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सिवनी जिला अस्पताल के SNCU में 6 महीने में 80 नवजातों की मौत, जांच शुरू

सिवनी जिला अस्पताल के SNCU में 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच भर्ती 1088 नवजातों में से 80 की मौत हुई। CMHO डॉ. पंकज दुबे के अनुसार, मामले की जांच में संबंधित अधिकारियों के साथ मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर को भी शामिल किया गया है।

सिवनी जिला चिकित्सालय की स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में छह महीने के दौरान 80 नवजात शिशुओं की मौत का मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. पंकज दुबे के अनुसार, 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से कुल 1,088 नवजात शिशुओं को SNCU में भर्ती कराया गया था। इनमें से 1,008 बच्चों की हालत में सुधार हुआ, जबकि 80 नवजातों की मौत हो गई।

6 महीने में 1,088 नवजात हुए भर्ती

CMHO डॉ. पंकज दुबे ने बताया कि SNCU में भर्ती किए गए नवजातों में से 1,008 बच्चों को उपचार के बाद स्वस्थ होने पर छुट्टी दी गई। इस अवधि में 80 नवजातों की मौत दर्ज की गई। कुल भर्ती बच्चों के मुकाबले यह आंकड़ा करीब 7.35 प्रतिशत है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मामले की जांच का उद्देश्य नवजातों की मौत के कारणों को समझना और उपचार तथा देखभाल की व्यवस्था में संभावित कमियों की पहचान करना है।

गंभीर संक्रमण और समय से पहले जन्मे बच्चों पर फोकस

जांच में जन्म के 28 दिन से कम उम्र के उन नवजातों के मामलों की पड़ताल की जा रही है, जिनकी हालत गंभीर थी और उपचार के दौरान मौत हुई। इनमें कम वजन वाले, समय से पहले जन्मे और सेप्टीसीमिया सहित गंभीर संक्रमणों से पीड़ित बच्चे शामिल हैं। जांच के लिए संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर को भी शामिल किया गया है। जांच के दौरान नवजातों की बीमारी, उनकी गंभीर स्थिति, उपलब्ध उपचार और देखभाल से जुड़े पहलुओं की समीक्षा की जाएगी।

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जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई

CMHO डॉ. पंकज दुबे ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी सामने आने के बाद नवजातों के उपचार, देखभाल और मृत्यु से जुड़े कारणों की पड़ताल की जा रही है। जांच का मकसद व्यवस्था में मौजूद कमियों का पता लगाकर उन्हें दूर करना है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई और सुधारात्मक उपाय तय किए जाएंगे। गंभीर नवजातों के उपचार में विशेष सतर्कता बरतने और उनकी देखभाल की व्यवस्था बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

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