बैंक यूनियंस की देशव्यापी हड़ताल आज :ATM और डिजिटल सेवाओं पर क्या रहेगा असर, जानें पूरी जानकारी

अगर आप आज (27 जनवरी) किसी सरकारी बैंक में काम के लिए जाने का सोच रहे हैं, तो परेशानी हो सकती है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने मंगलवार को देशव्यापी बैंक हड़ताल का ऐलान किया है। इस वजह से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) का कामकाज प्रभावित होने की संभावना है।
प्रभावित बैंक और सेवाएं
हड़ताल की वजह से इन बैंकों की शाखाओं में नकद जमा-निकासी, चेक क्लियरेंस और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं-
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
- पंजाब नेशनल बैंक
- बैंक ऑफ बड़ौदा
- केनरा बैंक
- यूनियन बैंक ऑफ इंडिया
- इंडियन बैंक
- बैंक ऑफ इंडिया
- सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
- इंडियन ओवरसीज बैंक
- यूको बैंक
- बैंक ऑफ महाराष्ट्र
- पंजाब एंड सिंध बैंक
प्राइवेट बैंकों पर असर
एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक जैसे प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंकों पर हड़ताल का असर कम रहने की संभावना है, क्योंकि उनके कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल नहीं हैं। डिजिटल बैंकिंग सेवाएं, जैसे यूपीआई और इंटरनेट बैंकिंग, सामान्य रूप से चलती रहेंगी। हालांकि, एटीएम में नकद की उपलब्धता कुछ जगहों पर प्रभावित हो सकती है।
नौ यूनियनों के इस संयुक्त मंच ने यह हड़ताल 23 जनवरी को मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हुई सुलह बैठक बेनतीजा रहने के बाद घोषित की। बैंक अधिकारी और कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हैं।
एसबीआई और कई अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने स्टॉक एक्सचेंज को संभावित प्रभाव के बारे में सूचित किया है। एसबीआई ने कहा कि हड़ताल के दिन शाखाओं और कार्यालयों में सामान्य कामकाज सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी, फिर भी कुछ सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
बैंक यूनियंस की मांग
यूनियनों की मुख्य मांग है कि सभी शनिवारों को अवकाश घोषित किया जाए। मार्च 2024 में हुए द्विपक्षीय समझौते में यह सहमति हुई थी, लेकिन सरकार की अधिसूचना अभी तक नहीं आई। फिलहाल, बैंक हर महीने पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को खुले रहते हैं।
AIBEA महासचिव सीएच वेंकटाचलम ने कहा कि हमारी मांग पर कोई आश्वासन नहीं मिला, इसलिए हड़ताल अनिवार्य हो गई।
AIBOC महासचिव रूपम रॉय ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने हमारी जायज मांग पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। UFBU की NCBE इकाई के महासचिव एल. चंद्रशेखर ने कहा कि यह आंदोलन ग्राहकों के खिलाफ नहीं, बल्कि मानवीय और कुशल बैंकिंग प्रणाली के लिए है।





















