PU Special :दोस्तों के बीच सबसे बड़ा गेमर कहलाने के चक्कर में 32 हजार हारा टीनएजर घर छोड़कर निकला, रेस्क्यू कर परिवार को सौंपा

पल्लवी वाघेला, भोपाल। मोबाइल की स्क्रीन पर गेम चल रहा था और हर हार के साथ रकम बढ़ती जा रही थी। करीब 32 हजार रुपए हार जाने के बाद 14 साल के किशोर के पास दो ही रास्ते थे या तो पेरेंट्स को सच बता दें या फिर सब छिपाने की कोशिश करे। ज्यादातर बच्चों की तरह उसने भी दूसरा रास्ता चुना और सच्चाई सामने आने के डर से घर छोड़ने का कदम उठा लिया। यह मामला है भोपाल के उच्च मध्यम परिवार के टीनएजर बच्चे का। दिल्ली की ओर जाते हुए बच्चे को आगरा क्षेत्र में चाइल्ड हेल्प लाइन टीम ने रेस्क्यू किया। यहां स्थानीय बाल कल्याण समिति ने बच्चे की काउंसलिंग की और अब बच्चा परिवार के साथ है। शहर के ख्यात प्राइवेट स्कूल के शिक्षक माता-पिता, हैरत में है कि उन्हें बच्चे के इतने बड़े कदम की भनक भी नहीं लगी। वहीं, मोबाइल गेम की लत के बच्चे किस कदर शिकार हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चाइल्ड हेल्पलाइन और आरपीएफ के आंकड़ों के मुताबिक मप्र में हर माह औसत चार बच्चे ऐसे रेस्क्यू होते हैं जो गेम की लत या पैसा हारने के कारण घर छोड़ने का कदम उठाते हैं।
हार से ज्यादा डर था हावी
जानकारी के मुताबिक जब बच्चे की काउंसलिंग की गई तो सामने आया कि उसे सबसे बड़ी चिंता इस बात की थी कि माता-पिता को जब 32 हजार रुपए के नुकसान की जानकारी होगी तो क्या होगा। यह डर धीरे-धीरे तनाव में बदलता गया और बात खुलने के डर से वह घर से भाग निकला। वहीं, बच्चे ने यह भी बताया कि वह अपने दोस्तों के बीच सबसे बड़ा गेमर कहलाना चाहता था। उसे लग रहा था बात खुलने पर घर में डांट पड़ेगी और दोस्तों के बीच हंसी उड़ेगी। उसने कहा कि जीतने के लिए वह और खेलना चाहता था, लेकिन पैसे का जुगाड़ नहीं हो पाया।
पहले भी आए हैं मामले
ऑनलाइन गेमिंग में पैसे गंवाने के बाद गंभीर कदम उठाने के मामले पहले भी सामने आए हैं। फरवरी 2026 में भोपाल के 14 वर्षीय बच्चे ने ऑनलाइन गेम में करीब 28 हजार रुपए गंवाने के बाद आत्महत्या कर ली थी। वहीं, बीते साल दिसंबर माह में भोपाल में सतना जिले के बच्चे को रेस्क्यू किया गया था। 12 साल के इस बच्चे ने पापा फोन से यूपीआई ट्रांजैक्शन कर मैसेज डिलीट कर दिया, लेकिन भेद खुला तो डांट पड़ने पर घर से भाग आया। बता दें, जानकारी के अनुसार बीते साल मप्र में ऐसे 41 मामले सामने आए थे।
डर और अपराध बोध होता है हावी
बच्चे को जब लगता है कि उसने ऐसी गलती कर दी है जिसे माता-पिता माफ नहीं करेंगे, तब वह समस्या का सामना करने के बजाय उससे भागने की कोशिश करता है। ऑनलाइन गेमिंग का आकर्षण केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहता। गेम में जीतने पर मिलने वाला रिवॉर्ड और हार के बाद रकम वापस जीतने की इच्छा बच्चे को बार-बार खेलने के लिए प्रेरित कर सकती है। जब आर्थिक नुकसान हो जाता है तो बच्चा शर्म, अपराध बोध और डर के बीच फंस जाता है। अभिभावक बच्चों को हमेशा यह बताएं कि नुकसान कितना भी बड़ा हो, बच्चा पहले उन्हें बताए। डांट या सजा के डर से समस्या छुपाने से तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
डॉ. दीप्ति सिंघल, साइकोलॉजिस्ट
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इन बातों का रखें ध्यान
- बच्चे के मोबाइल में गेम कौन से हैं, इसकी जानकारी रखें।
- गेमिंग अकाउंट में पैसे लगाने की सुविधा पर पैरेंटल कंट्रोल लगाएं।
- बैंक/यूपीआई और गेमिंग ऐप की पेमेंट व्यवस्था को बच्चों की पहुंच से अलग रखें।
- बच्चा अचानक चिड़चिड़ा, तनावग्रस्त या मोबाइल को लेकर अत्यधिक गोपनीय हो जाए तो बातचीत करें।
- गेम में पैसे हारने की बात सामने आए तो पहले बच्चे को सुरक्षित महसूस कराएं, बाद में गलती पर बात करें।





















