जबलपुर से घटकर 5 रह गईं फ्लाइट्स, हाईकोर्ट में सुनवाई; इंडिगो ने कहा- रियायत मिले तो बढ़ेंगी उड़ानें

जबलपुर। डुमना एयरपोर्ट से उड़ानों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर मंगलवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच के समक्ष याचिकाकर्ताओं ने कहा कि एक समय जबलपुर से 16 फ्लाइट्स संचालित होती थीं, लेकिन अब इनकी संख्या घटकर केवल 5 रह गई है। सुनवाई के दौरान इंडिगो एयरलाइन्स की ओर से कहा गया कि यदि राज्य सरकार विमानन कंपनियों को जरूरी रियायतें देना शुरू करती है तो दूसरी एयरलाइन्स भी जबलपुर से उड़ानें संचालित करने के लिए आगे आ सकती हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि मामले पर विस्तार से सुनवाई की जाएगी। बेंच ने यह भी कहा कि यदि किसी पक्ष के पास कोई सुझाव है तो उसे अदालत के समक्ष पेश किया जा सकता है। इसके साथ ही मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को निर्धारित की गई है।
16 से घटकर 5 उड़ानों का मुद्दा हाईकोर्ट पहुंचा
डुमना एयरपोर्ट से पर्याप्त संख्या में उड़ानें संचालित नहीं होने को लेकर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच और सुधीर चंद्र दत्त की ओर से जनहित याचिकाएं दाखिल की गई हैं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि जबलपुर से पहले 16 उड़ानें संचालित होती थीं। अब इनकी संख्या घटकर महज पांच रह गई है। इससे जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को हवाई यात्रा के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। याचिकाकर्ताओं ने एयरपोर्ट से उड़ानों की संख्या बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
इंडिगो ने रियायतों को बताया अहम
मामले में इंडिगो एयरलाइन्स की ओर से अदालत को बताया गया कि यदि राज्य सरकार विमानन कंपनियों को कुछ रियायतें उपलब्ध कराती है तो दूसरी एयरलाइन्स भी जबलपुर से अपनी सेवाएं शुरू करने में रुचि दिखा सकती हैं। कंपनी की ओर से यह तर्क ऐसे समय में सामने आया है जब डुमना एयरपोर्ट से उड़ानों की संख्या पहले की तुलना में कम होने का मुद्दा हाईकोर्ट के सामने है। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि मामले के सभी पहलुओं पर विस्तार से सुनवाई की जाएगी। अदालत ने पक्षकारों को अपने सुझाव भी प्रस्तुत करने की छूट दी है।
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सुनवाई में ये अधिवक्ता रहे मौजूद
मंगलवार की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी और अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय उपस्थित हुए। केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन और डिप्टी सॉलिसिटर जनरल सुयश मोहन गुरु ने पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी तथा इंडिगो एयरलाइन्स की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ शर्मा अदालत में मौजूद रहे। मामले की अगली सुनवाई अब 30 नवंबर को होगी।
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उपभोक्ता फोरमों में खाली पदों के मामले का भी हुआ निराकरण
मंगलवार को चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने उपभोक्ता फोरमों में रिक्त पदों से संबंधित एक अन्य जनहित याचिका का भी निराकरण कर दिया। यह याचिका पीजी नाजपाण्डे की ओर से दाखिल की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि उपभोक्ता फोरमों में खाली पदों को भरने के लिए सरकार की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने दलीलें रखीं। वहीं राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ब्रम्हदत्त सिंह ने अदालत को बताया कि कुल 25 स्वीकृत पदों में से 19 पदों पर पूरी तरह काम हो रहा है। बाकी रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। राज्य सरकार की ओर से दिए गए इस बयान पर भरोसा जताते हुए हाईकोर्ट ने मामले में आगे सुनवाई से इनकार कर दिया और जनहित याचिका का निराकरण कर दिया।




















