पूर्व टीआई की वर्दी पर लगा दाग: 'पॉकेट गवाह' कांड में गिरी गाज

इंदौर। खजराना थाने के पूर्व थाना प्रभारी (टीआई) दिनेश वर्मा को चर्चित 'पॉकेट गवाह' प्रकरण में गंभीर अनियमितताओं का दोषी पाए जाने पर पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह ने बड़ी कार्रवाई की है। आठ पन्नों के विस्तृत आदेश में विभागीय जांच के आधार पर वर्मा को तीन वर्ष के लिए निरीक्षक (इंस्पेक्टर) से पदावनत कर उप निरीक्षक (एसआई) बना दिया गया है। आयुक्त ने अपने आदेश में माना कि विभागीय जांच में उनके खिलाफ लगाए गए कई आरोप सिद्ध हुए हैं।
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दिनेश वर्मा 31 अगस्त 2020 से 2 अगस्त 2023 तक खजराना थाने में पदस्थ रहे। जांच के दौरान सामने आया कि इस अवधि में उन्होंने 742 प्रकरणों में इरशाद पुत्र अब्दुल हकीम तथा 504 प्रकरणों में नवीन पुत्र रामचंद्र चौहान को गवाह बनाया। इनमें हत्या, धोखाधड़ी, हत्या के प्रयास, कूटरचना, छेड़छाड़, दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट, आबकारी एक्ट और एनडीपीएस एक्ट जैसे गंभीर मामलों की विवेचना भी शामिल थी।
आदेश में कड़ी टिप्पणी
पुलिस आयुक्त ने अपने आदेश में कहा कि दिनेश वर्मा ने पुलिस रेगुलेशन के पैरा 64(2), 64(3) और पैरा 582 का उल्लंघन किया। आदेश में उल्लेख है कि थाना प्रभारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के कार्यों के लिए भी जिम्मेदार होता है, लेकिन वर्मा ने इस जिम्मेदारी का निर्वहन निष्ठा और ईमानदारी से नहीं किया। जांच में यह भी सामने आया कि एक प्रकरण में जब्ती पत्रक पर गवाहों के कथित फर्जी हस्ताक्षर किए गए, जिससे आरोपियों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाने का प्रयास हुआ। इस मामले की जांच तत्कालीन सीएसपी जयंत राठौर ने की थी। उनकी गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर विभागीय जांच शुरू की गई।
वर्मा ने आरोपों से किया इनकार
विभागीय जांच के दौरान दिनेश वर्मा ने अपने बचाव में कहा कि गवाहों का चयन विवेचक द्वारा किया गया था और उनके हस्ताक्षरों की विशेषज्ञ से जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तत्कालीन अधिकारियों द्वारा गवाहों पर दबाव डाला गया था। हालांकि पुलिस आयुक्त ने अपने आदेश में कहा कि वर्मा द्वारा प्रस्तुत तर्क संतोषजनक नहीं हैं और उपलब्ध साक्ष्य उनके विरुद्ध आरोपों की पुष्टि करते हैं।
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पहले भी हो चुकी हैं ऐसी कार्रवाई
पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह के कार्यकाल में यह तीसरा मामला है, जब किसी निरीक्षक को पदावनत किया गया है। इससे पहले निरीक्षक रवींद्र सिंह गुर्जर और अजय वर्मा के खिलाफ भी इसी प्रकार की कार्रवाई की जा चुकी है। इसके अलावा 20 से अधिक पुलिसकर्मियों को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है तथा 100 से अधिक पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय जांच लंबित है, जिनमें कई थाना प्रभारी भी शामिल हैं।












