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डंडे का डर या पुलिस का ड्रामा?बदमाशों के नकली प्लास्टर ने पुलिस की खोली पोल

हीरानगर पुलिस की कार्रवाई पर वायरल वीडियो से उठे सवाल, जेल पहुंचते ही आरोपितों ने कथित तौर पर उतारीं पट्टियां; ₹20 हजार लेकर फर्जी प्लास्टर बांधने के आरोप, एसीपी ने जांच के दिए निर्देश।
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बदमाशों के नकली प्लास्टर ने पुलिस की खोली पोल
पुलिस वाले पट्टा उतारते हुए

इंदौर। शहर की हीरानगर पुलिस की कार्रवाई एक वायरल वीडियो के बाद सवालों के घेरे में आ गई है। वीडियो में दावा किया गया है कि जिन दो आरोपितों को घायल बताकर हाथ-पैर में प्लास्टर बांधकर जुलूस निकाला गया था, उन्होंने जेल पहुंचने से पहले कथित तौर पर पट्टियां खोलकर झाड़ियों में फेंक दीं। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

 

मामला हीरानगर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान मयंक और शोभित के रूप में हुई है। पुलिस ने गिरफ्तारी के दौरान दावा किया था कि दोनों को गिरने से चोट लगी थी, इसलिए उनके हाथ-पैर में प्लास्टर बंधा था। इसके बाद दोनों का जुलूस भी निकाला गया, जिसमें पुलिसकर्मी उन्हें लेकर सड़कों पर घूमते दिखाई दिए।

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जेल पहुंचने से पहले उतारीं पट्टियां

वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा है कि जेल परिसर के बाहर पहुंचने के बाद दोनों आरोपित कथित रूप से अपने हाथ-पैर की पट्टियां खोलकर झाड़ियों में फेंक देते हैं। यह पूरा घटनाक्रम किसी व्यक्ति ने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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₹20 हजार लेने के भी लगे आरोप

वीडियो में यह आरोप भी लगाया गया है कि फर्जी प्लास्टर बांधने और मारपीट से बचाने के बदले ₹20 हजार लिए गए। हालांकि, इस आरोप की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस ने भी इस संबंध में कोई पुष्टि नहीं की है।

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एसीपी ने जांच की बात कही

वायरल वीडियो में हीरानगर एसीपी रुबिना मिजवानी का नाम भी लिया जा रहा है। इस पर एसीपी ने कहा कि वीडियो उनके संज्ञान में आया है और पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

गौरतलब है कि पुलिस आयुक्त के निर्देश पर गंभीर अपराधों में गिरफ्तार आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। ऐसे मामलों में आरोपितों को चोटिल होने का हवाला देकर प्लास्टर बंधे होने की तस्वीरें भी सार्वजनिक की जाती रही हैं। अब वायरल वीडियो के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि संबंधित मामले में अपनाई गई प्रक्रिया वास्तविक थी या नहीं। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू करने की बात कही है।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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