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संघर्ष से सफलता की कहानी!पिता बेचते हैं फुटपाथ पर स्कूल बैग, बेटे ने NEET पास कर पूरा किया डॉक्टर बनने का सपना

जबलपुर के ओम चौकसे ने आर्थिक तंगी के बावजूद पहली कोशिश में NEET परीक्षा पास कर सफलता हासिल की। फुटपाथ पर स्कूल बैग बेचने वाले पिता के बेटे ओम ने 12वीं में टॉप-10 में जगह बनाई थी। दादी की मौत के बाद डॉक्टर बनने का सपना देखा और अब उसे पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया।
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पिता बेचते हैं फुटपाथ पर स्कूल बैग, बेटे ने NEET पास कर पूरा किया डॉक्टर बनने का सपना
NEET पास कर ओम ने किया माता-पिता का नाम रोशन

जबलपुर के रहने वाले ओम चौकसे ने मेहनत, लगन और लगातार पढ़ाई के दम पर वह मुकाम हासिल किया है, जो हजारों छात्रों का सपना होता है। बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले ओम ने पहली ही कोशिश में NEET परीक्षा पास कर अपने माता-पिता का सपना पूरा कर दिया। उनकी सफलता अब पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

फुटपाथ पर बैग बेचते हैं पिता

ओम के पिता स्कूल के बाहर फुटपाथ पर स्कूल बैग की छोटी-सी दुकान लगाते हैं। इसी दुकान की कमाई से पूरे परिवार का खर्च चलता है। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने कभी ओम की पढ़ाई में कमी नहीं आने दी।

12वीं में भी बनाया था टॉप-10 में स्थान

ओम पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहे हैं। उन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा में मध्य प्रदेश के टॉप-10 छात्रों में जगह बनाई थी। इसके बाद उन्होंने पूरी मेहनत से NEET की तैयारी की और पहली कोशिश में सफलता हासिल कर ली।

NEET में हासिल किए 521 अंक

ओम ने NEET परीक्षा में 720 में से 521 अंक हासिल किए। इससे पहले हुई परीक्षा में उन्होंने 625 अंक प्राप्त किए थे, लेकिन पेपर लीक की घटना के कारण उन्हें निराशा का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और तैयारी जारी रखी।

NEET

मॉडल स्कूल से की पढ़ाई

ओम ने अपनी स्कूली शिक्षा मॉडल स्कूल से पूरी की। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया और हर चुनौती का डटकर सामना किया।

दादी की मौत के बाद लिया डॉक्टर बनने का संकल्प

ओम बताते हैं कि उनकी दादी की हार्ट अटैक से मौत ने उन्हें गहरा झकझोर दिया था। उसी दिन उन्होंने तय किया कि वह डॉक्टर बनेंगे, ताकि जरूरतमंद लोगों का समय पर इलाज कर सकें और किसी परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े।

पहले पिता की दुकान, फिर स्कूल

ओम का संघर्ष उनकी दिनचर्या में भी दिखाई देता है। वह रोज सुबह सबसे पहले अपने पिता की दुकान खोलने में मदद करते थे। इसके बाद स्कूल जाते और शाम को लौटकर फिर दुकान बंद कराने में हाथ बंटाते थे। पढ़ाई और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाकर उन्होंने यह सफलता हासिल की।

संघर्ष और मेहनत से बदली किस्मत

ओम चौकसे की कहानी बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो आर्थिक तंगी भी सफलता की राह नहीं रोक सकती। उनकी मेहनत और लगन आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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