Local Body Elections :परिसीमन नहीं, वर्तमान वार्ड सीमाओं के आधार पर होंगे स्थानीय चुनाव

अशोक गौतम,भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग अब चुनावी मोड पर आ गया है। नगरीय निकाय और पंचायतों की वर्तमान सीमाओं के आधार पर होगा। मतलब अगले वर्ष होने वाले चुनाव बिना परिसीमन के होंगे। इसका मुख्य कारण जनगणना 2027 है, यह काम अप्रैल से शुरू होगा और एक साल तक चलेगा। परिसीमन के लिए करीब 6 माह का समय जिला प्रशासन को लगेगा, इसके चलते यह काम होना मुश्किल लग रहा है। निकाय और पंचायतों के चुनाव अगले साल मई, जून में होने हैं,क्योंकि स्थानीय सरकार का कार्यकाल जून में समाप्त हो जाएगा।
नई मतदाता सूची का होगा उपयोग
भारत निर्वाचन आयोग के माध्यम से तैयार SIR की मतदाता सूची का उपयोग मप्र राज्य निर्वाचन आयोग भी लोकल चुनाव में करेगा। सूची फाइनल होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग एक बार उसका समरी रिवीजन करेगा। इसके माध्यम से राज्य निर्वाचन आयोग मतदाता सूची अपने अनुसार तैयार करेगा और नए मतदाताओं के नाम जोड़ने और बाहर करने का काम किया जाएगा। चुनाव की अधिसूचना मार्च-अप्रैल 2027 में जारी की जा सकती है। चुनाव को लेकर आयोग के आयुक्त मनोज श्रीवास्तव से संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने इस संबंध में फिलहाल कोई जानकारी देने में असमर्थता जताई।
आयोग शुरू करेगा ट्रेनिंग
राज्य निर्वाचन आयोग मतदान कर्मियों की ट्रेनिंग का काम फरवरी से प्रारंभ कर देगा। इसमें कर्मचारियों को निर्वाचन कार्यक्रम और प्रक्रिया में आए बदलाव की जानकारी देगा। इस चुनाव में सबसे बड़ा बदलाव अध्यक्ष का सीधे चुनाव और पार्षदों के महापौर अध्यक्ष के खर्च की जानकारी आयोग को देना है। इसके अलावा चुनाव की सभी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी।
EVM से होंगे पंचायत चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग आगामी पंचायत चुनाव EVM के माध्यम से कराएगा। इसके लिए करीब डेढ़ लाख EVM लगेंगे, आयोग के पास वर्तमान में करीब 55 हजार ईवीएम हैं, 75 हजार EVM के लिए राज्य सरकार के पास डिमांड भेजी है। EVM के बाद आयोग इस पर अंतिम निर्णय लेगा। इसके पीछे आयोग की मंशा कागज के दुरुपयोग को रोकना और मतदान, परिणाम के कामों में समय बचाना है।
तीन जिलों की मतदाता सूची अलग से तैयार होगी
प्रदेश में मऊगंज, मैहर, पांढुर्णा नए जिलों की मतदाता सूची अलग से तैयार करना होगी। विशेष तौर पर इसमें पंचायत के अनुसार मतदाता सूची आयोग को तैयार करना होगा। बाकी जिलों में पंचायत की सीमाओं को लेकर आयोग को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी





















