लोन के नाम पर बड़ा खेल! ग्राहकों के दस्तावेजों से खुलवाए फर्जी खाते, 22.88 लाख का फर्जीवाड़ा

हरसूद। हरसूद में श्रीराम फाइनेंस से जुड़े लोन फर्जीवाड़े ने ग्राहकों के दस्तावेजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के अनुसार, लोन लेने पहुंचे लोगों से लिए गए दस्तावेजों का इस्तेमाल उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाने में किया गया। इसके बाद इन खातों के जरिए कथित तौर पर लोन स्वीकृत कराकर कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और मामले में पूर्व सेल्स एग्जीक्यूटिव समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में करीब 40 ग्राहकों के नाम सामने आए हैं। पुलिस अब पूरे नेटवर्क और रकम के इस्तेमाल की जांच कर रही है।
ग्राहकों के कागज लिए, फिर खुलवाए खाते
पुलिस के मुताबिक, लोन के लिए ग्राहक फाइनेंस कंपनी के पास पहुंचते थे। इस दौरान उनके जरूरी दस्तावेज सेल्स एग्जीक्यूटिव के पास जमा होते थे। आरोप है कि इन्हीं कागजों का इस्तेमाल ग्राहकों की जानकारी के बिना बैंक खाते खुलवाने में किया गया। इसके बाद फर्जी प्रक्रिया के जरिए लोन कराया गया।
करीब 40 लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल
जांच में अब तक करीब 40 लोगों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खोले जाने की बात सामने आई है। पुलिस का कहना है कि इन खातों के जरिए श्रीराम फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड को करीब 22 लाख 88 हजार 567 रुपये का नुकसान हुआ। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कितने लोन स्वीकृत हुए और रकम का इस्तेमाल किस तरह किया गया।
पूर्व सेल्स एग्जीक्यूटिव समेत तीन गिरफ्तार
शिकायत मिलने के बाद हरसूद पुलिस ने अपराध क्रमांक 283/26 दर्ज कर जांच शुरू की। मामले में पूर्व सेल्स एग्जीक्यूटिव विपुल ठाकुर समेत श्यामसिंह सांवनेर और शिवम महाजन को गिरफ्तार किया गया। तीनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से पुलिस को रिमांड मिला। अब आरोपियों से लोन और बैंक खातों से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है।
तीन अन्य आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस जांच में देवीराज, विशाल कोचले और विजयराज ठाकुर के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस इन तीनों की तलाश कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, मामले में कुल छह लोगों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, सभी की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
कैसे सामने आया पूरा फर्जीवाड़ा?
हरसूद थाना प्रभारी जगदीश सिंधिया के अनुसार, ग्राहकों से लोन प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज लिए जाते थे। आरोप है कि बाद में उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी खाते खुलवाकर लोन कराया गया। पुलिस अब यह जांच रही है कि बैंक खाते किस प्रक्रिया से खोले गए और लोन की रकम किन लोगों तक पहुंची।
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दस्तावेज देने वाले ग्राहकों की जानकारी जुटा रही पुलिस
पुलिस करीब 40 ग्राहकों से जुड़े दस्तावेजों और खातों की जांच कर रही है। साथ ही फाइनेंस कंपनी की लोन प्रक्रिया, बैंक रिकॉर्ड और आरोपियों के बीच संपर्क की भी पड़ताल की जा रही है। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि पूरे मामले में किस आरोपी की क्या भूमिका थी और कथित तौर पर रकम कहां गई।
EDIT BY: ADITI RAWAT





















