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Rib Modeling Surgery: कॉर्सेट जैसी कमर पाने का नया ट्रेंड, पर क्या सुरक्षित है रिब मॉडलिंग सर्जरी?

Rib Modeling Surgery: रिब मॉडलिंग इन दिनों पतली कमर पाने के लिए चर्चा में है। इस प्रक्रिया में पसलियों को हटाने के बजाय उनकी स्थिति बदली जाती है। जानिए रिब मॉडलिंग कैसे होती है, कमर के माप में कितनी कमी संभव है, 2026 के अध्ययनों में क्या सामने आया और न्यूमोथोरैक्स, दर्द व दूसरी जटिलताओं का कितना खतरा हो सकता है।
Rib Modeling Surgery: कॉर्सेट जैसी कमर पाने का नया ट्रेंड, पर क्या सुरक्षित है रिब मॉडलिंग सर्जरी?
पसलियां हटाए बिना कैसे बदलती है कमर की बनावट? जानें पूरी प्रक्रिया

कॉर्सेट पहनकर कमर को पतला दिखाने का चलन पुराना है, लेकिन अब कुछ लोग ऐसा कर्व स्थायी रूप से पाने के लिए कॉस्मेटिक सर्जरी का सहारा ले रहे हैं। इसी कड़ी में रिब मॉडलिंग सर्जरी (Rib Modeling Surgery) चर्चा में है। इस प्रक्रिया में कमर को संकरा दिखाने के लिए निचली पसलियों की बनावट और स्थिति में बदलाव किया जाता है। हालांकि, खूबसूरती के लिए अपनाई जाने वाली इस प्रक्रिया में कुछ गंभीर जोखिम भी हो सकते हैं।

क्या है रिब मॉडलिंग सर्जरी?

रिब मॉडलिंग एक कॉस्मेटिक सर्जरी है, जिसका उद्देश्य कमर को ज्यादा पतला और शरीर के कर्व को अधिक स्पष्ट दिखाना है। इसमें निचली पसलियों की स्थिति बदली जाती है, ताकि रिब केज यानी पसलियों से बनी छाती की संरचना का आकार कुछ हद तक संकरा दिखाई दे। इस सर्जरी की खास बात यह है कि इसमें आमतौर पर पसलियों को हटाया नहीं जाता। इसके बजाय, उन्हें नियंत्रित तरीके से कमजोर या फ्रैक्चर करके नई स्थिति में लाने की कोशिश की जाती है। इसके बाद उन्हें स्थिर रखने के लिए जरूरी उपाय किए जाते हैं। यह प्रक्रिया लिपोसक्शन से अलग है। लिपोसक्शन में शरीर के कुछ हिस्सों से अतिरिक्त फैट हटाया जाता है, जबकि रिब मॉडलिंग में हड्डियों की संरचना पर काम होता है। इसलिए इसे केवल फैट कम करने या त्वचा को टाइट करने वाली प्रक्रिया समझना सही नहीं होगा।

रिब रिमूवल और रिब मॉडलिंग में क्या अंतर है?

रिब रिमूवल और रिब मॉडलिंग को अक्सर एक जैसा समझ लिया जाता है, लेकिन दोनों प्रक्रियाएं अलग हैं। रिब रिमूवल में पसलियों के कुछ हिस्सों को सर्जरी के जरिए हटाया जाता है। वहीं, रिब मॉडलिंग में पसलियों को हटाने के बजाय उनकी स्थिति और आकार में बदलाव करने की कोशिश की जाती है। रिब मॉडलिंग का उद्देश्य कमर की चौड़ाई को कम दिखाना है। हालांकि, दोनों ही प्रक्रियाओं में शरीर की सामान्य संरचना पर असर पड़ सकता है। इसलिए किसी भी प्रक्रिया को चुनने से पहले उसके संभावित लाभ, जोखिम और लंबे समय के परिणामों को समझना जरूरी है।

कैसे होती है रिब मॉडलिंग सर्जरी?

डॉक्टरों के बताए तरीकों के अनुसार, इस प्रक्रिया में कमर के निचले हिस्से में छोटे चीरे लगाए जा सकते हैं। इसके बाद निचली पसलियों की संरचना में नियंत्रित बदलाव किया जाता है। कुछ तकनीकों में निचली तीन पसलियों के हिस्सों को आंशिक रूप से फ्रैक्चर करके अंदर की ओर नई स्थिति में लाया जाता है। यह प्रक्रिया जनरल एनेस्थीसिया यानी पूरी तरह बेहोश करके की जा सकती है। अल्ट्रासाउंड की मदद से पसलियों और फेफड़ों की स्थिति पर नजर रखी जाती है। इसके बाद विशेष उपकरणों की मदद से हड्डी में नियंत्रित बदलाव किया जाता है। सर्जरी के बाद पसलियों को नई स्थिति में स्थिर रखने के लिए कॉर्सेट पहनने की सलाह दी जा सकती है। कुछ मामलों में इसे करीब तीन महीने तक पहनना पड़ सकता है। इसकी अवधि मरीज की स्थिति, इस्तेमाल की गई तकनीक और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करती है।

कमर कितनी पतली हो सकती है?

रिब मॉडलिंग को लेकर सबसे ज्यादा दिलचस्पी इसके संभावित परिणामों के कारण है। कुछ डॉक्टरों के अनुसार, सर्जरी के बाद कमर के माप में 2 से 4 इंच तक का अंतर दिखाई दे सकता है। अगर इसके साथ लिपोसक्शन जैसी दूसरी कॉस्मेटिक प्रक्रिया भी की जाए, तो शरीर की बनावट में बदलाव ज्यादा नजर आ सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति के शरीर की संरचना अलग होती है। इसलिए सभी मरीजों में एक जैसे परिणाम मिलने की उम्मीद नहीं की जा सकती। 2026 में प्रकाशित एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-एनालिसिस में चार अध्ययनों के 318 मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें सर्जरी के तीन महीने बाद कमर के माप में औसतन करीब 8.6 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई। एक अन्य 2026 के मल्टीसेंटर अध्ययन में 3,805 मरीजों को शामिल किया गया। इसमें एक कम चीरे वाली तकनीक के बाद एक साल पर कमर के माप में औसतन 11 सेंटीमीटर की कमी बताई गई। ये आंकड़े शुरुआती नतीजों को समझने में मदद करते हैं, लेकिन इनसे यह साबित नहीं होता कि हर मरीज को इतना ही फायदा होगा या परिणाम लंबे समय तक एक जैसे बने रहेंगे।

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रिब मॉडलिंग सर्जरी के क्या हैं खतरे?

इस सर्जरी को लेकर सबसे अहम सवाल इसकी सुरक्षा का है। पसलियां फेफड़ों और छाती के दूसरे जरूरी अंगों के पास होती हैं। ऐसे में हड्डियों की संरचना में जानबूझकर बदलाव करने से जटिलताओं का खतरा हो सकता है।

संभावित समस्याओं में शामिल हैं:

  • न्यूमोथोरैक्स: फेफड़े के आसपास हवा जमा होने से फेफड़ा सिकुड़ सकता है।
  • हड्डी का ठीक से न जुड़ना: फ्रैक्चर की गई पसली अपेक्षित तरीके से नहीं जुड़ सकती।
  • असमानता: शरीर के दोनों तरफ कमर की बनावट अलग दिखाई दे सकती है।
  • लंबे समय तक दर्द: सर्जरी के बाद दर्द या असहजता बनी रह सकती है।
  • त्वचा से जुड़ी समस्याएं: कुछ मामलों में त्वचा में बदलाव या जलने जैसी जटिलताएं सामने आ सकती हैं।
  • कॉर्सेट का दबाव: लंबे समय तक कॉर्सेट पहनने से त्वचा या आसपास के हिस्सों में परेशानी हो सकती है।

2026 के एक वैश्विक सर्वे में 2,351 रिकॉर्ड्स के आधार पर कुल जटिलताओं की दर 3.7 प्रतिशत बताई गई। इसमें न्यूमोथोरैक्स की दर 0.17 प्रतिशत थी। एक अन्य अध्ययन में न्यूमोथोरैक्स, हेमोथोरैक्स यानी छाती में खून जमा होने और लंबे समय तक दर्द जैसी समस्याएं भी दर्ज की गईं। इन आंकड़ों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि अलग-अलग अध्ययनों में मरीजों का चयन, सर्जरी की तकनीक और निगरानी की अवधि अलग हो सकती है। इसलिए इन प्रतिशतों को हर मरीज के व्यक्तिगत जोखिम का सटीक अनुमान नहीं माना जा सकता।

क्या पतली कमर के लिए यह सर्जरी कराना सही है?

रिब मॉडलिंग के शुरुआती नतीजे आकर्षक लग सकते हैं, लेकिन कमर का माप कम होना और सर्जरी का सुरक्षित होना दो अलग बातें हैं। इस प्रक्रिया पर उपलब्ध शोध अभी सीमित है और लंबे समय तक इसके परिणामों और जोखिमों को समझने के लिए और अध्ययन की जरूरत है। अगर कोई व्यक्ति इस सर्जरी पर विचार कर रहा है, तो उसे योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर से संभावित जटिलताओं, रिकवरी में लगने वाले समय, लंबे समय के परिणामों और दूसरी प्रक्रियाओं के विकल्पों के बारे में जानकारी लेना जरूरी है। आखिरकार, रिब मॉडलिंग एक वैकल्पिक कॉस्मेटिक प्रक्रिया है, कोई जरूरी चिकित्सा उपचार नहीं। केवल सोशल मीडिया पर दिखने वाले परिणामों के आधार पर फैसला लेना सही नहीं होगा। शरीर की बनावट में स्थायी बदलाव कराने से पहले अपनी सेहत और सुरक्षा को प्राथमिकता देना सबसे जरूरी है।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...

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