Garima Vishwakarma
26 Jan 2026
उज्जैन। प्रदेश में 77वां गणतंत्र दिवस धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के कार्तिक मेला ग्राउंड में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड की सलामी ली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और लोकतंत्र रक्षकों का सम्मान भी किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत और सिंहस्थ पर केंद्रित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक प्रस्तुतियां भी हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गणतंत्र दिवस के मंगल अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी और प्रदेश की जनता के नाम संदेश दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज राष्ट्र के जन-गण-मन में देशभक्ति और देश के लिए गर्व का भाव सशक्त हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व-गुण के फलस्वरूप संपूर्ण विश्व में भारत की गरिमा बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2028 में सिंहस्थ का आयोजन उज्जैन में होना है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने “समृद्ध किसान–समृद्ध प्रदेश” के लक्ष्य को सरकार की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी के सशक्तिकरण के आह्वान के अनुरूप मध्यप्रदेश सरकार चार मिशनों—युवा शक्ति, गरीब कल्याण, किसान कल्याण और नारी सशक्तिकरण—पर कार्य कर रही है। वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया गया है। कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का बजट 600 करोड़ रुपये से बढ़कर 27 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। मुख्य फसलों के साथ उद्यानिकी, दुग्ध उत्पादन, गौशालाओं के विस्तार और मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सरकार ने गेहूं की खरीद 2,600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की और किसानों को 1,360 करोड़ रुपये का बोनस दिया। सोयाबीन किसानों को भावांतर योजना के तहत करीब 1,300 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। गौशालाओं का बजट बढ़ाकर 505 करोड़ रुपये किया गया है और प्रदेश को दुग्ध उत्पादन की राजधानी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मत्स्य उत्पादन में बेहतर प्रबंधन के चलते प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी मिला।
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मुख्यमंत्री ने स्विट्जरलैंड में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को मध्यप्रदेश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि राज्य ने वैश्विक मंच पर निवेश, उद्योग और रोजगार की मजबूत तस्वीर प्रस्तुत की। जन विश्वास अधिनियम 2024-25 के माध्यम से नियमों को सरल बनाकर उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल बनाया गया है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में मिले निवेश प्रस्तावों में से एक तिहाई जमीन पर उतर चुके हैं। यूके, जर्मनी, जापान, स्पेन और दुबई के निवेशकों से प्राप्त प्रस्ताव राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति दे रहे हैं। उद्योग संवर्धन नीति के तहत 1,522 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई और धार जिले में पीएम मित्र पार्क की आधारशिला रखी गई।

प्रदेश में एमएसएमई नीति, औद्योगिक भूमि आवंटन नियम और सिंगल विंडो सिस्टम लागू किए गए हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया से 1,092 औद्योगिक भूखंड उपलब्ध कराए गए और 2,300 से अधिक इकाइयों को 742 करोड़ रुपये की सहायता मिली। मुख्यमंत्री ने उद्योगों को “रोजगार का मंदिर” बताते हुए कहा कि औद्योगिक विकास से युवाओं के लिए नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
प्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत किया गया है और नक्सल उन्मूलन तय समय से पहले पूरा किया गया। नशे के खिलाफ जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य 2047 तक विकसित मध्यप्रदेश बनाना है, जो विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाखों आवास स्वीकृत और निर्मित किए गए। छात्रवृत्ति योजनाओं से एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लाखों विद्यार्थी लाभान्वित हुए। प्रदेश के युवा जापान सहित अन्य देशों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। विदेश अध्ययन और रोजगार के लिए सरकारी सहायता दी जा रही है।
मध्यप्रदेश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन चुका है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 9,508 मेगावाट तक पहुंच गई है और 30 लाख विद्युत पंपों को सोलर पंप में बदलने का लक्ष्य है। इंदौर और भोपाल में मेट्रो सेवा शुरू हो चुकी है। जल जीवन मिशन के तहत लाखों घरों में नल से जल पहुंचाया गया।

प्रदेश में ड्रॉपआउट दर शून्य हो गई है। सांदीपनि विद्यालय, नए विश्वविद्यालय, कोडिंग लैब और इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किए गए हैं। तकनीकी और कौशल आधारित शिक्षा को रोजगार से जोड़ा जा रहा है।
प्रदेश के 15 स्थलों को यूनेस्को विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया है। टाइगर रिजर्व, चीता परियोजना और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिला है। सिंहस्थ 2028 को विश्व स्तरीय आयोजन बनाने की तैयारियां चल रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन, निवेश, सामाजिक कल्याण और संसाधनों के समुचित उपयोग से प्रदेश निरंतर प्रगति कर रहा है। “विकसित मध्यप्रदेश@2047” दृष्टि पत्र राज्य को दीर्घकालीन विकास की स्पष्ट दिशा देता है और सरकार अपने संकल्पों को जमीन पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है।