कैदी की मौत की जांच को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

इंदौर। धार जिला जेल में कैदी की संदिग्ध मौत के मामले में न्यायिक जांच रिपोर्ट को चुनौती देने वाली याचिका हाई कोर्ट ने खारिज कर दी। जेल अधीक्षक राजाराम दांगी, डॉ. कमलेश कुमार सहित अन्य ने न्यायिक जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। मामला धार जिला जेल में दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहे कैदी भेरूलाल मारू की मौत से जुड़ा है। उसकी 27 फरवरी 2023 को जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। घटना के बाद मामले की न्यायिक जांच कराई गई।
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जांच रिपोर्ट में सामने आया कि जेल में तलाशी के दौरान प्रतिबंधित सामग्री मिलने के संदेह में कैदी के साथ मारपीट की गई थी। इसमें उसे गंभीर चोटें आईं। जांच में इन चोटों को उसकी मौत का कारण माना गया। रिपोर्ट में जेल में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ डॉक्टरों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे। इसके बाद जेल अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
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जेल अधिकारियों ने दी थी चुनौती
न्यायिक जांच रिपोर्ट और एफआईआर को चुनौती देते हुए जेल अधीक्षक राजाराम दांगी, डॉ. कमलेश कुमार सहित अन्य ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका पक्ष था कि जांच रिपोर्ट में कानूनी खामी है। मामले में मृतक कैदी के पिता बगदीराम की ओर से एडवोकेट आकाश राठी ने पैरवी की।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक जांच रिपोर्ट में ऐसी कोई कानूनी कमी, अधिकार क्षेत्र से जुड़ी गलती या मनमानी नहीं है, जिसके आधार पर रिपोर्ट को रद्द किया जा सके।
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कोर्ट ने यह भी कहा कि जेएमएफसी ने कानून के तहत मिले अधिकारों के अनुसार कार्रवाई की है। मामले में दर्ज एफआईआर हिरासत में हिंसा और सबूतों से छेड़छाड़ जैसे गंभीर शुरुआती निष्कर्षों के आधार पर दर्ज की गई है। ऐसे में आपराधिक जांच की प्रक्रिया को शुरुआती स्तर पर रोकना उचित नहीं है।












