Aakash Waghmare
6 Feb 2026
इंदौर। ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन के ग्रेन-एक्स इंडिया प्रदर्शनी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का फूड बॉस्केट बन चुका है और अब इसे कृषि, दलहन उत्पादन और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसान, उद्योग और व्यापार को एक साथ जोड़कर विकास का नया मॉडल तैयार कर रही है। किसान कल्याण वर्ष में किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए नीतिगत फैसले लगातार लिए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दाल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए तुअर पर मंडी टैक्स हटा दिया गया है, जिससे दाल मिल उद्योग को सीधा लाभ मिलेगा। उड़द और मसूर पर भी राहत देने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने दालों के पोषण महत्व पर जोर देते हुए कहा कि दालें भारतीय शाकाहारी संस्कृति में प्रोटीन का सबसे बड़ा स्रोत हैं और यह गर्व की बात है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उत्पादक और उपभोक्ता देश है। प्रदेश में दूध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य भी रखा गया है। मसूर और उड़द के उत्पादन को बढ़ाने के लिए शीघ्र बोनस योजना लाने की घोषणा की गई।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए फूड प्रोसेसिंग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इंदौर सहित पूरे प्रदेश में उद्योग और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। मध्यप्रदेश देश के मध्य में स्थित होने के कारण रोड, रेल और एयर कनेक्टिविटी के लिहाज से मजबूत है। एयरकार्गो के विकास पर भी काम हो रहा है, जिससे व्यापार और निर्यात को गति मिलेगी। दाल मिल उद्योग से जुड़े सभी पक्षों के साथ भोपाल में एक विस्तृत कार्यशाला आयोजित करने की घोषणा भी की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक छवि मजबूत हुई है और किसानों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। केंद्र सरकार के विकास मॉडल के तहत गरीब, किसान, युवा और नारी को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। राज्य सरकार ने किसान कल्याण के लिए अगले पांच वर्षों का रोडमैप तैयार किया है और बजट को 15 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर से दोगुना करने का संकल्प लिया है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश कृषि उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है और कृषि क्षेत्र का राज्य जीडीपी में योगदान 39 प्रतिशत है।
मुख्यमंत्री ने देशभर से आए उद्योगपतियों से मध्यप्रदेश में निवेश का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार जमीन, बिजली, पानी और टैक्स में रियायत सहित हर स्तर पर सहयोग करेगी। एमएसएमई और लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और रोड शो आयोजित किए गए हैं। औद्योगिक प्रोत्साहन के तहत 5500 करोड़ रुपए से अधिक की राशि डीबीटी के जरिए दी जा चुकी है। रोजगारपरक उद्योगों के लिए सरकार 10 वर्षों तक प्रति श्रमिक 5000 रुपए मासिक प्रोत्साहन दे रही है। साथ ही श्रम कानूनों को सरल किया गया है और श्रमिक हितों की रक्षा का भरोसा भी दिया गया है।