Garima Vishwakarma
26 Jan 2026
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26 Jan 2026
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26 Jan 2026
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26 Jan 2026
इंदौर। जिला प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की है कि अब दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल तभी मिलेगा, जब वे हेलमेट पहनकर आएंगे। यह आदेश 1 अगस्त 2025 से प्रभाव में आ जाएगा। बुधवार को कलेक्टर आशीष सिंह ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए। प्रशासन का यह कदम सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने और यातायात नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
इस आदेश के तहत शहर के सभी पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देशित किया गया है कि वे बिना हेलमेट पहने किसी भी दोपहिया वाहन चालक को पेट्रोल न दें। अगर कोई पेट्रोल पंप संचालक इस नियम का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इसमें लाइसेंस रद्द करना, जमानत राशि जब्त करना और आवश्यक वस्तु अधिनियम या भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज करना शामिल है। इस नियम के तहत दोषी पाए जाने पर एक साल तक की सजा या पांच हजार रुपये का जुर्माना या दोनों सजा का प्रावधान है।
यह आदेश 1 अगस्त से 29 सितंबर 2025 तक प्रभावी रहेगा। हालांकि, प्रशासन ने इस नियम में कुछ छूट भी दी है। मेडिकल इमरजेंसी और अन्य आपात स्थितियों में हेलमेट न पहनने वाले लोगों को पेट्रोल देने की अनुमति दी गई है। लेकिन इसके लिए भी उचित कारण और परिस्थिति की पुष्टि जरूरी होगी।
इस आदेश की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और रिटायर्ड न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे की मंगलवार को हुई जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक रही। इस बैठक में उन्होंने इंदौर में सड़क सुरक्षा की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताई और कई निर्देश दिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकारी कर्मचारियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य किया जाए। इसके अलावा उन्होंने छह महीने के भीतर ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार लाने के लिए ठोस रणनीति तैयार करने को भी कहा। न्यायमूर्ति सप्रे ने इंदौर में शराब पीकर वाहन चलाने, सीट बेल्ट का उपयोग न करने और यातायात नियमों के खुलेआम उल्लंघन पर भी नाराजगी जाहिर की।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी हाल ही में इंदौर में यातायात नियमों के उल्लंघन पर नाराजगी जाहिर की थी और प्रशासन से कठोर कदम उठाने को कहा था।
इंदौर जिले में ट्रैफिक का दबाव दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी प्रदीप शर्मा के मुताबिक, जिले में वर्ष 1950 से अब तक 32 लाख वाहन पंजीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें करीब 16 लाख दोपहिया वाहन शामिल हैं। वर्तमान में अनुमानित तौर पर 21 लाख वाहन सड़कों पर चल रहे हैं। यह भारी संख्या दुर्घटनाओं की आशंका को भी बढ़ाती है। ऐसे में हेलमेट जैसे सुरक्षात्मक उपायों को सख्ती से लागू करना बेहद जरूरी हो गया है।