Peoples Update Special :दानिश हिल्स की पहाड़ी पर बढ़ा लैंडस्लाइड का खतरा! दरक रही जमीन, रिटेनिंग वॉल में चौड़ी दरारें, रहवासियों में दहशत

शाहिद खान, भोपाल। ग्वालियर में पहाड़ी पर बनी रिटेनिंग वॉल गिरने से हुए हादसे के बाद अब भोपाल की दानिश हिल्स पहाड़ी भी चिंता का विषय बन गई है। कोलार स्थित दानिश हिल्स में लगातार बारिश के बीच पहाड़ी की जमीन दरक रही है और रिटेनिंग वॉल में चौड़ी होती दरारें संभावित लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते तकनीकी जांच और सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो बड़ा हादसा हो सकता है।
200 फीट ऊंची पहाड़ी पर बढ़ रहा खतरा
दानिश हिल्स की करीब 200 फीट ऊंची पहाड़ी को काटकर सीढ़ीनुमा प्लॉटिंग की गई है। पहाड़ी को संभालने के लिए बनाई गई 25 से 30 फीट ऊंची रिटेनिंग (कर्टन) वॉल के कई हिस्सों में अब 1 से 2 फीट तक चौड़े गैप दिखाई देने लगे हैं। दीवार और पहाड़ी के बीच बढ़ती दूरी यह संकेत दे रही है कि ढलान कमजोर हो रही है। सबसे चिंता की बात यह है कि जिस हिस्से में दरारें दिखाई दे रही हैं, वहीं लगातार नए मकानों का निर्माण जारी है। वर्तमान में यहां 20 से अधिक मकान बन चुके हैं, जबकि 15 से ज्यादा मकानों का निर्माण चल रहा है।
लगातार बारिश से बढ़ रही लैंडस्लाइड की आशंका
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण मिट्टी में नमी बढ़ने से पहाड़ी की पकड़ कमजोर हो जाती है। यदि पानी की निकासी सही नहीं हो तो ढलान अचानक खिसक सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बारिश के दौरान उन्हें अपने घरों की सुरक्षा को लेकर डर बना रहता है।
विशेषज्ञ ने बताई सबसे बड़ी तकनीकी खामी
जियोटेक्निकल इंजीनियर डॉ. एचएस शर्मा ने बताया कि बारिश का पानी दरारों के माध्यम से मिट्टी के भीतर पहुंचता है, जिससे मिट्टी की आपसी पकड़ कमजोर हो जाती है और पहाड़ी का वजन बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि कर्टन वॉल में पानी निकासी के लिए आवश्यक वीप होल (Drainage Holes) नहीं बनाए गए हैं। इससे पानी बाहर नहीं निकल पा रहा और पूरा दबाव सीधे रिटेनिंग वॉल पर पड़ रहा है। डॉ. शर्मा के अनुसार, यदि रिटेनिंग वॉल के पीछे गैप बन रहा है और जमीन में चौड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं तो यह सामान्य स्थिति नहीं है। ऐसे में तत्काल जियोटेक्निकल जांच, स्लोप स्टेबिलिटी टेस्ट और स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाना चाहिए। बिना वैज्ञानिक जांच के ऊपर अतिरिक्त निर्माण कराना जोखिम को और बढ़ा सकता है।
प्रशासन से उठे चार बड़े सवाल
इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रमुख सवाल हैं-
- क्या इस पहाड़ी पर प्लॉटिंग से पहले जियोटेक्निकल जांच कराई गई थी?
- क्या ढलान की क्षमता का परीक्षण करने के बाद ही निर्माण की अनुमति दी गई?
- रिटेनिंग वॉल में आई दरारों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कब कराया जाएगा?
- बारिश के मौसम में यहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं?
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स्थानीय लोगों ने जताई गंभीर चिंता
राघवेंद्र सिंह ने कहा कि पहाड़ी को प्राकृतिक स्वरूप में छोड़ने के बजाय बड़े पैमाने पर काटकर सीढ़ीनुमा प्लॉटिंग की गई। अब उसी हिस्से में दरारें दिखाई दे रही हैं। हर बारिश में मिट्टी खिसकने का डर बना रहता है। उन्होंने पूरे क्षेत्र का तकनीकी सर्वे कराने की मांग की।
अनूप श्रीवास्तव का कहना है कि प्लॉट बेचने के लिए जिस तरह पहाड़ी काटी गई, उसका असर अब साफ दिखाई दे रहा है। रिटेनिंग वॉल के पास जमीन फट रही है और कई जगह गैप बन गया है। बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता और पहाड़ी की स्थिरता की जांच कराने की मांग की।
अमित शर्मा ने कहा कि पहाड़ी पर पहले ऐसी स्थिति नहीं थी। प्लॉटिंग और सड़क निर्माण के बाद हालात बदले हैं। जहां-जहां कटिंग हुई, वहीं दरारें उभर रही हैं। समय रहते विशेषज्ञों से जांच नहीं कराई गई तो भविष्य में बड़ा नुकसान हो सकता है।
प्रशांत जैन ने कहा कि सीढ़ीनुमा प्लॉटिंग के बाद बनाई गई रिटेनिंग वॉल के पास अब मिट्टी खिसकने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। ऊपर लगातार निर्माण होने से पहाड़ी पर अतिरिक्त भार बढ़ रहा है, जिससे खतरा और गंभीर हो गया है।
रहवासियों की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दानिश हिल्स की पूरी पहाड़ी का तत्काल सुरक्षा ऑडिट, जियोटेक्निकल सर्वे, स्लोप स्टेबिलिटी टेस्ट और स्ट्रक्चरल जांच कराई जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक पहाड़ी पर नए निर्माण और प्लॉटिंग पर रोक लगाने की भी मांग की गई है।












