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ग्वालियर हाईकोर्ट ने कहा-काउंटर सिग्नेचर नहीं होने से बस संचालन नहीं रोकें

ग्वालियर हाईकोर्ट ने अंतरराज्यीय बस संचालन से जुड़े मामले में निर्देश दिया कि वैध परमिट और पात्रता पूरी होने पर काउंटर सिग्नेचर के आवेदन पर दो सप्ताह में कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल काउंटर सिग्नेचर लंबित होने के आधार पर वैध परमिट वाली बस को संबंधित अंतरराज्यीय मार्ग पर चलने से नहीं रोका जाए।
 ग्वालियर हाईकोर्ट ने कहा-काउंटर सिग्नेचर नहीं होने से बस संचालन नहीं रोकें
फाइल फोटो

ग्वालियर। मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच अंतरराज्यीय बस संचालन से जुड़े एक मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि परमिट के काउंटर सिग्नेचर के लिए प्रस्तुत आवेदन पर नियमानुसार विचार कर पात्रता पूरी होने की स्थिति में दो सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत यह भी स्पष्ट किया है कि केवल काउंटर सिग्नेचर नहीं होने के आधार पर वैध परमिट वाले वाहन को संबंधित अंतरराज्यीय मार्ग पर चलने से नहीं रोका जाए। मामला वाहन क्रमांक UP-93-BT-7689 और नियमित परमिट क्रमांक 53/24/1996 से संबंधित है। याचिकाकर्ता अजय यादव ने झांसी से पिछोर वाया बिलौवा, पनिहार और दिनारा मार्ग पर बस संचालन के लिए परमिट के नवीनीकरण के बाद काउंटर सिग्नेचर कराने की मांग की थी। संबंधित परमिट का नवीनीकरण 6 अगस्त 2026 को किया गया था।

2006 में हुआ था पारस्परिक समझौता

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच 21 नवंबर 2006 को पारस्परिक परिवहन समझौता हुआ था। इसी समझौते के तहत अंतरराज्यीय मार्गों पर बस संचालन और परमिट से संबंधित व्यवस्था निर्धारित की गई है। इस संबंध में पूर्व में हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ द्वारा दिए गए एक निर्णय का भी हवाला दिया गया, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार उस चुनौती को वर्ष 2014 में खारिज किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया। कोर्ट ने पाया कि संबंधित मार्ग का बड़ा हिस्सा मध्यप्रदेश के क्षेत्राधिकार में आता है। इसके बाद सक्षम अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे 21 नवंबर 2006 के पारस्परिक परिवहन समझौते और लागू कानून के अनुसार याचिकाकर्ता के आवेदन पर निर्णय लें।

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दो सप्ताह में काउंटर सिग्नेचर पर निर्णय

जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता परमिट से जुड़ी सभी आवश्यक शर्तें पूरी करता है, तो आदेश की प्रमाणित प्रति अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद दो सप्ताह के भीतर काउंटर सिग्नेचर की कार्रवाई पूरी की जाए।

केवल काउंटर सिग्नेचर लंबित होने पर नहीं रोक सकेंगे बस

कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत स्पष्ट किया कि काउंटर सिग्नेचर की प्रक्रिया लंबित होने मात्र के आधार पर वाहन को संबंधित मार्ग पर चलने से नहीं रोका जाए। हालांकि बस संचालक को परमिट की अन्य सभी वैधानिक शर्तों, नियमों और निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। कोर्ट ने आदेश की प्रमाणित प्रति संबंधित अधिकारियों के समक्ष एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं। मामले में हाईकोर्ट के इस आदेश से अंतरराज्यीय मार्गों पर वैध परमिट के साथ संचालित होने वाले वाहनों के लिए काउंटर सिग्नेचर लंबित रहने की स्थिति को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई है। 

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Ambrish Anand
By Ambrish Anand

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