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हरदा में करणी सेना परिवार के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच टकराव के बाद उत्पन्न स्थिति ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। राजपूत छात्रावास में पुलिस द्वारा कथित रूप से घुसकर किए गए लाठीचार्ज पर मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा कि हमारी सरकार सामाजिक न्याय और सौहार्द की पक्षधर है, और मध्य प्रदेश में सामाजिक समरसता बिगाड़ने की किसी को अनुमति नहीं दी जाएगी।
विवाद की शुरुआत 11–12 जुलाई को तब हुई जब करणी सेना परिवार के नेता आशीष सिंह राजपूत ने मोगली थाने में एक शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास लोधी, मोहित वर्मा और उमेश तपानिया ने उनके साथ हीरा खरीदने के नाम पर ₹18 लाख की धोखाधड़ी की।
12–13 जुलाई को पुलिस ने मोहित वर्मा को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने का प्रयास किया। इस दौरान 40-50 करणी सेना कार्यकर्ता कोर्ट परिसर और मुख्य मार्ग पर आकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शनकारियों ने आरोपी को कोर्ट में सौंपने के बजाय सीधे उनके हवाले करने की मांग की, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद हो गया।
पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन जब वे नहीं माने, तो स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले, वाटर कैनन और लाठीचार्ज का सहारा लिया गया। इस दौरान करणी सेना परिवार के जिला अध्यक्ष सुनील राजपूत और आशीष राजपूत सहित 4–5 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
3 जुलाई को प्रदर्शन ने और उग्र रूप ले लिया, जब प्रदर्शनकारियों ने खंडवा बायपास हाईवे समेत कई मार्गों को बंद कर दिया। इससे स्कूल बसें, एम्बुलेंस जैसी आवश्यक सेवाएं प्रभावित हुईं। पुलिस ने तीन बार लाठीचार्ज किया, तीन बार वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले छोड़े।
कोर्ट परिसर के बाहर ही नहीं, पुलिस ने राजपूत छात्रावास में घुसकर भी बल प्रयोग किया। स्थानीय नागरिकों और छात्रों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बच्चों और महिलाओं तक को नहीं बख्शा। इन घटनाओं के विरोध में हरदा में तनाव का माहौल बना रहा।
14 जुलाई को प्रशासन ने पुष्टि की कि 60 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हरदा में धारा 163 BNS (पूर्व धारा 144) लागू कर दी गई। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह हरदा पहुंचे और उन छात्रों से मिले जिन पर लाठीचार्ज हुआ था। उन्होंने इस पूरी घटना की न्यायिक जांच की मांग की।
15 जुलाई को करणी सेना परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीवन सिंह शेरपुर को शर्तों के साथ रिहा किया गया। उन्होंने आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की बात कही लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक न्याय नहीं मिलेगा।
प्रशासन ने वीडियो फुटेज जारी करते हुए यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि पुलिस कार्रवाई किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई थी।