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SC में आवारा कुत्तों पर तीसरे दिन भी सुनवाई :सिंघवी बोले- नियम पहले से हैं, कोर्ट दखल न दे

सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मुद्दे पर लगातार तीसरे दिन सुनवाई हुई। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि एबीसी नियम और कानून पहले से मौजूद हैं, ऐसे में अदालत को दखल नहीं देना चाहिए। माइक्रो-चिप, अस्पतालों में कुत्तों की एंट्री, महिलाओं पर हमले और इंसान-पशु संतुलन पर कोर्ट में तीखी बहस हुई। अगली सुनवाई 13 जनवरी को होगी।
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सिंघवी बोले- नियम पहले से हैं, कोर्ट दखल न दे
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामले पर शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से इस मामले में हस्तक्षेप न करने की अपील की। उन्होंने कहा कि, यह अब सिर्फ कुत्तों और इंसानों का मुद्दा नहीं, बल्कि इसमें संविधान के बुनियादी सिद्धांत, मौजूदा कानून और प्रशासनिक जिम्मेदारी जुड़े हुए हैं। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनते हुए अगली सुनवाई की तारीख 13 जनवरी तय की है।

    सिंघवी का तर्क- कानून है तो कोर्ट क्यों दखल दे

    ACGS (All Creatures Great and Small) संस्था की ओर से दलील देते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि, Animal Birth Control (ABC) Rules और अन्य नियम पहले से ही लागू हैं। ऐसे में अदालत का दायित्व तभी बनता है जब कोई कानून मौजूद न हो।

    सिंघवी ने साफ कहा, जब संसद जानबूझकर इस विषय में दखल नहीं दे रही है, तो सुप्रीम कोर्ट को भी इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि समस्या कानून की कमी नहीं, बल्कि कानून के सही क्रियान्वयन की कमी है।

    एमिकस क्यूरी पर सवाल, डोमेन एक्सपर्ट की मांग

    सुनवाई के दौरान सिंघवी ने एमिकस क्यूरी (अदालत के सलाहकार) की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि, एमिकस अच्छे कानून सलाहकार हो सकते हैं, लेकिन वे जरूरी नहीं कि पशु, पर्यावरण या स्वास्थ्य जैसे विषयों के विशेषज्ञ हों।

    उन्होंने अरावली केस का उदाहरण देते हुए कहा कि, वहां बनी समिति में ज्यादातर अफसर थे, एक्सपर्ट नहीं। इसी कारण बाद में उस फैसले पर पुनर्विचार करना पड़ा। उन्होंने सुझाव दिया कि, इस मामले में डोमेन एक्सपर्ट्स को शामिल किया जाना चाहिए।

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    माइक्रो-चिप पर बहस, जस्टिस मेहता ने उठाए सवाल

    सुनवाई के दौरान आवारा कुत्तों में माइक्रो-चिप लगाने के सुझाव पर भी चर्चा हुई। वरिष्ठ वकील ने कहा कि, माइक्रो-चिप की कीमत 100-200 रुपए है और इससे आक्रामक कुत्तों की पहचान कर उन्हें अलग कैटेगरी में रखा जा सकता है।

    इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, दूसरे देशों की बात मत कीजिए, उनकी आबादी कितनी है? जरा प्रैक्टिकल बातें करें।

    सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों की एंट्री पर सख्ती

    एनीमल राइट्स की दलीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए जस्टिस मेहता ने कहा कि, सड़क पर रहने वाले किसी भी कुत्ते में संक्रमण और कीड़े हो सकते हैं। अगर ऐसे कुत्ते अस्पताल या ऑपरेशन थिएटर तक पहुंच जाएं तो स्थिति गंभीर हो सकती है। जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि, अदालत में जो तर्क दिए जा रहे हैं, वे जमीनी हकीकत से काफी दूर हैं। इसे बढ़ा-चढ़ाकर बताना बंद करें।

    वकीलों के 4 सुझाव

    एक वकील ने कोर्ट के सामने आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए 4 अहम सुझाव रखे-

    1. पब्लिक जगहों की जोनिंग: अस्पताल, स्कूल और मेन रोड कुत्तों से मुक्त हों।
    2. फीडिंग जोन तय हों, जो पब्लिक रास्तों से दूर हों।
    3. ABC नियमों का सख्ती से पालन और राज्यों की इंफ्रास्ट्रक्चर कमी की पहचान।
    4. हर नगर निगम क्षेत्र में एक जिम्मेदार अधिकारी की नियुक्ति।

    इन सुझावों पर जस्टिस मेहता ने कहा कि भले ही अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन संतुलन बनाने की कोशिश सराहनीय है।

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    महिला वकीलों की दलील

    सीनियर एडवोकेट महालक्ष्मी पावनी ने कोर्ट को बताया कि, कुत्तों को खाना खिलाने वाली महिलाओं को धमकाया जा रहा है, पीटा जा रहा है, यहां तक कि उनके घरों में घुसकर हमला किया गया।

    इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट कहा कि, अगर FIR दर्ज नहीं हो रही है, तो यह कानून-व्यवस्था की समस्या है और ऐसे मामलों में सीधे कार्रवाई की जानी चाहिए।

    आवारा कुत्तों के केस की अब तक की टाइमलाइन

    28 जुलाई 2025: सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया

    11-14 अगस्त 2025: कुत्तों को शेल्टर होम भेजने का आदेश

    22 अगस्त 2025: नसबंदी के बाद छोड़ने का निर्देश

    3 नवंबर 2025: राज्यों के मुख्य सचिव तलब

    7 नवंबर 2025: अस्पताल, स्कूल, रेलवे स्टेशन से कुत्ते हटाने का आदेश

    7-8 जनवरी 2026: कोर्ट की सख्त टिप्पणियां, तीसरे दिन सुनवाई

    यह भी पढ़ें: कुत्ते, डर और हमला : SC में आवारा कुत्तों पर सुनवाई, कोर्ट ने बताई काटने की असली वजह

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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