एयरपोर्ट से सराफा तक सोने की तस्करी का सिंडिकेट बेनकाब:कस्टम कर्मचारी और ग्राउंड स्टाफ गिरफ्तार

इंदौर। अबूधाबी से इंदौर आने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ानों के जरिए संचालित हो रहे करोड़ों रुपये के सोना तस्करी नेटवर्क का राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया है कि इस पूरे रैकेट में कस्टम विभाग का एक कर्मचारी, एयरपोर्ट का ग्राउंड स्टाफ, हैंडलिंग एजेंसी का पूर्व कर्मचारी और सराफा बाजार का एक व्यापारी शामिल थे। डीआरआई ने करीब 1.20 किलोग्राम विदेशी सोना, जिसकी कीमत लगभग 1.28 करोड़ रुपये आंकी गई है, जब्त करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
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जानकारी के अनुसार डीआरआई को गोपनीय सूचना मिली थी कि जुलाई से शुरू हुई अबूधाबी-इंदौर उड़ानों के जरिए लगातार सोने की तस्करी की जा रही है। इसके बाद अधिकारियों ने कई दिनों तक यात्रियों की प्रोफाइलिंग और निगरानी की। सोमवार तड़के इंदौर एयरपोर्ट पर उतरी एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX-248 से आए यात्री गोविंद पोरवाल को पूछताछ के लिए रोका गया। इसी दौरान एयरपोर्ट के बाहर से सराफा व्यापारी संजय मुंजे, एयर इंडिया के ग्राउंड स्टाफ वासुदेव बरनाले और हैंडलिंग एजेंसी के पूर्व कर्मचारी अमल गेहलोत को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के बाद कस्टम विभाग के टैक्स असिस्टेंट अजय कुमार सेन को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
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एयरोब्रिज पर ही बदल जाता था सोना
जांच में खुलासा हुआ कि सराफा व्यापारी संजय मुंजे ने गोविंद पोरवाल को विदेश से सोना लाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। गोविंद पहले सराफा बाजार की एक ज्वेलरी दुकान में काम कर चुका था। तस्करी के लिए सोने को हाथ के कड़े का आकार दिया जाता था और उस पर चांदी जैसा रंग चढ़ा दिया जाता था, ताकि जांच एजेंसियों को शक न हो।एयरपोर्ट पर उतरने के बाद कस्टम जांच से पहले ही एयरोब्रिज पर गोविंद यह सोना एयर इंडिया के ग्राउंड स्टाफ वासुदेव बरनाले को सौंप देता था। चूंकि वह एयरपोर्ट कर्मचारी था, इसलिए उसकी नियमित यात्री जैसी जांच नहीं होती थी। इसके बाद वह सोना एयरपोर्ट से बाहर निकालकर अमल गेहलोत के जरिए संजय मुंजे तक पहुंचा देता था।
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कस्टम कर्मचारी देता था गोपनीय सूचना
डीआरआई की जांच में यह भी सामने आया कि कस्टम विभाग में पदस्थ टैक्स असिस्टेंट अजय कुमार सेन तस्करों को एयरपोर्ट की गतिविधियों की गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराता था। वह बताता था कि किस स्थान पर डीआरआई और कस्टम अधिकारी तैनात हैं तथा किस रास्ते से सोना सुरक्षित बाहर निकाला जा सकता है। इसके बदले संजय मुंजे कथित रूप से प्रत्येक खेप पर कस्टम कर्मचारी और ग्राउंड स्टाफ को 10 हजार रुपये देता था।
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सराफा बाजार में होती थी खपत
जांच एजेंसी के अनुसार तस्करी कर लाया गया सोना इंदौर के सराफा बाजार में खपाया जाता था। संजय मुंजे की सराफा क्षेत्र में दुकान है और वह कुछ दलालों के माध्यम से यह सोना ज्वैलर्स तक पहुंचाता था। प्रत्येक 10 ग्राम सोने पर 5 से 10 हजार रुपये तक का मुनाफा कमाया जाता था। पूछताछ और साक्ष्य जुटाने के बाद डीआरआई ने सभी पांच आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें 18 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।












