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‘मैंने कोई पत्र देखा ही नहीं’, चंपत राय की 9 पन्नों की चिट्ठी पर पहली बार बोले नृपेंद्र मिश्रा

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने चंपत राय की 9 पन्नों की चिट्ठी पर पलटवार किया है। मिश्रा ने कहा कि उन्होंने पत्र देखा ही नहीं और विवाद पैदा करने की कोशिश हो रही है। चंपत राय ने मंदिर निर्माण में मनमानी और फैसलों को लेकर कई दावे किए हैं। जानिए पूरा विवाद और दोनों पक्षों की बातें विस्तार से।
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‘मैंने कोई पत्र देखा ही नहीं’, चंपत राय की 9 पन्नों की चिट्ठी पर पहली बार बोले नृपेंद्र मिश्रा
अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने चंपत राय की 9 पन्नों की चिट्ठी पर पलटवार किया है।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष व पूर्व IAS अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। चंपत राय की ओर से मंदिर निर्माण समिति और नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर 9 पन्नों की चिट्ठी सामने आने के बाद अब मिश्रा ने पहली बार इस पर प्रतिक्रिया दी है।

‘मैंने कोई पत्र देखा ही नहीं’

शुक्रवार को अयोध्या के सर्किट हाउस में नृपेंद्र मिश्रा ने चंपत राय की चिट्ठी को लेकर कहा कि उन्होंने ऐसा कोई पत्र देखा ही नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक वह पत्र खुद नहीं देख लेते, तब तक उस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। मिश्रा ने यह भी कहा कि मीडिया के जरिए सिर्फ विवाद खड़ा करने की कोशिश की जा रही है। जब उनसे पूछा गया कि चंपत राय ने 9 पन्नों की चिट्ठी में उन पर मनमानी के आरोप लगाए हैं, तो उन्होंने कहा कि हो सकता है पत्र 9 पन्नों का हो, लेकिन उसमें इस तरह की आलोचना नहीं की गई होगी।

चंपत राय ने लगाए थे कई गंभीर आरोप

राम मंदिर ट्रस्ट से इस्तीफा देने के बाद चंपत राय की 9 पन्नों की दूसरी चिट्ठी सामने आई है। इसमें उन्होंने मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर कई दावे किए हैं। चंपत राय के मुताबिक, राम मंदिर निर्माण के लिए बने ट्रस्ट में 15 ट्रस्टी थे और नृपेंद्र मिश्रा को निर्माण समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। उन्होंने दावा किया कि नृपेंद्र मिश्रा की सलाह पर L&T को मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी दी गई। वहीं मंदिर और परिसर के दूसरे भवनों की डिजाइन और निर्माण से जुड़े काम के लिए नोएडा की Design Associates फर्म को चुना गया।

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‘अपनी पसंद के लोगों को समिति में शामिल किया’

चंपत राय ने आरोप लगाया कि नृपेंद्र मिश्रा ने निर्माण समिति में अपनी पसंद के कुछ लोगों को शामिल किया। उनके मुताबिक, इनमें से कुछ लोग छह साल के दौरान सिर्फ एक-दो बार ही अयोध्या आए। उन्होंने पूर्व NBCC चेयरमैन अनूप मित्तल का भी जिक्र किया और कहा कि वह लगातार नृपेंद्र मिश्रा के साथ निर्माण समिति की बैठकों में शामिल होते थे। चंपत राय ने यह भी दावा किया कि निर्माण से जुड़े फैसले समिति की बैठकों में लिए जाते थे, लेकिन कई मामलों में बाद में बदलाव कर दिए गए और नृपेंद्र मिश्रा के फैसलों को प्राथमिकता दी गई।

चढ़ावा चोरी के मामले के बाद दिया था इस्तीफा

चंपत राय ने मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद 26 जून को महासचिव पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद 6 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक में उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया गया। इस्तीफा मंजूर होने के दिन ही चंपत राय ने एक पत्र जारी कर ट्रस्टी अनिल मिश्र पर भी गंभीर आरोप लगाए थे।

राम मंदिर आंदोलन और कानूनी लड़ाई का भी जिक्र

अपनी चिट्ठी में चंपत राय ने राम जन्मभूमि से जुड़े लंबे इतिहास और कानूनी लड़ाई का भी उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि 1950 से 1989 के बीच स्थानीय अदालतों में चार मुकदमे दायर किए गए थे। बाद में मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच तक पहुंचा, जहां तीन सदस्यीय पीठ ने करीब 15 साल तक इसकी सुनवाई की। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने विवाद का समाधान बातचीत के जरिए निकालने की कोशिश भी की थी। इसके लिए तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति बनाई गई और मार्च से जुलाई 2019 के बीच कई दौर की बैठकें हुईं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बना ट्रस्ट

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया। ट्रस्ट में कुल 15 ट्रस्टियों की व्यवस्था की गई। चंपत राय ने अपनी चिट्ठी में मंदिर निर्माण से जुड़ी शुरुआती तैयारियों और अलग-अलग संस्थाओं को दी गई जिम्मेदारियों का भी जिक्र किया है। मंदिर निर्माण के लिए L&T, निर्माण की निगरानी के लिए Tata Consulting Engineers (TCE) और परिसर के दूसरे भवनों की डिजाइन के लिए नोएडा की Design Associates फर्म को जिम्मेदारी दिए जाने की बात पत्र में कही गई है।

अब विवाद पर नृपेंद्र मिश्रा का जवाब

चंपत राय की चिट्ठी सामने आने के बाद नृपेंद्र मिश्रा का बयान इस पूरे मामले में पहला बड़ा जवाब माना जा रहा है। उन्होंने पत्र देखे बिना आरोपों पर टिप्पणी करने से इनकार किया और कहा कि विवाद पैदा करने की कोशिश की जा रही है। अब देखना होगा कि चंपत राय की ओर से नृपेंद्र मिश्रा के इस बयान पर कोई अगली प्रतिक्रिया आती है या नहीं।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

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