PU Special :नवजातों के लिए मेडिकल स्टोर पर बिना पर्चे के मिल रहा फॉर्मूला मिल्क, 10 में 8 गर्भवती महिलाओं को लिख रहे एंटीबायोटिक

प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। एक तरफ सरकार मां के दूध को बढ़ावा देने के लिए लगातार जागरुकता अभियान चला रही है। वहीं, दूसरी ओर बाजार में नवजातों के लिए मां के दूध के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल होने वाला इंफेंट मिल्क या फॉर्मूला मिल्क आसानी से उपलब्ध है। कोई भी व्यक्ति इसे खरीद सकता है। इसकी हकीकत जानने पीपुल्स समाचार ने मेडिकल दुकानों पर पड़ताल की तो फॉर्मूला मिल्क आसानी से मिल गया। खरीदारी के दौरान दुकानदार ने बच्चे की उम्र, डॉक्टर की सलाह या इसकी जरूरत को लेकर कोई विशेष जानकारी नहीं मांगी गई। वहीं, दूसरी ओर गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक के इस्तेमाल की स्थिति जानने के लिए 10 महिलाओं के प्रिस्क्रिप्शन देखे गए, जिनमें 8 को एंटीबायोटिक लिखी मिली। विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमण होने पर गर्भावस्था में एंटीबायोटिक जरूरी हो सकती है, लेकिन बिना जरूरत इस्तेमाल से बचना चाहिए।
मेडिकल स्टोर ने बिना पर्चे के दिया फॉर्मूला मिल्क
कोलार स्थित एक मेडिकल स्टोर पर दो माह के शिशु के लिए फॉर्मूला मिल्क मांगा तो दुकानदार ने बिना किसी परेशानी के उपलब्ध पैक दे दिया। खरीदारी के दौरान उन्होंने सिर्फ बच्चे की उम्र पूछी, डॉक्टर ने लिखा या नहीं, इसकी कोई पड़ताल नहीं की।
पहले मना किया, रिक्वेस्ट की तो दे दिया
पुराने शहर के डीआईजी बंगला पर स्थित मेडिकल स्टोर पर जब फॉर्मूला मिल्क मांगा तो उन्होंने कहा बिना डॉक्टर के लिखे नहीं देते। हालांकि जब हमने थोड़ा रिक्वेस्ट किया तो उन्होंने बच्चे की उम्र पूछकर एक पैकेट दे दिया। हालांकि अगली बार पर्चा लाने के लिए ताकीद भी किया।
फॉर्मूला मिल्क से शिशु हुए कमजोर
रोहित नगर के राजेश सक्सेना ने बेटी अन्वी को जन्म के बाद ही फॉर्मूला मिल्क देना शुरू कर दिया था। कुछ समय बाद उसका वजन बढ़ना रुक गया और वह कमजोर हो गई। डॉक्टर ने बताया कि जरूरत से ज्यादा फॉर्मूला मिल्क से बच्चे को नुकसान हो गया।
कमजोरी के कारण अस्पताल में करवाना पड़ा भर्ती
तीन माह की काश्वी को भी माता-पिता ने फॉर्मूला मिल्क दिया। शुरुआत में तो कोई दिक्कत नहीं हुई, लेकिन बाद में कमजोरी के चलते उसे अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। उसे एक सप्ताह तक अस्पताल में इलाज कराना पड़ा।
मां से बच्चे तक पहुंच रहा रेजिस्टेंस का खतरा
आईसीएमआर की 2024 एएमआर सर्विलांस रिपोर्ट में शिगेला के एंटीमाइक्रोबियल सेंसिटिविटी पैटर्न में चिंता के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2024 में शिगेला सोनी के केवल 51.6% और शिगेला फ्लेक्सनेरी के 53.5% नमूने ट्राइमेथोप्रिम-सल्फामेथॉक्साजोल के प्रति संवेदनशील थे। यानी बाकी नमूनों में इस दवा के प्रति संवेदनशीलता नहीं थी। रिपोर्ट में सिप्रोफ्लॉक्सासिन के प्रति संवेदनशीलता भी बेहद कम दर्ज हुई। गर्भावस्था में अनावश्यक एंटीबायोटिक इस्तेमाल से मां के माइक्रोबायोम और बच्चे के शुरुआती माइक्रोबायोम पर असर की चिंता रहती है।
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फॉर्मूला मिल्क हो सकता है नुकसानदायक
गांधी मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश टिक्कस बताते हैं कि फॉर्मूला मिल्क कृत्रिम दूध है, जो आमतौर पर गाय के दूध के प्रोटीन, वनस्पति तेल, विटामिन और खनिजों से बनाया जाता है। यह मां के दूध का पूरी तरह विकल्प नहीं है। गलत मात्रा में पाउडर मिलाना, जरूरत से ज्यादा उपयोग से दस्त और अन्य परेशानियां हो सकती हैं।
…तो बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश मिश्रा ने कहा कि फॉर्मूला फीडिंग जरूरी हो तो चिकित्सकीय सलाह, स्वच्छता और सही मात्रा का पालन बेहद जरूरी है। गलत तैयारी से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। हम मां को ब्रेस्टफीडिंग की ही सलाह देते हैं।
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डॉक्टर की सलाह पर ही उपयोग करें
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीलिमा अग्रवाल का कहना है कि संक्रमण होने पर एंटीबायोटिक से मना भी उचित नहीं है, क्योंकि अनुपचारित संक्रमण मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है, लेकिन दवा का चयन डॉक्टर की सलाह, गर्भावस्था की अवधि और संक्रमण की प्रकृति देखकर ही होना चाहिए।




















