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First Woman Civil Engineer:इंजीनियरिंग में नई राह दिखाने वाली महिला, जिसने बदल दिए भारत के पुल

शकुंतला भगत 1950 के दशक में भारत की पहली महिला सिविल इंजीनियर बनीं। उन्होंने नए तरह के पुल बनाने के तरीके खोजे। उनके काम ने भारत के सड़क और पुल निर्माण में बदलाव लाया और यह दिखाया कि महिलाएं इंजीनियरिंग में भी आगे बढ़ सकती हैं।
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इंजीनियरिंग में नई राह दिखाने वाली महिला, जिसने बदल दिए भारत के पुल
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    1950 के दशक में, जब इंजीनियरिंग में महिलाएं बहुत कम थीं, मुंबई की शकुंतला भगत भारत की पहली महिला सिविल इंजीनियर बनीं। उन्होंने VJTI से स्नातक किया और बाद में अमेरिका से मास्टर डिग्री हासिल की, भारत में महिलाओं के लिए इंजीनियरिंग के नए रास्ते खोले।

    भारत की पहली महिला सिविल इंजीनियर

    1950 के दशक में, जब भारत के इंजीनियरिंग कक्षाओं में अधिकतर पुरुष थे, मुंबई की शकुंतला ए. भगत ने चुपचाप इतिहास रच दिया। वे 1953 में वीरमाता जीजाबाई टेक्नोलॉजिकल इंस्टिट्यूट (VJTI) से स्नातक हुईं और बाद में अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की। उस समय के बहुत कम भारतीय महिलाओं में से एक बनने का गौरव उन्हें प्राप्त हुआ।

    आधुनिक पुलों का नवाचार

    देश में आधुनिक अवसंरचना की नींव रखी जा रही थी, तब शकुंतला भगत ने इसे वास्तविकता में बदलने का निर्णय लिया। अपने पति डॉ. अनंत भगत के साथ, उन्होंने Quadricon Pvt. Ltd. की स्थापना की, जो मॉड्यूलर पुल डिज़ाइन में अग्रणी कंपनी बनी। उनके द्वारा विकसित Quadricon सिस्टम ने हल्के, प्रीफैब्रिकेटेड स्टील पुलों का मार्ग प्रशस्त किया, जिन्हें कठिन इलाकों में भी जल्दी और सुरक्षित तरीके से स्थापित किया जा सकता था।

    अंतरराष्ट्रीय मान्यता और नवाचार

    उनकी डिजाइन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया और कई देशों में पेटेंट भी मिला। बाद में उन्होंने Unishear Connector का पेटेंट भी कराया, जिससे स्टील पुलों की मजबूती और स्थिरता और बढ़ गई। उनके सिस्टम ने भारत में पुल निर्माण की प्रक्रिया को बदल दिया, लागत और समय दोनों में बचत की।

    स्टीरियोटाइप्स को चुनौती

    जब कार्यालयों में भी महिला इंजीनियर कम थीं, तब शकुंतला भगत निर्माण स्थलों पर हेलमेट पहनकर भारी स्टील संरचनाओं का निरीक्षण करतीं। उनकी यह साहसिक और शांत उपस्थिति लंबे समय तक महिलाओं के लिए इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नए रास्ते खोलने का उदाहरण बनी। आज शकुंतला भगत का काम भारत की सिविल इंजीनियरिंग की धरोहर का हिस्सा है। उन्होंने न केवल स्टील के पुल बनाए, बल्कि संभावनाओं के पुल भी बनाए, जो महिलाओं को इंजीनियरिंग और नवाचार के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित करते हैं।

    Aditi Rawat
    By Aditi Rawat

    अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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