Naresh Bhagoria
9 Jan 2026
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामले पर शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से इस मामले में हस्तक्षेप न करने की अपील की। उन्होंने कहा कि, यह अब सिर्फ कुत्तों और इंसानों का मुद्दा नहीं, बल्कि इसमें संविधान के बुनियादी सिद्धांत, मौजूदा कानून और प्रशासनिक जिम्मेदारी जुड़े हुए हैं। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनते हुए अगली सुनवाई की तारीख 13 जनवरी तय की है।
ACGS (All Creatures Great and Small) संस्था की ओर से दलील देते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि, Animal Birth Control (ABC) Rules और अन्य नियम पहले से ही लागू हैं। ऐसे में अदालत का दायित्व तभी बनता है जब कोई कानून मौजूद न हो।
सिंघवी ने साफ कहा, जब संसद जानबूझकर इस विषय में दखल नहीं दे रही है, तो सुप्रीम कोर्ट को भी इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि समस्या कानून की कमी नहीं, बल्कि कानून के सही क्रियान्वयन की कमी है।
सुनवाई के दौरान सिंघवी ने एमिकस क्यूरी (अदालत के सलाहकार) की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि, एमिकस अच्छे कानून सलाहकार हो सकते हैं, लेकिन वे जरूरी नहीं कि पशु, पर्यावरण या स्वास्थ्य जैसे विषयों के विशेषज्ञ हों।
उन्होंने अरावली केस का उदाहरण देते हुए कहा कि, वहां बनी समिति में ज्यादातर अफसर थे, एक्सपर्ट नहीं। इसी कारण बाद में उस फैसले पर पुनर्विचार करना पड़ा। उन्होंने सुझाव दिया कि, इस मामले में डोमेन एक्सपर्ट्स को शामिल किया जाना चाहिए।
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सुनवाई के दौरान आवारा कुत्तों में माइक्रो-चिप लगाने के सुझाव पर भी चर्चा हुई। वरिष्ठ वकील ने कहा कि, माइक्रो-चिप की कीमत 100-200 रुपए है और इससे आक्रामक कुत्तों की पहचान कर उन्हें अलग कैटेगरी में रखा जा सकता है।
इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, दूसरे देशों की बात मत कीजिए, उनकी आबादी कितनी है? जरा प्रैक्टिकल बातें करें।
एनीमल राइट्स की दलीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए जस्टिस मेहता ने कहा कि, सड़क पर रहने वाले किसी भी कुत्ते में संक्रमण और कीड़े हो सकते हैं। अगर ऐसे कुत्ते अस्पताल या ऑपरेशन थिएटर तक पहुंच जाएं तो स्थिति गंभीर हो सकती है। जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि, अदालत में जो तर्क दिए जा रहे हैं, वे जमीनी हकीकत से काफी दूर हैं। इसे बढ़ा-चढ़ाकर बताना बंद करें।
एक वकील ने कोर्ट के सामने आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए 4 अहम सुझाव रखे-
इन सुझावों पर जस्टिस मेहता ने कहा कि भले ही अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन संतुलन बनाने की कोशिश सराहनीय है।
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सीनियर एडवोकेट महालक्ष्मी पावनी ने कोर्ट को बताया कि, कुत्तों को खाना खिलाने वाली महिलाओं को धमकाया जा रहा है, पीटा जा रहा है, यहां तक कि उनके घरों में घुसकर हमला किया गया।
इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट कहा कि, अगर FIR दर्ज नहीं हो रही है, तो यह कानून-व्यवस्था की समस्या है और ऐसे मामलों में सीधे कार्रवाई की जानी चाहिए।
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