Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

US Execution Live Stream: अमेरिका में मौत की सजा का होगा लाइव प्रसारण? फोर्ट हुड हमले के दोषी निदाल हसन को 3 दिसंबर को मिलेगी सजा

अमेरिका में 2009 के फोर्ट हुड गोलीबारी मामले के दोषी निदाल मलिक हसन को 3 दिसंबर 2026 को फायरिंग स्क्वॉड से मौत की सजा देने की योजना है। पेंटागन ने सजा के लाइवस्ट्रीम की घोषणा की है।
US Execution Live Stream: अमेरिका में मौत की सजा का होगा लाइव प्रसारण? फोर्ट हुड हमले के दोषी निदाल हसन को 3 दिसंबर को मिलेगी सजा
फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर हुई गोलीबारी के दोषी निदाल मलिक हसन को फायरिंग स्क्वॉड यानी गोली मारकर मौत की सजा देने की तारीख तय

अमेरिका में मौत की सजा को लेकर एक ऐसा फैसला चर्चा में है, जिसने कानूनी, नैतिक और मानवाधिकार से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। साल 2009 में टेक्सास के फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर हुई गोलीबारी के दोषी निदाल मलिक हसन को फायरिंग स्क्वॉड यानी गोली मारकर मौत की सजा देने की तारीख तय की गई है। अमेरिकी सेना के अनुसार, यह सजा 3 दिसंबर 2026 को दी जानी निर्धारित है। इस मामले को और चर्चा में लाने वाली बात यह है कि पेंटागन ने प्रस्तावित सजा को सार्वजनिक रूप से लाइवस्ट्रीम करने की बात कही है। अगर यह योजना लागू होती है, तो यह अमेरिका में आधुनिक दौर में मौत की सजा के प्रसारण का बेहद असाधारण मामला होगा। इस घोषणा के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सरकार ऐसा क्यों करना चाहती है और क्या इस तरह की सजा को लाइव दिखाना कानूनी तथा नैतिक रूप से उचित है?

कब और कहां दी जाएगी निदाल मलिक हसन को सजा?

अमेरिकी सेना की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, निदाल मलिक हसन को टेक्सास स्थित फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर फायरिंग स्क्वॉड से मौत की सजा देने की तारीख तय की गई है। इस मामले से जुड़ी प्रमुख बातें-

  • तारीख: 3 दिसंबर 2026
  • समय: दोपहर 1 बजे सेंट्रल स्टैंडर्ड टाइम (CST)
  • स्थान: फोर्ट हुड, टेक्सास, अमेरिका
  • सजा का तरीका: फायरिंग स्क्वॉड
  • लाइवस्ट्रीम: पेंटागन ने प्रसारण की योजना की पुष्टि की है, लेकिन प्रसारण से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं का विवरण अभी स्पष्ट नहीं है। 

क्या है फोर्ट हुड गोलीबारी का पूरा मामला?

यह मामला 5 नवंबर 2009 का है। उस दिन टेक्सास के फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर एक मेडिकल सुविधा केंद्र में गोलीबारी हुई थी। इस हमले में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 32 अन्य घायल हुए थे। हमले का आरोपी निदाल मलिक हसन उस समय अमेरिकी सेना में मेजर और आर्मी साइकियाट्रिस्ट था। इस घटना ने पूरे अमेरिका को झकझोर दिया था। सैन्य अड्डे के भीतर हुई इस गोलीबारी के बाद सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य न्याय प्रणाली को लेकर भी चर्चा हुई। हसन को बाद में गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के दौरान लगी गोली के कारण वह आंशिक रूप से लकवाग्रस्त हो गया और व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने लगा। अगस्त 2013 में सैन्य अदालत की जूरी ने उसे हत्या और हत्या के प्रयास से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई। बाद में उसकी सजा और दोषसिद्धि के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया चली। अमेरिकी सेना के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अक्टूबर 2026 को मौत की सजा को मंजूरी दी, जिसके बाद सेना ने सजा की तारीख निर्धारित की।

ईरान युद्ध में अमेरिका के 81 फाइटर जेट और ड्रोन तबाह, इनमें F-35 और F-15 भी शामिल, 3.3 बिलियन डॉलर का झटका,

अमेरिका में मौत की सजा को लाइव दिखाने का फैसला क्यों?

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस सजा को सार्वजनिक रखने का समर्थन किया है। उनके मुताबिक, लोगों को यह देखने का अवसर मिलना चाहिए कि इस तरह के गंभीर अपराधों के परिणाम कितने कठोर हो सकते हैं। सरकार की ओर से सामने आए तर्कों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य अपराध की गंभीरता और उसके परिणामों को सार्वजनिक रूप से सामने लाना है। हालांकि, लाइवस्ट्रीम का अंतिम प्रारूप, दर्शकों की पहुंच और प्रसारण के नियमों से जुड़ी सभी जानकारियां अभी स्पष्ट नहीं हैं। इस फैसले की ऐतिहासिक अहमियत भी है। अमेरिका में आखिरी कानूनी सार्वजनिक फांसी 1936 में हुई थी। वहीं, फायरिंग स्क्वॉड से अमेरिकी सैन्य मौत की सजा का पिछला मामला 1945 का बताया जाता है। अगर यह सजा तय कार्यक्रम के अनुसार दी जाती है, तो यह अमेरिकी सैन्य इतिहास में एक असाधारण घटना होगी। 

लाइवस्ट्रीम पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

सरकार की घोषणा के बाद इस कदम की आलोचना भी हो रही है। सवाल यह है कि क्या मौत की सजा को दुनिया के सामने प्रसारित करना न्याय प्रक्रिया का हिस्सा माना जाना चाहिए या यह एक गंभीर सजा को तमाशे में बदलने का जोखिम पैदा करता है?

  • मानवीय गरिमा: क्या मौत की सजा का सार्वजनिक प्रसारण किसी व्यक्ति की गरिमा और मानवाधिकारों से जुड़े सवाल खड़े करता है?
  • बच्चों की पहुंच: इंटरनेट पर उपलब्ध प्रसारण तक कम उम्र के दर्शकों की पहुंच कैसे रोकी जाएगी?
  • मानसिक प्रभाव: हिंसक दृश्य देखने से कुछ लोगों पर गंभीर मनोवैज्ञानिक असर पड़ सकता है।
  • प्रसारण पर नियंत्रण: लाइव प्रसारण के दौरान संवेदनशील दृश्यों को रोकना या सीमित करना कितना संभव होगा?

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी इस तरह के प्रसारण से संभावित मानसिक परेशानी को लेकर चिंता जताई है। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि प्रसारण को चुनौती देने के लिए अदालतों में कानूनी रास्ते तलाशे जा सकते हैं। हालांकि, इससे सजा पर रोक लगेगी या नहीं, यह संबंधित कानूनी प्रक्रिया और अदालत के फैसले पर निर्भर करेगा।

हूतियों की ग्लोबल एयरलाइंस को आखिरी चेतावनी, कहा - सऊदी एयरस्पेस हमारा मिलिट्री टारगेट, रियाद एयरपोर्ट पर बैलिस्टिक मिसाइल दागी

क्या लाइवस्ट्रीम की योजना पर रोक लग सकती है?

इस सवाल का जवाब अभी निश्चित रूप से नहीं दिया जा सकता। रिपोर्टों के मुताबिक, हसन के पास कुछ कानूनी विकल्प हो सकते हैं, लेकिन प्रसारण को चुनौती देने का रास्ता और उसकी सफलता कई कानूनी पहलुओं पर निर्भर करेगी। इसके अलावा, लाइवस्ट्रीम की घोषणा का अर्थ यह नहीं है कि प्रसारण के हर तकनीकी और कानूनी पहलू को अंतिम रूप दे दिया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पेंटागन ने प्रसारण की योजना की पुष्टि की है, लेकिन इसे किस मंच पर और किन शर्तों के तहत दिखाया जाएगा, इस पर आगे जानकारी सामने आ सकती है। 

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...

Latest Posts