Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

लॉन्ग कोविड को लेकर चौंकाने वाला खुलासा, फेफड़ों के बैक्टीरिया से ब्रेन फॉग और पेट की समस्याओं का कनेक्शन

लॉन्ग कोविड को लेकर नई रिसर्च में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। 771 मरीजों पर हुए अध्ययन में मुंह और फेफड़ों के बैक्टीरिया में बदलाव का संबंध सांस की परेशानी, ब्रेन फॉग और पेट की समस्याओं से पाया गया। जानिए लैक्टिक एसिड बनाने वाले बैक्टीरिया की अधिकता, शरीर में सूजन और लॉन्ग कोविड के संभावित इलाज से जुड़ी अहम बातें।
लॉन्ग कोविड को लेकर चौंकाने वाला खुलासा, फेफड़ों के बैक्टीरिया से ब्रेन फॉग और पेट की समस्याओं का कनेक्शन
लॉन्ग कोविड को लेकर नई रिसर्च में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है

कोरोना महामारी खत्म होने के कई साल बाद भी दुनियाभर में लाखों लोग इसके लंबे समय तक रहने वाले लक्षणों से परेशान हैं। इस स्थिति को लॉन्ग कोविड कहा जाता है। इससे पीड़ित लोगों को सांस लेने में परेशानी, थकान, याददाश्त कमजोर होने और पेट से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अब एक नई वैज्ञानिक रिसर्च में लॉन्ग कोविड को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। अध्ययन के मुताबिक, इस बीमारी से पीड़ित लोगों के मुंह और फेफड़ों में मौजूद बैक्टीरिया का संतुलन सामान्य लोगों से अलग हो सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन सूक्ष्म जीवों में होने वाले बदलावों का संबंध सांस की तकलीफ के साथ-साथ दिमाग और पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याओं से भी हो सकता है। हालांकि, अभी यह साबित नहीं हुआ है कि बैक्टीरिया में बदलाव ही लॉन्ग कोविड का मुख्य कारण है।

पहली बार फेफड़ों के बैक्टीरिया पर खास ध्यान

इससे पहले हुई कई रिसर्च में लॉन्ग कोविड और आंतों में मौजूद बैक्टीरिया के बीच संबंधों का अध्ययन किया गया था। लेकिन कोरोना वायरस मुख्य रूप से सांस लेने के रास्ते और फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसी वजह से वैज्ञानिकों ने इस बार फेफड़ों और सांस की नली में मौजूद बैक्टीरिया की भूमिका को समझने की कोशिश की। हमारे शरीर में मौजूद सूक्ष्म जीवों के समूह को माइक्रोबायोम कहा जाता है। ये शरीर की कई जरूरी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाते हैं। वैज्ञानिक यह जानना चाहते थे कि क्या माइक्रोबायोम में होने वाले बदलाव लॉन्ग कोविड के लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षणों से जुड़े हो सकते हैं।

771 मरीजों पर किया गया अध्ययन

इस रिसर्च में ब्रिटेन के 38 अस्पतालों में फरवरी 2020 से मार्च 2021 के बीच कोरोना का इलाज करा चुके 771 मरीजों के स्वास्थ्य का अध्ययन किया गया। अस्पताल से छुट्टी मिलने के करीब पांच महीने बाद मरीजों में मौजूद लक्षणों की गंभीरता के आधार पर उन्हें चार समूहों में बांटा गया। इन समूहों में गंभीर शारीरिक और मानसिक समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के साथ हल्के लक्षण वाले लोग भी शामिल थे। इसके बाद अस्पताल से छुट्टी मिलने के करीब छह महीने बाद मरीजों के मुंह से लार और फेफड़ों से बलगम के नमूने लिए गए। DNA सीक्वेंसिंग तकनीक की मदद से इन नमूनों में मौजूद बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्म जीवों की पहचान की गई।

ब्रेन फॉग और पेट की परेशानियों से क्या है संबंध?

अध्ययन में पाया गया कि लॉन्ग कोविड के गंभीर लक्षणों वाले मरीजों के मुंह और फेफड़ों के माइक्रोबायोम में स्पष्ट बदलाव थे। इन बदलावों का संबंध फेफड़ों की कम कार्यक्षमता से भी देखा गया। इसका मतलब है कि कुछ मरीजों में फेफड़े सामान्य तरीके से काम नहीं कर पा रहे थे। रिसर्च में सांस की नली में मौजूद बैक्टीरिया के असंतुलन और ब्रेन फॉग जैसी समस्याओं के बीच भी संबंध सामने आया। ब्रेन फॉग में व्यक्ति को ध्यान लगाने, चीजें याद रखने और स्पष्ट रूप से सोचने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा, कुछ मरीजों में पेट दर्द, उल्टी, दस्त और भूख कम लगने जैसी पाचन संबंधी समस्याएं भी देखी गईं। हालांकि, इन लक्षणों के पीछे बैक्टीरिया की भूमिका को पूरी तरह समझने के लिए अभी और शोध की जरूरत है।

ये भी पढ़ें: लड़कियों के चेहरे पर क्यों आते हैं मूंछ जैसे बाल? जानिए असली वजह और हटाने के असरदार तरीके

लैक्टिक एसिड बनाने वाले बैक्टीरिया की बढ़ी संख्या

अध्ययन में गंभीर लॉन्ग कोविड वाले मरीजों में लैक्टिक एसिड बनाने वाले बैक्टीरिया की अधिकता भी देखी गई। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इन बैक्टीरिया में बढ़ोतरी का संबंध शरीर में सूजन से जुड़ा पाया गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि सांस की नली के माइक्रोबायोम में बदलाव केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं हो सकते, बल्कि इनका संबंध शरीर के दूसरे हिस्सों में दिखाई देने वाली समस्याओं से भी हो सकता है।

क्या लॉन्ग कोविड के इलाज में मिलेगी मदद?

यह रिसर्च लॉन्ग कोविड के कारणों को बेहतर तरीके से समझने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे भविष्य में बीमारी की पहचान करने के नए तरीके विकसित करने और संभावित इलाज पर शोध करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि फेफड़ों के बैक्टीरिया में बदलाव ही लॉन्ग कोविड की वजह हैं। इस संबंध को समझने और यह जानने के लिए कि बैक्टीरिया में बदलाव बीमारी का कारण हैं या उसका परिणाम, आगे और अध्ययन करने होंगे।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...

Latest Posts