मंत्री प्रतिमा बागरी जाति प्रमाण पत्र केस :राज्य स्तरीय छानबीन समिति के सामने प्रदीप अहिरवार के बयान दर्ज

भोपाल। प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र केस में बुधवार को अनुसूचित जाति कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति के समक्ष साक्ष्यों एवं दस्तावेजों के साथ बयान दर्ज कराए। इस दौरान उन्होंने समिति के समक्ष दावा किया कि राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र पूर्णतः फर्जी है और इसे तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाना चाहिए।
आरोप-नियमों के विरुद्ध बना प्रमाण पत्र
प्रदीप अहिरवार ने समिति के सदस्यों सचिव ई. रमेश सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे, के समक्ष तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि प्रतिमा बागरी का परिवार वर्ष 1950 की संवैधानिक स्थिति के अनुसार अनुसूचित जाति वर्ग में नहीं आता है। इसलिए उनका जाति प्रमाण पत्र नियमों के विपरीत जारी किया गया है।
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हाईकोर्ट के निर्देश पर दर्ज किए गए बयान
अहिरवार ने कहा कि वे एक वर्ष पूर्व मामले की शिकायत राज्य स्तरीय छानबीन समिति को की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने जबलपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। इसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिए थे कि 60 दिनों के भीतर मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र मामले में निर्णय लिया जाए। कोर्ट के निर्देश के बाद इस मामले में कार्रवाई तेज हुई है।
दावा-बुंदेलखंड, विंध्य में बागरी सामान्य जाति वर्ग
प्रदीप अहिरवार ने आरोप लगाया कि बुंदेलखंड एवं विंध्य क्षेत्र, विशेषकर विंध्य क्षेत्र में बागरी जाति सामान्य वर्ग की राजपूत जाति मानी जाती है। उन्होंने कहा कि प्रतिमा बागरी राजपूत समाज से संबंधित हैं, लेकिन उन्होंने अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सतना जिले की रैगांव विधानसभा सीट से, जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, चुनाव लड़ा । उन्होंने मांग की कि संविधान एवं कानून के प्रावधानों के तहत शीघ्र निर्णय लेते हुए बागरी का जाति प्रमाण पत्र निरस्त किया जाए, ताकि अनुसूचित जाति वर्ग के वास्तविक अधिकारों की रक्षा हो सके। अहिरवार ने 418 पेज की विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत किया जिसमें जनगणना विभाग के आंकड़े, जिला गजेटियर न्यायालयों के कई आदेश, कलेक्टरों के आदेश सहित अन्य दस्तावेज शामिल हैं।
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