वंदे मातरम को लेकर आमने-सामने कांग्रेस-BJP, शाह के हमले पर जयराम रमेश का जवाब

वंदे मातरम को लेकर देश की सियासत में घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की ओर से पार्टी के कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के पहले दो अंतरे गाने के फैसले पर बीजेपी लगातार कांग्रेस को घेर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस के इस रुख को लेकर तीखा हमला बोला और इसे तुष्टीकरण की राजनीति से जोड़ दिया। अब कांग्रेस ने भी पलटवार करते हुए बीजेपी पर राष्ट्रवाद के नाम पर राजनीति करने और जनता से जुड़े असली मुद्यों से ध्यान हटाने का आरोप लगाया है।
जयराम रमेश बोले- बीजेपी कर रही दिखावटी राष्ट्रवाद
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी का मौजूदा रुख अचानक लिया गया फैसला नहीं है। उन्होंने कांग्रेस कार्यसमिति के 1937 के प्रस्ताव का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी उसी ऐतिहासिक निर्णय के अनुरूप वंदे मातरम के पहले दो अंतरे गाती है। रमेश के अनुसार, 28 अक्टूबर 1937 को CWC में वंदे मातरम को लेकर फैसला हुआ था। इस प्रक्रिया में जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, गोविंद बल्लभ पंत और आचार्य नरेंद्र देव जैसे कांग्रेस के प्रमुख नेता शामिल थे। उन्होंने कहा कि यह फैसला रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के आधार पर तैयार किया गया था। जयराम रमेश ने बीजेपी नेताओं पर 'फर्जी और दिखावटी राष्ट्रवाद' करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस 1937 में तय किए गए अपने रुख का पालन करती रहेगी। कांग्रेस का कहना है कि वंदे मातरम को लेकर पार्टी की स्थिति को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
अमित शाह ने कांग्रेस पर लगाया गंभीर आरोप
इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस के फैसले पर जोरदार हमला किया था। शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वंदे मातरम को दो हिस्सों में बांटने वाला फैसला लिया और यह देश के लिए 'देश विरोधी' फैसला है। उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी। अमित शाह ने यह भी आरोप लगाया कि वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस के पुराने फैसलों ने आगे चलकर देश के विभाजन की राजनीति का रास्ता तैयार किया। बीजेपी इस मुद्दे को राष्ट्रीय पहचान और राष्ट्रवाद से जोड़कर कांग्रेस पर लगातार हमला कर रही है।
कांग्रेस ने कहा- असली मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश
जयराम रमेश ने बीजेपी के हमले को राजनीतिक रणनीति बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि वंदे मातरम को लेकर विवाद खड़ा करके सरकार जनता से जुड़े मुद्दों और अपनी कथित नाकामियों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस नेता ने छात्रों से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया। रमेश ने यह भी कहा कि पिछले साल वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के मौके पर हुई चर्चाओं के दौरान बीजेपी ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और रवींद्रनाथ टैगोर को लेकर अलग राजनीतिक नैरेटिव बनाने की कोशिश की।
1950 में राष्ट्रीय गीत का दर्जा मिला
वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस अपने ऐतिहासिक रुख का बचाव करते हुए 1950 के घटनाक्रम का भी हवाला दे रही है। जयराम रमेश ने कहा कि 25 जनवरी 1950 को संविधान सभा की आखिरी बैठक में राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की थी कि 'जन गण मन' को राष्ट्रगान और 'वंदे मातरम' को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया जाएगा। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक भी संविधान सभा ने 1950 में वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया था। केंद्र सरकार 2025-26 में इसके 150 वर्ष पूरे होने पर देशभर में सालभर का आयोजन भी कर रही है।
केरल में बीजेपी का प्रदर्शन, सरकार पर लगाए आरोप
विवाद का असर केरल में भी दिखाई दे रहा है। बीजेपी ने शुक्रवार को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर वंदे मातरम को लेकर कार्यक्रम करने का ऐलान किया है। पार्टी के राज्य महासचिव एस. सुरेश के मुताबिक, राज्य के 30 संगठनात्मक जिलों में ये कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बीजेपी का आरोप है कि केरल सरकार ने स्वतंत्रता दिवस के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में वंदे मातरम को शामिल नहीं किया। पार्टी ने राज्य सरकार पर वंदे मातरम की अनदेखी करने और जमात-ए-इस्लामी तथा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के कथित सांप्रदायिक और विभाजनकारी एजेंडे को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।
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यूपी में भी कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने
उत्तर प्रदेश में भी वंदे मातरम का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। बीजेपी नेता और यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया। मौर्य ने एक्स पर लिखा, "रस्सी जल गई मगर बल नहीं गया।" उन्होंने कहा कि परिस्थितियां बदल चुकी हैं, लेकिन कांग्रेस अब भी दशकों पुराने फैसले पर कायम है। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि गीत में मां दुर्गा, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती के उल्लेख से उसे आपत्ति क्यों है और बाकी अंतरे गाने से इनकार किसके लिए किया जा रहा है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस विवाद पर बीजेपी को घेरा। पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने दावा किया कि बीजेपी नेता खुद वंदे मातरम नहीं गा सकते और गीत बजने पर केवल सिर हिलाते हैं। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी बीजेपी पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्रता आंदोलन में उसके योगदान को लेकर सवाल किया। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के एक कथित पत्र और आरएसएस के पूर्व प्रमुख केबी हेडगेवार के राष्ट्रीय ध्वज को लेकर कथित रुख का हवाला दिया। हालांकि, इन दावों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं।
कांग्रेस बोली- हमारे कार्यक्रमों में हमेशा गाया गया वंदे मातरम
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम हमेशा गाया जाता रहा है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी में 1937 से यह परंपरा चली आ रही है और कांग्रेस आज भी उसी परंपरा का पालन कर रही है। इस तरह वंदे मातरम अब सिर्फ राष्ट्रगीत के गायन तक सीमित मुद्दा नहीं रह गया है। कांग्रेस इसे अपने ऐतिहासिक फैसले और धर्मनिरपेक्षता से जोड़ रही है, जबकि बीजेपी इसे राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सम्मान का सवाल बना रही है। केरल से उत्तर प्रदेश तक जारी बयानबाजी से साफ है कि आने वाले दिनों में यह विवाद संसद से लेकर राज्यों की राजनीति तक और ज्यादा गरम हो सकता है।





















