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भोपाल। भाजपा और कांग्रेस विधानसभा चुनाव में मिले वोटों के आधार पर अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव की रणनीति तैयार कर रहे हैं। अगर हम आंकड़ों पर नजर डालें तो विधानसभा चुनाव में बीएसपी और कांग्रेस के वोटों में कटौती हुई है, ये वोट भाजपा की झोली में गए हैं जिसके चलते पार्टी की बंपर जीत हुई है। पिछले चुनाव में जहां बीएसपी तीसरे स्थान पर और भाजपा दूसरे स्थान पर थी वहीं इस चुनाव में औसतन 20 हजार से अधिक वोटों से लीड लेकर भाजपा जीती है। जबकि कांग्रेस की जीत और भाजपा के हार का अंतर कम वोटों से है। प्रदेश के करीब 80 सीटों पर बसपा, सपा और गोंगपा तीसरे स्थान पर रही है। आधा दर्जन सीटों पर तो सपा, बसपा दूसरे नम्बर पर ही हैं। हालांकि गोंगपा ने बीएसपी के साथ चुनाव लड़ा था। बीएसपी की सबसे बेहतर स्थिति उत्तर प्रदेश की सीमा से लगी विधानसभा सीटों पर रही है ।
वहीं आदिवासी बहुल क्षेत्रों में गोंगपा का प्रभाव देखने को मिला है। इन क्षेत्र में 21 सीटों पर भाजपा और कांग्रेस जीती और गोंगपा तीसरे स्थान पर रही है। इन सीटों में भाजपा और कांग्रेस के बीच में जीत हार का अंतर दस हजार से कम रहा है। रतलाम जिले की सैलाना सीट पर भाजपा तीसरे नंबर पर रही। यहां भारत आदिवासी पार्टी के कमलेश्वर डोडियार जीते। दूसरे नंबर पर कांग्रेस के हर्ष विजय गहलोत रहे। भाजपा की संगीता चारेल तीसरे स्थान पर रहीं। इसके अलावा 70 से ज्यादा राजनीतिक पार्टियां ऐसी हैं जिनका वोटिंग प्रतिशत शून्य हैं। इन्हें इतने कम वोट मिले कि प्रतिशत ही काउंट नहीं हो सका।
प्रदेश के 230 विधानसभा सीटों पर बीएसपी और गोंगपा ने मिलकर चुनाव लड़ा था। दोनों ही पार्टियों को 18 लाख से अधिक वोट मिले हैं जबकि निर्दलीय, बीएसपी और गोंगपा को उतने वोट मिले हैं, जितना भाजपा और कांग्रेस के कुल वोटों का अंतर है। बीएसपी और निर्दलियों को चार-चार और गोंगपा को एक फीसदी के आस पास वोट मिले हैं। बैलेट पेपर में इन पार्टियों के वोट का हिस्सा बहुत कम रहा है। बीएसपी को आठ हजार कर्मचारियों ने वोट दिया है।
कर्मचारियों के ज्यादा वोट कांग्रेस को मिले हैं। भाजपा को एक लाख 22 हजार और कांग्रेस को एक लाख 93 हजार से अधिक वोट कर्मचारियों के मिले हैं। पिछले चुनाव में भी करीब करीब इसी अनुपात में कर्मचारियों के वोट भाजपा और कांग्रेस को मिले थे।
विधानसभा चुनाव में 50 से अधिक राजनीतिक दलों ने चुनाव मैदान में अपने प्रत्याशी उतारे थे। 40 से अधिक दलों के प्रत्याशी एक हजार से कम वोटों में ही ढेर हो गए ।
(इनपुट-अशोक गौतम)