क्या पैरों का BP बताता है नसों में ब्लॉकेज? जानिए ABI टेस्ट से जुड़ी जरूरी बातें

शरीर में खून का सही बहाव बनाए रखने के लिए धमनियों का स्वस्थ रहना जरूरी है। जब इन धमनियों में खून का रास्ता संकरा हो जाता है, तो पैरों तक पर्याप्त खून नहीं पहुंच पाता। इस समस्या का पता लगाने के लिए डॉक्टर एक खास जांच करते हैं, जिसमें हाथ और टखने के ब्लड प्रेशर की तुलना की जाती है। इसे एंकल-ब्रैकियल इंडेक्स यानी ABI टेस्ट कहा जाता है। यह जांच पैरों की धमनियों में रुकावट के संकेत पहचानने में मदद करती है। हालांकि, घर में सामान्य डिजिटल बीपी मशीन से इसे सही तरीके से करना आसान नहीं है।
हाथ और पैर के BP का अंतर खोल सकता है राज
आमतौर पर लोग ब्लड प्रेशर बढ़ने या घटने की जांच के लिए हाथ पर मशीन लगाते हैं। लेकिन पैरों के टखने पर भी रक्तचाप मापा जा सकता है। जब हाथ और टखने के सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर की तुलना की जाती है, तो इससे पैरों की धमनियों में खून के बहाव की जानकारी मिल सकती है। यह जांच खास तौर पर पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (PAD) का पता लगाने में उपयोगी है। इस बीमारी में पैरों तक खून पहुंचाने वाली धमनियां संकरी हो जाती हैं या उनमें रुकावट आ जाती है।
क्या है ABI टेस्ट और कैसे होती है जांच?
ABI टेस्ट में डॉक्टर हाथ और टखने का सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर मापते हैं। इसके बाद टखने के ऊपरी रक्तचाप को हाथ के ऊपरी रक्तचाप से भाग देकर अनुपात निकाला जाता है। सही जांच के लिए आमतौर पर विशेष डॉप्लर उपकरण और उचित तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। सामान्य डिजिटल बीपी मशीन से टखने पर मिली रीडिंग के आधार पर सही ABI निकालना मुश्किल हो सकता है। इसलिए घर पर खुद जांच करके बीमारी की पुष्टि करना ठीक नहीं है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर अन्य जांचों की सलाह भी दे सकते हैं।
रिपोर्ट में 0.9 से कम नंबर का क्या मतलब है?
आमतौर पर ABI का 1.00 से 1.40 के बीच होना सामान्य माना जाता है। अगर यह 0.90 या उससे कम है, तो पैरों की धमनियों में खून का बहाव कम होने की आशंका हो सकती है। वहीं, 1.40 से ज्यादा का परिणाम धमनियों के सख्त होने या उनके ठीक से दबाव में न आने का संकेत दे सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर आगे की जांच कर सकते हैं। ध्यान रखें कि केवल इस अनुपात से बीमारी की पूरी पुष्टि नहीं होती। रिपोर्ट का सही मतलब व्यक्ति की सेहत और अन्य लक्षणों को ध्यान में रखकर समझा जाता है।
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पैरों में ये लक्षण दिखें तो न करें नजरअंदाज
चलने पर पिंडलियों में दर्द या ऐंठन होना, पैर का ठंडा महसूस होना, त्वचा का रंग बदलना और घाव का देर से भरना धमनियों में खून का बहाव कम होने के संकेत हो सकते हैं। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और धूम्रपान करने वालों में इसका जोखिम अधिक रहता है। ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लें। अगर अचानक पैर में तेज दर्द हो, पैर ठंडा या पीला पड़ जाए अथवा सुन्न होने लगे, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा लें। समय पर जांच से समस्या की पहचान और इलाज में मदद मिल सकती है।




















