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Bhagvad Gita In Trainingमप्र में अब पुलिस की ट्रेनिंग में पढ़ाई जाएगी भगवद्गीता

एडीजी राजा बाबू सिंह ने सभी प्रशिक्षु कांस्टेबल के लिए भगवदगीता का सत्र शुरू करने के दिए निर्देश
मप्र में अब पुलिस की ट्रेनिंग में पढ़ाई जाएगी भगवद्गीता
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। मध्यप्रदेश में अब पुलिस की ट्रेनिंग ले रहे युवाओं को भगवदगीता के संदेश भी सिखाए जाएंगे। पुलिस की प्रशिक्षण शाखा ने अपने सभी केंद्रों को रंगरूटों के लिए अब भगवद्गीता पाठ का सत्र आयोजित करने का निर्देश दिया है। इसके पीछे वजह यह बताई गई है कि भगवदगीता से उन्हें ‘नेक' जीवन जीने में मदद मिलेगी। यह निर्देश अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी, प्रशिक्षण) राजा बाबू सिंह ने राज्य के सभी आठ प्रशिक्षण स्कूलों के अधीक्षकों को जारी किया है। इन केंद्रों में कांस्टेबल पद के लिए चयनित लगभग 4,000 युवक और युवतियां जुलाई से नौ महीने का प्रशिक्षण ले रहे हैं।

    भगवद्गीता हमारा शाश्वत ग्रंथ

    वर्ष 1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी राजा बाबू सिंह ने ट्रेनिंग सेंटर के संचालकों से कहा कि अगर हो सके तो अभी चल रहे भगवान कृष्ण से जुड़े पवित्र महीने (अगहन कृष्ण) के दौरान भगवद्गीता का कम से कम एक अध्याय पढ़ने से जुड़ी पहल शुरू करें। उन्होंने निर्देश दिया कि यह प्रशिक्षण लेने वालों के रोजाना के ध्यान सत्र से ठीक पहले किया जा सकता है। एडीजी ने प्रशिक्षण केंद्रों को अपने संदेश में कहा, 'भगवद्गीता हमारा शाश्वत ग्रंथ है। इसका नियमित पाठ निश्चित रूप से हमारे प्रशिक्षण लेने वालों को एक नेक जीवन जीने में मार्गदर्शन करेगा और उनका जीवन बेहतर होगा।' राजा बाबू सिंह ने वर्ष 2019 के आसपास ग्वालियर रेंज के पुलिस प्रमुख के रूप में काम करते हुए इसी तरह का एक अभियान शुरू किया था और कई स्थानीय जेल कैदियों और अन्य लोगों में भगवद्गीता की प्रतियां बांटी थीं।

    दे चुके हैं रामचरित मानस के पाठ का संदेश

    एडीजी राजा बाबू सिंह ने जुलाई में पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में सत्र का उद्घाटन करते समय इन संस्थानों में रामचरितमानस का पाठ करने का निर्देश दिया था और कहा था कि इससे उनमें अनुशासन आएगा। रामचरितमानस में भगवान राम के गुणों और जंगल में उनके 14 साल के वनवास का वर्णन है। रामचरित मानस पढ़ने के समय राजा बाबू सिंह ने कहा था कि भगवान राम ने 14 साल का वनवास स्वीकार किया था। भगवान जब माता-पिता की आज्ञा मानने के लिए 14 साल वन में रह सकते हैं तो आप अपने ट्रेनिंग के लिए घर-परिवार से दूर नहीं रह सकते। आप भगवान राम के जीवन को देखिए, रावण से लड़ने के लिए वानरों की सेना तैयार की और लंका पर विजय प्राप्त की। मेरा सुझाव है कि जो नए आरक्षक हैं वो रोज सोने से पहले रामचरितमानस का पाठ करें। दरअसल ट्रेनिंग ले रहे कांस्टेबल्स ने अपने घर के पास वाले ट्रेनिंग स्कूल के लिए आवेदन किए थे। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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