छिंदवाड़ा में ‘विकास’ की दर्दनाक तस्वीर, 8 KM डोली में गर्भवती... नवजात की मौत

छिंदवाड़ा के दमुआ विधानसभा क्षेत्र से ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है। जुन्नारदेव विकासखंड की ग्राम पंचायत गोप के मजरे टोला चीटीपाठा (जामुनडोंगा) में सड़क नहीं होने के कारण एक गर्भवती महिला को करीब 8 किलोमीटर तक डोली में ले जाना पड़ा। अस्पताल पहुंचने से पहले ही हालात बिगड़ गए और महिला ने मृत बच्चे को जन्म दिया। महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है और वह आईसीयू में भर्ती है।
प्रसव पीड़ा के बाद डोली में शुरू हुआ सफर
चीटीपाठा निवासी सोनू मलगाम की 22 वर्षीय पत्नी कुस्तरिया को बुधवार रात अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस भी सीधे नहीं पहुंच सकी। गुरुवार सुबह करीब 6 बजे परिजनों और सरपंच सियाबती कंचनशाह नर्रे ने महिला को डोली में बैठाकर अस्पताल के लिए रवाना किया। पथरीले और उबड़-खाबड़ रास्ते से करीब 8 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद महिला को गोप पंचायत मुख्यालय पहुंचाया गया। यहां से 108 एंबुलेंस के जरिए उसे दमुआ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।
दमुआ से छिंदवाड़ा किया गया रेफर
दमुआ अस्पताल पहुंचने तक महिला की हालत गंभीर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे तत्काल जिला अस्पताल छिंदवाड़ा रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में महिला ने मृत बच्चे को जन्म दिया। फिलहाल उसकी हालत बेहद गंभीर है और उसे आईसीयू में रखा गया है।
125 घरों की बस्ती, लेकिन सड़क और बिजली नहीं
ग्रामीणों के मुताबिक जामुनडोंगा में करीब 125 घर हैं, लेकिन आज भी यहां पक्की सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। सड़क नहीं होने के कारण सरकारी कर्मचारी भी गांव के अंदर तक नहीं पहुंच पाते और अधिकांश काम पंचायत मुख्यालय से ही चलता है। सरपंच सियाबती नर्रे का कहना है कि वर्ष 2016 से ग्राम सभा के माध्यम से सड़क निर्माण के प्रस्ताव मुख्यमंत्री, कलेक्टर और विधायक तक भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ।
ग्रामीणों का दावा- पहले भी हो चुकी हैं मौतें
ग्रामीणों का कहना है कि प्रसव के दौरान महिलाओं को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले दिनबती नर्रे और रेखा मलगाम को भी इसी तरह अस्पताल ले जाना पड़ा था। ग्रामीणों ने दावा किया कि समय पर इलाज और सड़क की सुविधा नहीं मिलने के कारण कविता मलगाम, गौरा वरकडे और मनवती नर्रे की भी पहले मौत हो चुकी है।
सवालों के घेरे में स्वास्थ्य और सड़क व्यवस्था
इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ विकास और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए 8 किलोमीटर तक डोली का सहारा लेना पड़ा।





















