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लाल सागर में बड़ी जंग की आहट: हूतियों को रोकने के लिए सऊदी का मेगा प्लान, 1 लाख सैनिक तैनात होंगे

बाब अल-मंदेब पर हूतियों के कब्जे के बाद रियाद एक्शन मोड में, यमनी सेना करेगी लीड, सऊदी करेगा एयर सपोर्ट
लाल सागर में बड़ी जंग की आहट: हूतियों को रोकने के लिए सऊदी का मेगा प्लान, 1 लाख सैनिक तैनात होंगे
हूतियों को रोकने के लिए सऊदी का मेगा प्लान, 1 लाख सैनिक तैनात होंगे

रियाद। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब बड़े सैन्य ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक रियाद के पास दो प्लान हैं - पहला बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास सीमित तटीय हमला और दूसरा कई मोर्चों पर एक साथ बड़ी कार्रवाई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार यह सैन्य अभियान अगले कुछ हफ्तों में शुरू हो सकता है। इस ऑपरेशन को यमनी सेना लीड करेगी, जबकि सऊदी अरब की वायुसेना उन्हें हवाई हमलों से कवर देगी। रिपोर्ट में छह सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ऑपरेशन के दायरे के हिसाब से एक लाख से अधिक यमनी सैनिकों की तैनाती की जा सकती है। हालांकि हमले की फाइनल तारीख अभी तय नहीं हुई है।

अमेरिकी चुनावों से पहले हो सकती है कार्रवाई

माना जा रहा है कि यह कार्रवाई एक हफ्ते के भीतर या अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद शुरू हो सकती है। सूत्रों का कहना है कि इस ऑपरेशन का मुख्य मकसद हूतियों की हालिया बढ़त को खत्म करना है। पिछले महीने हूती गुट ने लाल सागर तट पर तेजी से आगे बढ़ते हुए रणनीतिक रूप से अहम बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर कब्जा कर लिया था।बाब अल-मंदेब लाल सागर का दक्षिणी प्रवेश द्वार है और भूमध्य सागर से एशिया तक जाने वाले जहाजों के लिए सबसे अहम रूट है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के साथ तनाव के कारण इसके बंद होने के बाद इस रास्ते की अहमियत और भी बढ़ गई है।

2015 के ऑपरेशन से छोटा होगा

सऊदी अरब में अमेरिका के पूर्व राजदूत माइकल रैटनी ने कहा कि यह ऑपरेशन 2015 के सऊदी हस्तक्षेप से काफी छोटा होगा। उन्होंने कहा कि आदर्श रूप में यह तटीय इलाकों को वापस लेने और समुद्री आवाजाही को बहाल करने तक सीमित रहेगा। इससे साफ है कि रियाद का फोकस पूरे यमन पर नहीं, बल्कि लाल सागर तट को सुरक्षित करने पर है।

सऊदी के सामने जमीनी चुनौतियां

रियाद के लिए सबसे बड़ी मुश्किल जमीनी लड़ाई लड़ने वाली सेना है। यह कोई एकीकृत सेना नहीं है, बल्कि अलग-अलग गुटों का गठबंधन है, जिन्हें सऊदी अरब और यूएई ने हथियार और ट्रेनिंग दी है। इन गुटों के अपने अलग राजनीतिक और क्षेत्रीय एजेंडे हैं। यमन मामलों के विशेषज्ञ मोहम्मद अलबाशा के अनुसार, कई गुट अभी भी हूतियों के खिलाफ एक साथ कई मोर्चों पर लगातार हमले करने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। पिछली सर्दियों में हूती-विरोधी खेमे में दरार भी दिखी थी, जब यूएई समर्थित दक्षिणी लड़ाकों और सऊदी समर्थित बलों के बीच पूर्वी यमन में इलाके पर कब्जे को लेकर झड़प हो गई थी।

ऑफेंसिव मोड में होंगी सऊदी सेनाएं

सऊदी समर्थक राजनीतिक विश्लेषक अली शिहाबी के मुताबिक इस ऑपरेशन का पूरा नतीजा लोकल फोर्सेज के प्रदर्शन पर टिका होगा, क्योंकि जमीनी लड़ाई अब डिफेंसिव मोड से निकलकर ऑफेंसिव मोड में जा रही है।

सऊदी के सहयोगी क्या कर रहे हैं

यमन में सऊदी अरब के सहयोगी देश सीधे जंग में उतरने के बजाय बैक एंड से मदद कर रहे हैं। वे रियाद को खुफिया जानकारी, हथियार और डिफेंसिव सपोर्ट दे रहे हैं। सऊदी का सबसे करीबी सहयोगी अमेरिका इस ऑपरेशन में मिलिट्री एडवाइजर और इंटेलिजेंस सपोर्ट दे रहा है। इसमें सऊदी एयरफोर्स के लिए टारगेट से जुड़ी सटीक जानकारी भी शामिल है, ताकि हवाई हमले ज्यादा असरदार हो सकें।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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