाल (62), शुजालपुर के बलराम पटेल (55) और गारी पिपल्या गांव के संदीप पटेल (32) शामिल थे। कमल और बलराम को जाम में फंसे रहने के दौरान हार्ट अटैक आया, जबकि संदीप एक मरीज थे, जो समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाए। कमल पांचाल की कार जाम में डेढ़ घंटे तक फंसी रही। उन्हें घबराहट और बेचैनी हुई और वे बेहोश हो गए। परिवार उन्हें देवास के एक निजी अस्पताल ले गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मामले में एडवोकेट आनंद अधिकारी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की डिवीजन बेंच ने गंभीर चिंता जताई। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गिरीश पटवर्धन ने तीन मौतों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।
सुनवाई के दौरान जब NHAI के वकील ने तर्क दिया कि “लोग बिना जरूरी काम के इतनी जल्दी क्यों निकलते हैं।यह टिप्पणी मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस अमरनाथ द्विवेदी की खंडपीठ के सामने हुई, जहां वरिष्ठ अधिवक्ता गिरीश पटवर्धन, याचिकाकर्ता आनंद अधिकारी की ओर से जनहित याचिका पर बहस कर रहे थे। NHAI की यह दलील न सिर्फ विचलित करने वाली है, बल्कि यह सवाल उठाती है कि जब आम जनता की जान हाईवे की अव्यवस्था में जा रही है, तब क्या जिम्मेदार एजेंसियां खुद की जिम्मेदारी से बच रही हैं?
NHAI की ओर से कोर्ट को बताया गया कि सड़क निर्माण का काम मेलहोत्रा बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया है। कंपनी द्वारा काम में हो रही देरी ही जाम का मुख्य कारण है। वहीं, इंदौर-देवास टोलवेज लिमिटेड कंपनी को दिसंबर 2022 में टर्मिनेट कर दिया गया था, क्योंकि वह सड़क की मरम्मत और रखरखाव में असफल रही थी।