हनीट्रैप केस :छत्तीसगढ़ के DIG स्तर के अफसर का भी वीडियो बनाने का दावा, भोपाल में होती थी श्वेता-रेशू की मुलाकात, इंदौर होटल में अफसर से संपर्क की चर्चा

इंदौर के चर्चित हनीट्रैप-2026 मामले में क्राइम ब्रांच ने बड़ा खुलासा करते हुए सागर की भाजपा नेत्री रेशू चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि रेशू चौधरी कथित तौर पर नेताओं, अफसरों और कारोबारियों के आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का हिस्सा बनी हुई थी। पुलिस के मुताबिक रेशू, हनीट्रैप मामले की मुख्य आरोपी श्वेता विजय जैन की करीबी सहयोगी है। आरोप है कि गैंग हाईप्रोफाइल लोगों को जाल में फंसाकर उनके वीडियो रिकॉर्ड करता था और बाद में मोटी रकम की वसूली की जाती थी।
शराब कारोबारी मामले में हुई एंट्री
शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान उर्फ चिंटू ठाकुर को धमकाने और ब्लैकमेलिंग के मामले में मंगलवार को रेशू चौधरी का नाम सामने आया था। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने पूछताछ कर उसे गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि 2019 के चर्चित हनीट्रैप कांड के बाद श्वेता जैन ने रेशू को अपने नेटवर्क में शामिल किया था। इसी दौरान जेल में अलका दीक्षित से श्वेता की दोस्ती हुई थी।
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छत्तीसगढ़ में पदस्थ DIG स्तर के अधिकारी
छत्तीसगढ़ में पदस्थ एक DIG स्तर के अधिकारी तक भी इसकी पहुंच बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार भाजपा नेत्री रेशू चौधरी ने कथित तौर पर इंदौर के एक होटल में मुलाकात के दौरान अधिकारी का वीडियो तैयार किया था। हालांकि पुलिस ने अब तक किसी अफसर के नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन मोबाइल से रिकवर ऑडियो-वीडियो और चैट्स ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि रेशू चौधरी और श्वेता विजय जैन की मुलाकातें अक्सर भोपाल में होती थीं, जहां से पूरे नेटवर्क की रणनीति तैयार होती थी। सागर में रहने वाली रेशू पार्टी और शासकीय कामकाज के बहाने लगातार बड़े नेताओं और अफसरों तक पहुंच बना रही थी। फर्राटेदार अंग्रेजी और हाईप्रोफाइल अंदाज के कारण वह जल्दी भरोसा जीत लेती थी, जिसके बाद कथित तौर पर खुफिया कैमरों और मोबाइल रिकॉर्डिंग का खेल शुरू होता था।
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जेल से शुरू हुआ नेटवर्क
पुलिस सूत्रों के अनुसार श्वेता कोर्ट पेशी के दौरान रेशू को साथ लेकर अलका दीक्षित से मिलने जाती थी। वहीं से पूरे नेटवर्क का विस्तार शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि महत्वाकांक्षी रेशू ने दावा किया था कि उसके संपर्क कई नेता, प्रॉपर्टी कारोबारी, शराब व्यवसायी, फाइनेंसर और अफसरों से हैं, जिन्हें आसानी से फंसाया जा सकता है इसके बाद श्वेता और अलका ने मिलकर उसे आगे बढ़ाया और कथित तौर पर कई लोगों के वीडियो तैयार किए गए।
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विदेश में पढ़ी, फिर बनी हाईप्रोफाइल नेटवर्क का हिस्सा
डीसीपी (क्राइम) राजेश त्रिपाठी के अनुसार 32 वर्षीय रेशू चौधरी हाईप्रोफाइल लाइफस्टाइल जीती थी और विदेश में पढ़ाई कर चुकी है। कुछ समय पहले उसका तलाक हुआ था।पुलिस का दावा है कि भाजपा से जुड़ने के बाद रेशू नेताओं और अफसरों के करीब पहुंचकर प्रभाव और पैसे कमाना चाहती थी। अलका के संपर्क में आने के बाद उसने कथित तौर पर खुफिया कैमरों का इस्तेमाल शुरू कर दिया।
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सांसदों और अफसरों तक पहुंच
जांच एजेंसियों के अनुसार रेशू ने निमाड़ और दिल्ली के कई नेताओं व जनप्रतिनिधियों से संपर्क बनाए थे। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि एक विधायक का वीडियो कथित तौर पर कांग्रेस नेता तक पहुंचाया गया था। सूत्रों का दावा है कि रेशू ने छत्तीसगढ़ में पदस्थ एक डीआईजी स्तर के अधिकारी का वीडियो भी रिकॉर्ड किया था। बताया जा रहा है कि यह मुलाकात इंदौर के एक होटल में हुई थी।
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मोबाइल डेटा खंगाल रही पुलिस
क्राइम ब्रांच अब आरोपियों के मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट, ऑडियो-वीडियो और अन्य डिजिटल डेटा की जांच कर रही है। साइबर और फोरेंसिक एक्सपर्ट की मदद ली जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आपत्तिजनक सामग्री किन-किन लोगों को भेजी गई थी। जांच में और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
प्रधान आरक्षक से भी पूछताछ जारी
मामले में इंटेलिजेंस शाखा में पदस्थ प्रधान आरक्षक विनोद शर्मा से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस के अनुसार उसके मोबाइल की भी जांच की जा रही है। आरोप है कि उसके पास भी वीडियो और फोटो फॉरवर्ड किए गए थे। पुलिस ने आरोपियों पर षड्यंत्र की धाराएं भी बढ़ा दी हैं।
नोट -- खबर सूत्रों के हवाले से हैं












