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ग्वालियर: डबरा में 20 बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी भारतीय पासपोर्ट बने, एसटीएफ ने गवाह को किया गिरफ्तार

ग्वालियर जिले के डबरा में फर्जी दस्तावेजों के जरिए 20 बांग्लादेशी नागरिकों के भारतीय पासपोर्ट बनवाने का मामला सामने आया है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने ऐसे गिरोह का पता लगाया है, जिसने सभी पासपोर्ट के लिए डबरा तहसील के एक ही पते का इस्तेमाल किया। मामले में सभी आवेदकों को बौद्ध विहार में रहने वाला बौद्ध धर्म का अनुयायी बताया गया और पासपोर्ट में एक ही गवाह के साइन मिले हैं।
ग्वालियर: डबरा में 20 बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी भारतीय पासपोर्ट बने, एसटीएफ ने गवाह को किया गिरफ्तार
डबरा में 20 बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी भारतीय पासपोर्ट बने

ग्वालियर। एसटीएफ ने पासपोर्ट में गवाह बने रियाल चौधरी को गिरफ्तार किया है और अब पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। जांच में फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी, निवास प्रमाण पत्र और 10वीं की मार्कशीट जैसे दस्तावेज तैयार कराने की बात सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए देशभर में 10 टीमें जांच कर रही हैं और 44 अन्य पासपोर्ट भी जांच के दायरे में लिए गए हैं।

एक ही पते से बने 20 भारतीय पासपोर्ट

एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि डबरा के एक ही पते का इस्तेमाल कर 20 बांग्लादेशी नागरिकों के भारतीय पासपोर्ट बनवाए गए। सभी को डबरा स्थित बौद्ध विहार में रहने वाला बौद्ध धर्म का अनुयायी बताया गया था। खास बात यह है कि सभी पासपोर्ट में एक ही गवाह के हस्ताक्षर मिले हैं। इसी आधार पर STF ने गवाह रियाल चौधरी को गिरफ्तार किया है और उससे पूछताछ के जरिए गिरोह के अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

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फर्जी दस्तावेज तैयार कर कराया आवेदन

जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह ने बांग्लादेशी नागरिकों के लिए स्थानीय स्तर पर कई फर्जी दस्तावेज तैयार कराए। इनमें आधार कार्ड, वोटर आईडी, निवास प्रमाण पत्र और 10वीं की अंकसूची समेत अन्य दस्तावेज शामिल हैं। इन्हीं कागजात के आधार पर भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन किया गया। सभी 20 पासपोर्ट में गवाह के तौर पर रियाल चौधरी का नाम दर्ज मिला है।

पुलिस वेरिफिकेशन पर उठे सवाल

पासपोर्ट जारी होने से पहले पुलिस आवेदक के पते, पहचान और चरित्र का भौतिक सत्यापन करती है। ऐसे में एक ही पते से 20 बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट जारी होने से पूरी सत्यापन व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि सत्यापन के दौरान जानबूझकर लापरवाही हुई या फिर इसमें पुलिसकर्मियों की मिलीभगत थी। जांच में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

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पांच साल पहले बने थे पासपोर्ट

एसटीएफ अधिकारियों के मुताबिक, इन 20 फर्जी भारतीय पासपोर्ट को करीब पांच साल पहले बनवाया गया था। जांच में यह भी सामने आया है कि इनमें से कुछ बांग्लादेशी नागरिकों ने इन्हीं पासपोर्ट का इस्तेमाल कर थाईलैंड, चीन और भूटान समेत दूसरे देशों की यात्रा की। इन यात्राओं के पीछे क्या मकसद था और फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल किस तरह किया गया, इसकी भी जांच की जा रही है।

44 और पासपोर्ट जांच के घेरे में

रियाल चौधरी की गिरफ्तारी के बाद 44 अन्य पासपोर्ट भी एसटीएफ की जांच के दायरे में आ गए हैं। शुरुआती पड़ताल में इनमें भी कई पासपोर्ट पर एक जैसे पते और गवाह की जानकारी सामने आई है, जिससे इनके भी फर्जी होने की आशंका बढ़ गई है। एसटीएफ ने एक अन्य संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन पासपोर्ट का संबंध भी इसी गिरोह से है या नहीं।

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देशभर में 10 टीमें कर रहीं जांच

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसटीएफ ने देशभर में करीब 10 टीमें जांच में लगाई हैं। मध्यप्रदेश की चार टीमें ग्वालियर समेत अलग-अलग जिलों में स्थानीय नेटवर्क और संदिग्धों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं। वहीं, असम, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में छह टीमें बिचौलियों, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह और नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश में जुटी हैं।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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