थरूर ने कहा, “मैं यह नहीं कहूंगा कि मोदी सरकार लोकतंत्र-विरोधी है, लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि वे नेहरू-विरोधी हैं। नेहरू को हर मुद्दे पर दोषी ठहराने की प्रवृत्ति ठीक नहीं है।” उन्होंने साफ किया कि वे जवाहरलाल नेहरू के विचारों और दृष्टिकोण की गहरी प्रशंसा करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि नेहरू की हर नीति और सोच का बिना आलोचना समर्थन किया जाए। थरूर ने कहा कि किसी भी नेता की विरासत को समझने के लिए संतुलित नजरिया जरूरी है।
कांग्रेस सांसद गुरुवार को केरल विधानसभा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव (KLIBF) के चौथे संस्करण में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि नेहरू भारतीय लोकतंत्र के संस्थापक थे और उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूती से स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। थरूर के मुताबिक, नेहरू की ऐतिहासिक भूमिका को नजरअंदाज करना या उन्हें केवल आलोचना के दायरे में सीमित कर देना देश के राजनीतिक इतिहास के साथ अन्याय होगा।
किताबें ही सबसे करीबी साथी बनीं- थरूर
वहीं अपने लेखक जीवन के अनुभव साझा करते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बताया कि बचपन में अस्थमा की बीमारी के कारण उनका अधिकतर समय घर पर ही गजरता था। उस दौर में न तो टेलीविजन था और न ही मोबाइल फोन, इसलिए किताबें ही उनकी सबसे करीबी साथी बन गईं। यहीं से पढ़ने और लिखने की आदत विकसित हुई।
स्याही गिरने से पहला उपन्यास खराब हुआ
वहीं आगे थरूर ने यह भी बताया कि उन्होंने बहुत कम उम्र में अपना पहला उपन्यास लिखा था, लेकिन दुर्भाग्य से उस पर स्याही गिर जाने के कारण वह नष्ट हो गया। उन्होंने यह भी कहा कि श्री नारायना गुरु की जीवनी उनकी अब तक की 28वीं पुस्तक है, जिस पर उन्हें खास गर्व है। उन्होंने चिंता जताई कि दुनिया के कई हिस्सों में पढ़ने की आदत धीरे-धीरे कम हो रही है, लेकिन केरल आज भी पढ़ने की संस्कृति में अग्रणी बना हुआ है। थरूर के अनुसार, यह राज्य साहित्य और ज्ञान के प्रति अपनी गहरी रुचि के लिए जाना जाता है।
लेखन को लेकर उन्होंने बताया कि उन्होंने 1989 में The Great Indian Novel इसलिए लिखा, क्योंकि उस समय भारत में व्यंग्य विधा लगभग न के बराबर थी। युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए थरूर ने कहा कि आज के दौर में कम पन्नों वाली और संक्षिप्त किताबें ज्यादा प्रभावी हो सकती हैं, क्योंकि लोगों के पास पढ़ने के लिए पहले की तुलना में कम समय रह गया है।
1 जनवरी का बयान चर्चा में रहा
केरल के वायनाड स्थित सुल्तान बथेरी में एक प्रोग्राम के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी पार्टी लाइन से हटकर कोई काम नहीं किया। उन्होंने कहा, “मेरा सवाल है कि किसने कहा कि मैंने पार्टी लाइन छोड़ दी? जब मैंने अलग-अलग विषयों पर अपनी राय रखी, तब भी पार्टी और मैं एक ही लाइन पर खड़े थे।”
थरूर ने आगे यह भी बताया कि विचार रखना पार्टी से अलग होना नहीं होता। उन्होंने कहा कि वह पिछले 17 साल से कांग्रेस पार्टी में हैं और इस दौरान उनके सहकर्मियों के साथ हमेशा अच्छे और सम्मानजनक संबंध रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के भीतर संवाद और अलग-अलग दृष्टिकोण लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा हैं, और इससे पार्टी को मजबूती ही मिलती है।





















