PU Special :ई-विकास 2.0 में किसानों की बढ़ी परेशानी, टोकन नहीं हो रहे जनरेट; खाद के लिए सोसायटी के चक्कर

पुष्पेन्द्र सिंह, भोपाल। भिंड के गोहद ब्लॉक के ग्राम उरीखा निवासी गजेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने 20 बीघा में धान लगाया है और परिवार को डीएपी और यूरिया की जरूरत है। बैतूल के भैंसदेही में किसान रघुनाथ ने पोर्टल पर जानकारी भरने और कॉल सेंटर से रिस्पॉन्स नहीं मिलने की परेशानी बताई। डबरा के सूखापाठा में करीब 15-20 किसान उर्वरक कूपन मिलने के बावजूद समिति प्रबंधक के नहीं पहुंचने से परेशान रहे। पीपुल्स समाचार की पहल के बाद सूखापाठा में मौजूद किसानों को खाद उपलब्ध कराई गई। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक 24 अगस्त तक ई-विकास 2.0 के माध्यम से 2.77 लाख टोकन जनरेट किए जा चुके थे और 1.71 लाख किसानों ने उर्वरक का उठाव कर लिया है। 20 से 25 अगस्त के बीच 300 से अधिक किसानों ने पीपुल्स समाचार को फोन कर खाद नहीं मिलने और ई-विकास 2.0 में आ रही दिक्कतों की जानकारी दी।
20 बीघा में धान, डीएपी और यूरिया के लिए परेशान किसान
भिंड जिले के गोहद ब्लॉक के ग्राम उरीखा निवासी गजेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने 20 बीघा में धान लगाया है। संयुक्त परिवार के पास करीब 250 बीघा जमीन है और परिवार को डीएपी और यूरिया की जरूरत है। उनका कहना है कि ई-विकास 2.0 में टोकन जनरेट नहीं हो रहा। समय पर खाद नहीं मिली तो खरीफ फसल प्रभावित हो सकती है और इसका असर अगली रबी फसल की तैयारी पर भी पड़ेगा। किसानों का कहना है कि पोर्टल की परेशानी के कारण खाद लेने की प्रक्रिया आसान होने के बजाय उनके लिए मुश्किल बन गई है।
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कहीं पोर्टल तो कहीं समिति स्तर पर परेशानी
बैतूल जिले के भैंसदेही निवासी रघुनाथ ने बताया कि खाद के लिए सोसायटी के चक्कर लगा रहे हैं। उन्हें पोर्टल पर अपनी जानकारी भरने में परेशानी हो रही है और शिकायत कॉल सेंटर में कोई रिस्पॉन्स नहीं मिल रहा। वहीं, तहसील डबरा के सूखापाठा निवासी धर्मेन्द्र सिंह परिहार ने बताया कि 24 अगस्त को करीब 15-20 किसान सुबह 10 बजे से सोसायटी के सामने खड़े थे। उर्वरक कूपन मिलने के बावजूद समिति प्रबंधक मौके पर नहीं पहुंचे और मोबाइल भी रिसीव नहीं कर रहे थे। इससे किसानों को खाद के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पीपुल्स समाचार की पहल के बाद किसानों को मिली खाद
पीपुल्स समाचार ने भोपाल में कृषि विभाग के अधिकारियों को किसानों की समस्या से अवगत कराया। इसके कुछ घंटे बाद सूखापाठा में मौजूद किसानों को खाद उपलब्ध कराई गई। धर्मेन्द्र सिंह ने खाद मिलने की जानकारी देते हुए पीपुल्स समाचार की पहल के लिए किसानों की ओर से आभार जताया। दरअसल, पीपुल्स समाचार ने 20 अगस्त को कृषि विभाग की ई-विकास 2.0 पोर्टल व्यवस्था से संबंधित जानकारी प्रकाशित की थी। समाचार में रिपोर्टर का मोबाइल नंबर भी प्रकाशित था, जिसके बाद किसानों ने उसी नंबर पर फोन कर अपनी समस्याएं बताना शुरू किया।
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प्रदेश में 65 लाख से अधिक किसान
समाचार में नंबर प्रकाशित होने के बाद औसतन प्रतिदिन 50-60 किसानों के फोन आने लगे। इनमें अधिकांश शिकायतें टोकन जनरेट नहीं होने, पोर्टल समझने में दिक्कत, मोबाइल नेटवर्क और खाद वितरण केंद्र पर परेशानी से संबंधित हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार प्रदेश में करीब 65 लाख किसान हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक 24 अगस्त तक ई-विकास 2.0 के माध्यम से 2.77 लाख टोकन जनरेट किए जा चुके थे और इनमें से 1.71 लाख किसानों ने उर्वरक का उठाव कर लिया है। किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए हेल्पलाइन उपलब्ध है और खरीफ की बुवाई पूरी हो चुकी है। विभाग का फोकस प्रत्येक किसान तक आवश्यकता के अनुसार उर्वरक पहुंचाने पर है। इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के सचिव निशांत वरवड़े ने कहा कि हर किसान तक खाद पहुंचाना लक्ष्य है।





















