भोपाल। देशभर में आज यानी सोमवार (17 जून) को ईद-उल-अजहा का त्योहार मनाया जा रहा है। मस्जिदों व ईदगाहों में उल्लास का माहौल देखने को मिल रहा है। लोग एक-दूसरे को मुबारकबाद दे रहे हैं। घरों में दावतों का दौर चल रहा है। इसे बकरीद या कुर्बानी का त्योहार भी कहा जाता है। भोपाल के ताजुल मसाजिद में ईद-उल-अजहा (बकरीद) की नमाज अदा की गई। इस दौरान देश में अमन-चैन की दुआ मांगी गई। नमाज के बाद लोगों ने गले लगकर एक-दूसरे को दी ईद की मुबारकबाद।
भोपाल में बारिश के बीच अदा की गई नमाज
भोपाल में प्रमुख मस्जिदों में रिमझिम बारिश के बीच ईद-उल-अजहा की नमाज अदा की गई। नमाज के बाद देश-दुनिया में अमन के लिए दुआ की गई। इस त्योहार को बलिदान का प्रतीक माना जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, जिलहिज्जा महीने में चांद दिखने पर ईद उल-अजहा (बकरीद) की तारीख तय की जाती है। नमाज के बाद घरों में जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। यह त्यौहार 3 दिन तक चलता है।
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ताजुल मसाजिद में नमाज अदा करते लोग।[/caption]
आज के दिन कुर्बानी का क्या महत्व है
ईद की नमाज होने के बाद बकरे या किसी अन्य जानवर की कुर्बानी का सिलसिला शुरू हो जाता है। बकरीद पर कुर्बानी का काफी खास महत्व है। कुर्बानी के बाद जो गोश्त निकलता है, उसे तीन हिस्सों में बांट दिया जाता है। इनमें एक हिस्सा खुद के लिए, एक रिश्तेदारों के लिए और एक गरीबों के लिए होता है। इन हिस्सों को सही से बांटने के बाद ही कुर्बानी का गोश्त जायज माना जाता है। रमजान के पवित्र महीने के ठीक 70 दिन बाद बकरीद मनाई जाती है।
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