Raipur: चिदंबरम के नक्सलवाद पर बयान से भड़का बस्तर, पूर्व गृहमंत्री से माफी की मांग

रायपुर: राजधानी रायपुर में पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम के नक्सलवाद से जुड़े कथित बयान को लेकर बस्तर शांति समिति ने मोर्चा खोल दिया है। समिति ने प्रेसवार्ता कर बयान को बस्तरवासियों की भावनाओं को आहत करने वाला बताया और चिदंबरम से माफी की मांग की। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि माफी नहीं मांगी गई तो दिल्ली में प्रदर्शन किया जाएगा।
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बयान पर बस्तर में बवाल
पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम के उस कथित बयान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है, जिसमें नक्सलवाद से जुड़े विचारों को लेकर उन्होंने कथित तौर पर गर्व की बात कही। इस बयान पर बस्तर शांति समिति ने कड़ी आपत्ति जताई है। रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में समिति के सदस्यों ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी बताया।
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बस्तर ने हिंसा का दर्द झेला है
समिति के सदस्यों ने कहा कि बस्तर ने दशकों तक नक्सली हिंसा का दंश झेला है। इस संघर्ष में अनेक परिवारों ने अपने परिजनों को खोया, घर उजड़े और बड़ी संख्या में लोगों ने हिंसा एवं भय के बीच जीवन बिताया। ऐसे में नक्सलवाद को लेकर किसी भी तरह की टिप्पणी बस्तरवासियों के जख्मों को फिर से कुरेदने वाली हो सकती है।
नक्सलवाद सिर्फ विचारधारा नहीं, दर्द है
शांति समिति ने कहा कि बस्तर के लिए नक्सलवाद महज कोई राजनीतिक या वैचारिक मुद्दा नहीं है। यह हजारों परिवारों की जिंदगी, सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। समिति के मुताबिक हिंसा से प्रभावित परिवारों ने लंबे समय तक अपने लोगों की मौत, विस्थापन और भय का सामना किया है।
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पूर्व गृहमंत्री से संवेदनशीलता की उम्मीद
समिति ने सवाल उठाया कि बयान देने से पहले क्या पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री ने उन परिवारों की पीड़ा समझने की कोशिश की, जिन्होंने नक्सली हिंसा में अपने परिजनों को खोया है? सदस्यों ने कहा कि जिस व्यक्ति ने देश के गृहमंत्री के रूप में आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली हो, उससे नक्सलवाद जैसे गंभीर विषय पर अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार बयान की अपेक्षा की जाती है।
माफी नहीं तो दिल्ली में प्रदर्शन
बस्तर शांति समिति ने पी. चिदंबरम से अपने बयान को लेकर माफी मांगने की मांग की है। समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी ओर से माफी नहीं मांगी जाती है, तो बस्तर की आवाज को दिल्ली तक पहुंचाया जाएगा और राजधानी में प्रदर्शन किया जाएगा।
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बस्तर के जख्मों का मुद्दा गरमाया
इस पूरे विवाद के बाद नक्सलवाद को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस एक बार फिर तेज होने के आसार हैं। बस्तर शांति समिति ने साफ किया है कि नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों की पीड़ा को किसी भी राजनीतिक या वैचारिक बयान से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।





















