Djibouti Boat Accident: जिबूती से यमन जा रही 305 लोगों से भरी नाव पलटी, 109 की मौत और 116 लापता; मृतकों में 15 मासूम बच्चे भी शामिल

Djibouti के तट पर प्रवासियों से भरी नाव पलटने से बड़ा हादसा हुआ है। इस दुर्घटना में कम से कम 109 लोगों की मौत हो गई, जबकि 116 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। मृतकों में 15 बच्चे भी शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के मुताबिक, नाव Djibouti से यमन की ओर जा रही थी, तभी 8 और 9 अक्टूबर की दरमियानी रात समुद्र में पलट गई। हादसे के बाद 80 से ज्यादा लोगों को बचा लिया गया है और लापता लोगों की तलाश जारी है। इस घटना ने एक बार फिर बेहतर भविष्य और रोजगार की तलाश में समुद्री रास्तों से जोखिम भरी यात्रा करने वाले प्रवासियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैसे हुआ हादसा?
IOM से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह नाव अफ्रीका के Djibouti से यमन जा रही थी। यात्रा के दौरान नाव Djibouti के उत्तरी तटीय इलाके में गहरेह (Guhere) के पास पलट गई। यह इलाका ओबॉक शहर के उत्तर में स्थित है। हादसा 8 और 9 अक्टूबर की दरमियानी रात हुआ था। घटना की जानकारी जीवित बचे लोगों के बयानों के आधार पर सामने आई है।
अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन ने रविवार, 11 अक्टूबर को इस हादसे में हुई मौतों और लापता लोगों की जानकारी साझा की। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, नाव में सवार लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट में नाव में 305 लोगों के सवार होने की बात कही गई है, जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों में यह संख्या करीब 350 बताई गई है।
109 लोगों की मौत, मृतकों में 15 बच्चे
इस हादसे में अब तक 109 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। IOM के मुताबिक, मृतकों में पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। 52 पुरुषों की मौत, 42 महिलाओं की मौत, 15 बच्चों की मौत और 116 से ज्यादा लोग लापता के साथ ही 80 से ज्यादा लोगों की जान बचाई गई। मृतकों में नौ लड़कियां और छह लड़के शामिल बताए गए हैं। वहीं, हादसे में बचाए गए लोगों को राहत सहायता दी जा रही है। समुद्र में लापता लोगों की तलाश जारी है और अधिकारियों को आशंका है कि अभी कई लोगों का पता नहीं चल पाया है।
लापता लोगों की तलाश जारी, बचाव अभियान तेज
नाव पलटने के बाद Djibouti के अधिकारियों ने खोज और बचाव अभियान शुरू किया। IOM की टीमें भी स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर जीवित बचे लोगों को जरूरी सहायता उपलब्ध करा रही हैं। हादसे में बचाए गए लोगों के सामने भी कई चुनौतियां हैं। समुद्र में लंबे समय तक फंसे रहने के कारण उन्हें चिकित्सा सहायता, भोजन और दूसरी जरूरी सुविधाओं की आवश्यकता हो सकती है। IOM ने बताया कि उसकी टीम राहत कार्य में जुटी है और ओबॉक स्थित प्रवासी सहायता केंद्र में बचे लोगों की मदद की जा रही है। फिलहाल, सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों का पता लगाना है। समुद्र में समय बीतने के साथ बचाव अभियान और मुश्किल हो सकता है।
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आखिर Djibouti से यमन क्यों जाते हैं प्रवासी?
Djibouti पूर्वी अफ्रीका में स्थित है और यहां से बड़ी संख्या में प्रवासी समुद्री रास्ते के जरिए यमन तथा आगे खाड़ी देशों तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। इनमें से कई लोग रोजगार, बेहतर आर्थिक अवसर और सुरक्षित जीवन की तलाश में अपना घर छोड़ते हैं। IOM के मुताबिक, हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र से आने वाले कई प्रवासी Djibouti पहुंचने के बाद बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पार करके यमन जाने की कोशिश करते हैं। यह समुद्री रास्ता अफ्रीका और अरब प्रायद्वीप को जोड़ता है। हालांकि, इस रास्ते पर यात्रा करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। नावों में जरूरत से ज्यादा लोगों को बैठाना, समुद्री परिस्थितियां और यात्रा के दौरान सुरक्षा की कमी हादसों का खतरा बढ़ा सकती है। यमन में जारी अस्थिरता भी वहां पहुंचने वाले प्रवासियों के लिए मुश्किलें पैदा करती है।
IOM ने जताया दुख, प्रवासियों की सुरक्षा पर चिंता
अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन के Djibouti मिशन प्रमुख एलेक्जेंडर कोयसैक ने इस घटना को जान-माल का बेहद बड़ा नुकसान बताया। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि बेहतर आर्थिक अवसरों की तलाश में इस रास्ते से गुजरने वाले प्रवासियों को गंभीर खतरों का सामना करना पड़ता है। यह हादसा ऐसे समय सामने आया है, जब पूर्वी अफ्रीका से Djibouti के रास्ते प्रवासियों की आवाजाही जारी है। IOM के अनुसार, गरीबी, असुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव भी लोगों को जोखिम भरी यात्राएं करने के लिए मजबूर कर सकते हैं।
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पहले भी हो चुके हैं ऐसे दर्दनाक हादसे
Djibouti से यमन जाने वाला समुद्री मार्ग पहले भी कई जानलेवा हादसों का गवाह रहा है। IOM के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में इस मार्ग पर 900 से ज्यादा प्रवासियों की मौत हुई या वे लापता हो गए। मार्च 2026 में भी इसी क्षेत्र में एक नाव दुर्घटना में 9 लोगों की मौत हुई थी और 45 लोग लापता हो गए थे।
अब सबकी नजरें समुद्र में जारी खोज अभियान पर टिकी हैं। लापता लोगों का पता लगाने और जीवित बचे लोगों को जरूरी सहायता पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि सुरक्षित भविष्य की तलाश में जोखिम भरे समुद्री रास्तों पर निकलने वाले प्रवासियों के लिए सुरक्षा और मानवीय सहायता कितनी जरूरी है।



















